पद्मश्री डॉ सुभाष पालेकर
पद्मश्री डॉ सुभाष पालेकर साथियों और बहनों, खुदरा बेपारी होल सेल बाजार से अगर रासायनिक खेती से पैदा जहरीली अधिकतम लागत मूल्य होनेवाली सब्जी दस रूपए किलो दाम से खरीदता हैं, और वही सब्जी वह कॉलोनी में जाकर चालीस रुपए किलो से उपभोक्ताओं को बेंचता है। ये मुनाफा के तीस रुपए किसान के जेब में नहीं आए, बिचौले बेपारि के जेब में चले गए। लेकिन,अगर हम सुभाष पालेकर कृषि से पैदा न्यूनतम लागत की वही जहरमुक्त सब्जी बिना बिचौला सीधे कॉलोनी में उपभोक्तो को उसी चालीस रुपए प्रति किलो से बेचते है, तब पुरे चालीस रुपए हमारे जेब में आ जाते है। जब उपभोक्ताओं को रासायनिक खेती से पैदा जहरीली दाल अनाज सब्जी के खुदरा बाजार के दाम में जहरमुक्त दाल अनाज सब्जी उपलब्ध हो जाती है ,तब वह उस खुदरा बेपारियो से क्यों खरीदेगा? आपके सामने उपभोक्ताओं की कतार लग जायेगी। लेकिन, सुभाष पालेकर कृषि करनेवाले किसान अगर अपनी जहर मुक्त दाल अनाज सब्जी के दाम उपभोक्ता जिस दाम से खुदरा बेपारी से दाल अनाज सब्जी खरीदता है उस मूल्य से दुगुने तीन गुने दाम लगाता है, तब उपभोक्ता उससे क्यों...