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प्राचीन भारतीय ज्ञान और योग प्रणाली के प्रयोग से ही जीवन पद्धति में सुधार - बीके शिवानी

- प्राचीन भारतीय ज्ञान और योग प्रणाली के प्रयोग से ही जीवन पद्धति में सुधार - बीके शिवानी - शिक्षाविदों के तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का समापन - शिक्षा में आध्यात्मिक मूल्यों के समावेश पर दिया गया विशेष जोर 29 सितम्बर 2024, गुरुग्राम प्राचीन भारतीय ज्ञान और योग प्रणाली के प्रयोग से ही जीवन पद्धति में सुधार - बीके शिवानी प्राचीन भारतीय ज्ञान और योग प्रणाली के प्रयोग से ही सुखद जीवन पद्धति का निर्माण हो सकता है। उक्त विचार सुप्रसिद्ध प्रेरक वक्ता बीके शिवानी ने व्यक्त किए। यह बात उन्होंने ब्रह्माकुमारीज़ के ओम शांति रिट्रीट सेंटर में शिक्षाविदों के सम्मेलन में कही। दादी प्रकाशमणी सभागार में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम अपडेट हो सकता है। लेकिन संस्कृति और संस्कार अपडेट नहीं हो सकते। उन्होंने कहा कि संकल्प से हमारी दुनिया बनती है। मन की कमजोरी से ही जीवन का हर पहलू कमजोर होता है। प्राचीन भारतीय ज्ञान और योग प्रणाली के प्रयोग से ही जीवन पद्धति में सुधार - बीके शिवानी - रोल महत्वपूर्ण है लेकिन आत्मिक शक्ति सबसे महत्वपूर्ण है बीके शिवानी ने कहा कि रोल से अधिक महत्वपूर्ण आत...

शिक्षाविदों के लिए तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन

- आध्यात्मिकता भारत की सबसे बड़ी शक्ति - डॉ. पीबी शर्मा - शिक्षाविदों के लिए तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन - ब्रह्माकुमारीज़ के ओम शांति रिट्रीट सेंटर में हुआ कार्यक्रम 28 सितम्बर 2024, गुरुग्राम बेहतर जीवन के लिए आध्यात्मिक ज्ञान विषय पर ब्रह्माकुमारीज़ के गुरुग्राम स्थित ओम शांति रिट्रीट सेंटर में तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारम्भ हुआ। दादी प्रकाशमणी सभागार में आयोजित कार्यक्रम में काफी संख्या में यूनिवर्सिटी, कॉलेज एवं स्कूल के रजिस्ट्रार, प्रिंसिपल, डीन, प्रोफेसर एवं लेक्चरर उपस्थित थे। आध्यात्मिकता भारत की सबसे बड़ी शक्ति - डॉ. पीबी शर्मा सभा को सम्बोधित करते हुए एमिटी यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर डॉ.पीबी शर्मा ने कहा कि आध्यात्मिकता भारत की सबसे बड़ी शक्ति है। आज विश्व की स्थिति बड़ी चिंताजनक है। साइंस और टेक्नोलॉजी ने हमें अभिमानी बना दिया है। उन्होंने कहा कि ओम शांति के भाव में स्थित होने से ही मन शांति का अनुभव कर सकता है। ओआरसी की निदेशिका राजयोगिनी आशा दीदी ने कहा कि आज पूरा विश्व भारत की आध्यात्मिक शिक्षा की ओर आकर्षित हो रहा है। ब्रह्माकुमारीज़ के आध्यात्मिक म...

सकारात्मक खबरों को बढ़ावा देने से ही समाज स्वस्थ और सुखी होगा: केंद्रीय मंत्री डॉ. मुरुगन

