स्वदेशी बनाम विदेशी और भारतीय आर्थिक एवं कृषि आत्मनिर्भरता
पद्मश्री डॉ सुभाष पालेकर व्हाट्स एप 9850352745 ता 13 जुलाई 2025 रविवार हर रविवार को चलने वाली श्रृंखला बद्ध लेख मालिका विषय... स्वदेशी बनाम विदेशी और भारतीय आर्थिक एवं कृषि आत्मनिर्भरता लेख क्रमांक 2. . मेरे प्यारे किसान भाईयों और शहरी उपभोक्ता साथियों और बहनों, स्वदेशी और विदेशी में होने वाले मूलभूत भेद अगर हमे मालूम नहीं है, तब हम स्वदेशी को सही न्याय नहीं दे पाएंगे । स्वदेशी में भी भेद है ...एक है स्थानिक वस्तु या जीवन शैली देशी है और स्वदेश के किसी अन्य राज्य की वस्तु या जीवन शैली स्वदेशी है। विदेश की वस्तु या जीवन शैली विदेशी है। इसे एक उदाहरण देकर विश्लेषित करके समझाता हूं। पंजाब राज्य की देशी गाय की स्थानिक नस्ल साहीवाल वहां की स्थानिक देशी नस्ल है, लेकिन स्वदेशी नहीं। लेकिन उसी पंजाब में सौराष्ट्र की स्थानिक देशी नस्ल गिर को पंजाब में पाली जाती है तो पंजाब के लिए वह देशी नस्ल नहीं है, स्वदेशी है। क्योंकि सौराष्ट्र हमारे भारत देश का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। लेकिन उसी पंजाब में अगर कोई विदेशी जर्सी हॉलस्टीन नस्ल को पालता है तब वह विदेशी है। पंजाब ...