दूसरों की गलतियों का चिंतन करता है, आत्मा को कमजोर - बीके शिवानी
दूसरों की गलतियों का चिंतन करता है, आत्मा को कमजोर - बीके शिवानी - न्यायविदों के तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का समापन - ओम शांति रिट्रीट सेंटर में आयोजित कार्यक्रम में काफी संख्या में न्यायविद सम्मिलित हुए 23 दिसम्बर 2024, गुरुग्राम शरीर की स्वच्छता के साथ-साथ मन की स्वच्छता का ध्यान रखना जरूरी है। उक्त विचार सुप्रसिद्ध प्रेरक वक्ता बीके शिवानी ने व्यक्त किए। ये बात उन्होंने ब्रह्माकुमारीज़ के गुरुग्राम स्थित ओम शांति रिट्रीट सेंटर में न्यायविदों के लिए तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में कही। सम्मेलन के अंतिम सत्र में बीके शिवानी ने कहा कि हमारे कर्म ऐसे हों, जो आत्मा की शक्ति बढ़े। दूसरों की गलतियों का चिंतन आत्मा की शक्ति को घटाता है। हमारा हर कर्म सेवाभाव से होना चाहिए। बाहर के प्रदूषण से भी अधिक नुकसान मानसिक प्रदूषण से होता है। संकल्प से सृष्टि बनती है। संकल्प बीज है। बाहरी प्रदूषण का मूल कारण भी हमारी गलत जीवन पद्धति है। वर्तमान समय परिस्थितियां ज्यादा विकट नहीं हैं। बल्कि हमारी आंतरिक शक्ति कम हो गई है। मन की शक्तिशाली स्थिति परिस्थितियों का बेहतर ढंग से सामना कर सकती है। जो कुछ ...