सकारात्मक खबरों को बढ़ावा देने से ही समाज स्वस्थ और सुखी होगा: केंद्रीय मंत्री डॉ. मुरुगन   - राष्ट्रीय मीडिया सम्मेलन का शुभारंभ - केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्यमंत्री डॉ. एल. मुरुगन, मुख्य प्रसाशिका दादी रतन मोहिनी, आईआईएमसी के पूर्व निदेशक प्रो. संजय द्विवेदी, पूर्व कुलपति डॉ. मान सिंह परमार और ब्रह्माकुमारीज के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने किया शुभारंभ - भारत सहित नेपाल से एक हजार से अधिक पत्रकार, संपादक, ब्यूरो चीफ और मीडिया प्रोफेसर पहुंचे आबू रोड। ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान के आबू रोड स्थित मुख्यालय शांतिवन के आनंद सरोवर परिसर में आयोजित राष्ट्रीय मीडिया सम्मेलन का उद्घाटन केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्यमंत्री डॉ. एल. मुरुगन और मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी दादी रतन मोहिनी ने किया। मीडिया विंग द्वारा स्वस्थ एवं सुखी समाज के लिए आध्यात्मिक सशक्तिकरण- मीडिया की भूमिका विषय पर आयोजित इस राष्ट्रीय सम्मेलन में भाग लेने के लिए देशभर से एक हजार से अधिक प्रिंट, इलेक्ट्रानिक, रेडियाे और बेव जर्नलिज्म से जुड़े पत्रकार, संपादक, ब्यूरो चीफ, रेडियो जॉकी, फ्रीलांसर पत्रकार और मीडिया प्रोफेसर पहुंचे ह...

आत्मनिर्भर किसान, स्वर्णिम भारत की शान विषय पर हुआ कार्यक्रम

- आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में किसानों की महत्वपूर्ण भूमिका - जगदीश यादव - किसानों के लिए एक दिवसीय सम्मेलन का  आयोजन - आत्मनिर्भर किसान, स्वर्णिम भारत की शान विषय पर हुआ कार्यक्रम - ब्रह्माकुमारीज़ के ओम शांति रिट्रीट सेंटर में हुआ कार्यक्रम 24 सितम्बर 2024, गुरुग्राम आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में किसानों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उक्त विचार दिल्ली सरकार के ओबीसी आयोग के अध्यक्ष जगदीश यादव ने व्यक्त किए। यह बात उन्होंने गुरुग्राम स्थित ब्रह्माकुमारीज के ओम शांति रिट्रीट सेंटर में किसानों के लिए आयोजित कार्यक्रम में कही। दादी प्रकाशमणी सभागार में आत्मनिर्भर किसान स्वर्णिम भारत की शान विषय पर उन्होंने कहा कि किसानों के कारण ही हमारा देश आत्मनिर्भर बन सकता है। ब्रह्माकुमारीज़ किसानों के सशक्तिकरण के लिए सराहनीय कार्य कर रही है। ये एक ऐसी संस्था है जो पूरे विश्व में शांति की पुनर्स्थापना के लिए समर्पित है। उन्होंने कहा कि कर्म से ही व्यक्ति महान बनता है। ओम शांति रिट्रीट सेंटर की निदेशिका राजयोगिनी आशा दीदी ने कहा कि भारत कृषि प्रधान देश है। किसान हमारे देश का गौरव हैं। अध्यात्म इसक...

आध्यात्मिक जागृति से ही श्रेष्ठ समाज की पुनर्स्थापना - अमित कुमार घोष

- आध्यात्मिक जागृति से ही श्रेष्ठ समाज की पुनर्स्थापना - अमित कुमार घोष - सेवा दुआएं कमाने का सहज माध्यम - समाजसेवियों के तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का समापन - ब्रह्माकुमारीज़ के समाज सेवा प्रभाग द्वारा हुआ आयोजन - संस्था द्वारा समाजसेवियों को किया गया सम्मानित 22 सितम्बर 2024, गुरुग्राम न्यायिक प्रक्रिया में सुधार की जरूरत है। अधिकतर मुकदमे सालों साल तक लंबित रहते हैं। उक्त विचार भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव अमित कुमार घोष ने व्यक्त किए। ये बात उन्होंने ब्रह्माकुमारीज़ के ओम शांति रिट्रीट सेंटर में आयोजित समाज सेवियों के तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के समापन सत्र में कही। आध्यात्मिक जागृति से ही श्रेष्ठ समाज की पुनर्स्थापना - अमित कुमार घोष उन्होंने कहा कि आज जेलों में जगह नहीं है। युवाओं को मोहरा बनाकर ड्रग्स का धंधा हो रहा है। जिसका मूल कारण नैतिक एवं चारित्रिक पतन है। इसलिए आध्यात्मिक जागृति की नितांत आवश्यकता है। इसके द्वारा ही श्रेष्ठ समाज की स्थापना की जा सकती है। ब्रह्माकुमारीज़ संस्था इस क्षेत्र में सराहनीय कार्य कर रही है। संस्था सरकार ...

