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पद्मश्री डॉ सुभाष पालेकर

 पद्मश्री डॉ सुभाष पालेकर  साथियों और बहनों, खुदरा बेपारी होल सेल बाजार से अगर रासायनिक खेती से पैदा जहरीली अधिकतम लागत मूल्य होनेवाली सब्जी दस रूपए किलो दाम से  खरीदता हैं, और वही सब्जी वह कॉलोनी में जाकर चालीस रुपए किलो से उपभोक्ताओं को बेंचता है।  ये मुनाफा के तीस रुपए किसान के जेब में नहीं आए, बिचौले बेपारि के जेब में चले गए। लेकिन,अगर हम सुभाष पालेकर कृषि से पैदा न्यूनतम लागत की वही जहरमुक्त सब्जी बिना बिचौला सीधे कॉलोनी में उपभोक्तो को उसी चालीस रुपए प्रति किलो से बेचते है, तब पुरे चालीस रुपए हमारे जेब में आ जाते है।  जब उपभोक्ताओं को रासायनिक खेती से पैदा जहरीली दाल अनाज सब्जी के खुदरा बाजार के दाम में जहरमुक्त दाल अनाज सब्जी उपलब्ध हो जाती है ,तब वह उस खुदरा बेपारियो से क्यों खरीदेगा? आपके सामने उपभोक्ताओं की कतार लग जायेगी।        लेकिन, सुभाष पालेकर कृषि करनेवाले किसान अगर अपनी जहर मुक्त दाल अनाज सब्जी के दाम उपभोक्ता जिस दाम से खुदरा बेपारी से दाल अनाज सब्जी खरीदता है उस मूल्य से दुगुने तीन गुने दाम लगाता है, तब उपभोक्ता उससे क्यों...

पद्मश्री डॉ सुभाष पालेकर की बात

 पद्मश्री डॉ सुभाष पालेकर  ता 25 अगस्त 2024 रविवार  साथियों और बहनों, जिस कृषि पद्धति में बीजामृत जीवामृत घन जीवामृत आच्छादन वाफसा और सह फसलों की एवम मिट्टी में सूक्ष्म जीवाणु की जैव विविधता इन सभी पद्मश्री डॉ सुभाष पालेकर जी द्वारा खोजे गए कृषि साधनों का उपयोग होता है, उस कृषि पद्धति को.......सुभाष पालेकर कृषि .....नाम से पुरे दुनिया में पहछानी जाती है।        लेकिन कुछ लोग इस सुभाष पालेकर कृषि को अज्ञानवश अथवा जानबूझकर... प्राकृतिक खेती ( नैसर्गिक शेती natural farming) ...नाम से प्रचारित  कर रहे हैं। सवाल खडा होता है की क्या सुभाष पालेकर कृषि वास्तव में प्राकृतिक खेती है ? इस सवाल का जवाब हम वैज्ञानिक विश्लेषण के आधार पर दें रहे है।         प्राकृतिक खेती की सही परिभाषा है.... जो जो प्रकृति में अस्तित्व में है वह प्राकृतिक खेती है। Which is existed in the Nature that is natural . अर्थात ,जो जो प्रकृति में बिलकुल अस्तित्व में नहीं हैं,वह प्राकृतिक कैसे हो सकती हैं? माने वह अप्राकृतिक है। प्रकृति माने ईश्वर द्वारा निर्मित ...

केवल पेड़ ही होते हैं ऑक्सीजन बनाने के कारखाने : ग्रीनमैन बघेल

डीपीएस दौलतपुर में आयोजित हुआ हरेला वृक्ष सम्मेलन केवल पेड़ ही होते हैं ऑक्सीजन बनाने के कारखाने : ग्रीनमैन बघेल हरिद्वार, 22 अगस्त। डीपीएस दौलतपुर में भारतीय वृक्ष न्यास की ओर से विगत 6 जुलाई से हरेला लोकपर्व-24 अभियान के तहत आयोजित नियमित श्रृंखला में हरेला वृक्ष दिवस सम्मेलन का आयोजन किया गया। प्रधानाचार्य श्रीमती पूनम श्रीवास्तव ने अध्यक्षता और संचालन सुखविंदर कौर ने किया। हरेला वृक्ष दिवस सम्मेलन के संयोजक सुरेश सुयाल ने भारतीय वृक्ष न्यास (ट्री ट्रस्ट ऑफ इंडिया) द्वारा हरेला को विश्व स्तर तक मनवाये जाने की योजना से संबंधित विस्तृत जानकारी दी। मुख्य अतिथि के रूप में पधारे हरितऋषि विजयपाल बघेल (ग्रीनमैन ऑफ इंडिया) ने अपने संबोधन में कहा कि पेड़ ही प्राणवायु (ऑक्सीजन) बनाने की फैक्ट्री होते हैं जो निरंतर कम होते जा रहे हैं, जैसे जैसे पेड़ घट रहे हैं वैसे वैसे हमारी सांस भी कम होती जा रहीं हैं। ग्रीनमैन बघेल ने आगे कहा कि वर्षाकाल में हर व्यक्ति को अधिकाधिक वृक्षारोपण करना चाहिए, जन्मदिन हो या वर्षगांठ सभी अवसरों को पौधारोपण करके ही मनाया जाना चाहिए। ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्त...