तीन दिवसीय समाजसेवी राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारम्भ

- आध्यात्मिकता से ही सामाजिक सशक्तिकरण संभव - मोनाली धकाते - तीन दिवसीय समाजसेवी राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारम्भ - ब्रह्माकुमारीज़ के ओम शांति रिट्रीट सेंटर में हुआ आयोजन 21 सितम्बर 2024, गुरुग्राम ब्रह्माकुमारीज़ के ओम शांति रिट्रीट सेंटर में समाज सेवियों के लिए तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारम्भ हुआ। दादी प्रकाशमणी सभागार में आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की संयुक्त सचिव मोनाली धकाते ने बतौर मुख्य अतिथि अपने विचार रखे। स्वच्छ एवं स्वस्थ समाज के लिए आध्यात्मिक सशक्तिकरण विषय पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक सशक्तिकरण ही वास्तव में असली सशक्तिकरण हैं। आध्यात्मिकता से ही सामाजिक सशक्तिकरण हो सकता है। आध्यात्मिकता जीवन की प्रक्रिया है। आध्यात्मिकता ही जीवन है क्योंकि मूल्यों की जागृति चेतना से होती है। योग हमें स्वयं से जोड़ता है। उन्होंने कहा कि ब्रह्माकुमारीज़ द्वारा आध्यात्मिक सशक्तिकरण के लिए बहुत ही सराहनीय कार्य हो रहा है। फरीदाबाद से रॉटरी क्लब के असिस्टेंट गवर्नर विपिन चंदा ने कहा कि आध्यात्मिक जागृति से ही सामा...

कोई दूसरा पृथ्वी नहीं है – इसका ध्यान रखें!

 कोई दूसरा पृथ्वी नहीं है – इसका ध्यान रखें! तेज़ी से विकास और औद्योगिकीकरण की दौड़ में हमने एक महत्वपूर्ण सच्चाई को भुला दिया है: धरती जैसा कोई दूसरा ग्रह नहीं है। हम लगातार धरती के प्राकृतिक संसाधनों का दोहन कर रहे हैं, इसके जल स्रोतों को प्रदूषित कर रहे हैं, और महासागरों से जमीन पर कब्जा कर रहे हैं। अब समय आ गया है कि जल और संसाधनों पर हो रहे युद्ध को रोकें और एक टिकाऊ भविष्य की ओर बढ़ें। 1. रासायनिक प्रदूषण को रोकें कृषि में रसायनों का अत्यधिक उपयोग हमारी मिट्टी और पानी को बर्बाद कर रहा है। विष मुक्त विश्व (Vish Mukt Vishv) का आह्वान है कि हानिकारक रसायनों का उपयोग बंद करें और प्राकृतिक खेती को अपनाएं। प्राकृतिक खेती से हम भूमि और जल को विषाक्त पदार्थों से बचाते हैं और भविष्य की पीढ़ियों के लिए जैव विविधता को सुरक्षित रखते हैं। 2. जल के अवरोध और प्रदूषण को समाप्त करें जल जीवन है, और हम इस कीमती संसाधन पर युद्ध कर रहे हैं। नदियों के अवरोध से लेकर महासागरों के कब्जे तक, पृथ्वी के जल तंत्र बुरी तरह से प्रभावित हो रहे हैं। हमें जल अवरोधों को रोकना, महासागरों से अनावश्यक भूमि कब्जे ...

गृह मंत्री अमित शाह ने बढ़ाया हिंदी का मान

 गृह मंत्री अमित शाह ने बढ़ाया हिंदी का मान  - डॉ. विपिन कुमार (लेखक वरिष्ठ स्तंभकार हैं) आज पूरे देश में ‘राष्ट्रीय हिन्दी दिवस’ को एक उत्सव के रूप में मनाया जा रहा है। इस दिवस को हम हर वर्ष एक भाषा के तौर पर हिन्दी के महत्व और अनिवार्यता को ध्यान में रखते हुए मनाते हैं। यह हमें अपने देश के भाषाई विविधता को बढ़ावा देने और उत्सव मनाने का भी एक अभूतपूर्व अवसर प्रदान करता है। गौरतलब है कि हमारे संविधान सभा ने 14 सितंबर, 1949 को एक मत होकर हिन्दी को भारत की राजभाषा के तौर पर अंगीकार किया था।  इस अवसर पर राष्ट्र की राजधानी दिल्ली में भारत मंडपम के भव्य प्रांगण में चतुर्थ ‘अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन’ का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह हिन्दी की समृद्धता और भविष्य के संकल्पों के प्रति अपने विचारों को साझा करेंगे।  मैं इस अवसर पर ख़ासकर राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय सचिव श्रीमती अंशुली आर्या एवं विभागीय अधिकारियों को विशेष रूप से धन्यवाद देना चाहता हूँ कि उन्होंने अथक प्रयास कर इस राजभाषा सम्मेलन को सफल एवं सार्थक बनाने में बहुत महत्...

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक का परिचय

 11 सितम्बर 1950 , राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक  माननीय श्री मोहन मधुकरराव भागवतजी को  जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं ।          मोहनराव मधुकरराव भागवत का जन्म महाराष्ट्र के चन्द्रपुर नामक एक छोटे से नगर में  हुआ था, वे संघ कार्यकर्ताओं के परिवार से हैं, उनके पिता मधुकरराव भागवत चन्द्रपुर क्षेत्र के प्रमुख थे जिन्होंने गुजरात के प्रान्त प्रचारक के रूप में कार्य किया था, मधुकरराव ने ही लाल कृष्ण आडवाणी का संघ से परिचय कराया था, उनके एक भाई संघ की चन्द्रपुर नगर इकाई के प्रमुख हैं, मोहन भागवत कुल तीन भाई और एक बहन चारो में सबसे बड़े हैं, मोहन भागवत ने चन्द्रपुर के लोकमान्य तिलक विद्यालय से अपनी स्कूली शिक्षा और जनता कॉलेज चन्द्रपुर से बीएससी प्रथम वर्ष की शिक्षा पूर्ण की, उन्होंने पंजाबराव कृषि विद्यापीठ, अकोला से पशु चिकित्सा और पशुपालन में स्नातक की उपाधि प्राप्त की।  1975 के अन्त में जब देश तत्कालीन प्रधानमन्त्री इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल से जूझ रहा था, उसी समय वे पशु चिकित्सा में अपना स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम अधूरा छोड़ कर...

लुप्त हो रही प्राचीन भारतीय गुरू शिष्य परंपरा की याद

 पदमश्री डॉ सुभाष पालेकर  वाट्स एप न 9850352745 ता 5 सितंबर 2024 शिक्षक दिन अभी लुप्त हो रही प्राचीन भारतीय गुरू शिष्य परंपरा की याद दिलाने वाले शिक्षक दिन की बधाईयां। जो सत्य ही बोलता है,सत्य के पीछे पहाड़ जैसा खड़ा होकर सत्याग्रह करता है, जो सत्य ही पढ़ाता है वह शिक्षक होता है । जो सत्य के नाम पर असत्य,ज्ञान के नाम पर अज्ञान, विज्ञान के नाम पर अविज्ञान पढ़ाता है, बौद्धिक अहिंसा के नाम पर बौद्धिक हिंसा रूपी बौद्धिक आतंकवाद intellectual extremism फैलाता है,वह शिक्षक कैसे हो सकता है? हरित क्रांति के सेनापति कृषि वैज्ञानिक जब  सौ प्रतिशत झूठा दावा करते हैं की कोई भी खाद फसलों के जड़ोंका भोजन होता है, तब वे शिक्षक कैसे हो सकते हैं? क्योंकि मैंने वैज्ञानिक कसोंटियों पर सिद्ध किया है की कोई भी मानव निर्मित खाद किसी भी पेड़ पौधे का भोजन नहीं है, ईश्वर निर्मित स्वयं विकासी स्वयं पोषी स्वावलंबी व्यवस्था के माध्यम से मानव के किसी भी सहायता के बिना किसी भी पेड़ पौधे को जड़े अपना भोजन भूमि में होने वाले अनंत करोड़ सुक्ष्म जीवाणु संपृक्ति के द्वारा खुद पकाती है और खुद अपने शरीर को वृ...