पांचवा मगही अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन नई दिल्ली भारत में हुआ संपन्न

 पांचवा मगही अंतरराष्ट्रीय  सम्मेलन नई दिल्ली भारत में हुआ संपन्न  नई दिल्ली :- 16 अगस्त 2024 को पांचवा मगही अंतरराष्ट्रीय  सम्मेलन गांधी शांति प्रतिष्ठान भारत में हुआ संपन्न.  जिसकी अध्यक्षता डॉ वीर बहादुर महतो (अध्यक्ष मगही अंतरराष्ट्रीय परिषद ) मुख्यअथिति डॉ केशवमान शाक्य ( पूर्व मंत्री नेपाल सरकार) विषय विज्ञ के रूप में प्रशिक्षित सामाजिक कार्यकर्ता आलोक कुमार तिवारी जी, डॉ रामलाल सुतिहार अधिवक्ता डॉ विजय कुमार वर्मा, डॉ केदार मंडल, डॉ नाथ सिंह रसिया, डॉ रामा शंकर कुशवाहा, शिव पूजन कुशवाहा,  गीता शाक्य एवं सोशल एक्टिविस्ट के एल गुप्ता आदि रहे। कार्यक्रम में मगही भाषा को 8वां अनुसूची में दर्ज कराने की मांग की गयी। मगही भाषा की मानवीकरण पर परिचर्चा हुयी वैश्विक स्तर  समावेश मगही शब्दकोश निर्माण करने पर भी महत्वपूर्ण चर्चा हुयी. जिसमें विचार व्यक्त किया गया कि मगही के उत्कर्ष के वार्षिक शब्दावली व्याकरण इत्यादि को निर्मित करना चाहिए.   जन द्वारा भाषा का सामूहिक रूप में प्रयोग होना चाहिए   भाषा संपर्कों में सहायक / अथवा अपनापन को बन...

विश्व हिन्दी परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष आचार्य यार्लगड्डा ने की यूएन राजदूत रवींद्रन से भेंट

 विश्व हिन्दी परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष आचार्य यार्लगड्डा ने की यूएन राजदूत रवींद्रन से भेंट पूर्व राज्यसभा सांसद और विश्वहिंदी परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष आचार्य यार्लगड्डा ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर न्यूयार्क स्थित संयुक्त राष्ट्र कार्यालय में भारत के स्थायी दूतावास में राजदूत रवींद्रन से शिष्टाचार मुलाकात की।  इस अवसर पर उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के आधिकारिक भाषा के रूप में हिन्दी को बढ़ावा देने के प्रयासों पर गहरी चर्चा की। गौरतलब है कि वर्तमान समय में संयुक्त राष्ट्र में केवल छह आधिकारिक भाषाएँ फ्रेंच, अंग्रेजी, चीनी, रूसी, अरबी और स्पेनिश हैं और वर्ष 2022 में यह घोषणा की गई कि यूएन की सूचनाएं हिन्दी में भी प्रकाशित होगी।  वहीं, 2018 में हिंदी @ यूएन' परियोजना शुरू की गई थी, जिसका उद्देश्य हिंदी भाषा में संयुक्त राष्ट्र की सार्वजनिक पहुंच को बढ़ाना और दुनिया भर में हिंदी बोलने वाले लोगों को अधिकतम कंटेट प्रदान करना था। इस अवसर पर आचार्य यार्लगड्डा ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में बिहारी वाजपेयी, पीवी नरसिम्हा राव और नरेंद्र मोदी के अभिभाषणों का भी विशेष उल्लेख किया।...

SPK Farmers News

 पद्मश्री डॉ सुभाष पालेकर  ता 5 अगस्त 2024 सोमवार आज दोपहर मेरे साथ और बजाज उद्योग के कृषि एवम वर्षा जल संग्रहण प्रकल्प संयोजक संचालक श्री अपूर्व बजाज जी के साथ वर्धा मे बजाज उद्योग समूह के द्वारा प्रदान किए गए कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी फंड   माने उद्योग समूह सामाजिक दायित्व निधी के अंतर्गत विदर्भ के वर्धा जिल्हे में सुभाष पालेकर कृषि से हजारों किसानों को प्रशिक्षित किया गया है, इस कमलनयन बजाज फाउंडेशन के सभी क्षेत्रीय अधिकारियों की और केंद्रीय अधिकारियों की ऑनलाइन मीटिंग आज हुई, जिसमे उनके द्वारा पालेकर फूड फॉरेस्ट पंच स्तरीय मॉडल खड़ा करने का काम जिन्होंने जून से शुरू किया है,उन कुल तीस किसानों की सूची प्रस्तुत की गई, और अन्य उन अनेक किसानो की सूची प्रस्तुत हुई जिन्होंने अकतुंबर से इन मॉडल्स को खड़ा करने का दृढ़ संकल्प लिया है। उन सभी किसानों को इन मॉडल्स खड़ा करने में आई समस्याओं पर और उनके ठोस समाधान पर विस्तार से चर्चा हुई, जिन मॉडल किसानों के पास देशी गाय नही है, उन्हे उन देशी गोमाता की कमलनयन बजाज फाउंडेशन के द्वारा निशुल्क उपलब्धि और देशी बीज उपलब्ध करने ...