विश्व का नव निर्माण विज्ञान बल से नहीं बल्कि योगबल से संभव - राजयोगिनी आशा दीदी
भारत एक मात्र ऐसा देश, जहाँ गृहस्थ जीवन त्याग, तपस्या और सेवा का प्रतीक - स्वामी प्रबोधानंद पवित्रता ही जीवन की सुंदरता - राजयोगिनी सुदेश दीदी विश्व का नव निर्माण विज्ञान बल से नहीं बल्कि योगबल से संभव - राजयोगिनी आशा दीदी - अखिल भारतीय साधु-संत महासम्मेलन का समापन - ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान ने साधु-संतों को किया सम्मानित - रजत रश्मियां अभियान के अंतर्गत हुआ सम्मेलन का आयोजन - कार्यक्रम में पवित्र युगल मूर्त जोड़ों को भी किया सम्मानित गुरुग्राम, 27 अप्रैल 2026 ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान के ओम शांति रिट्रीट सेंटर में तीन दिवसीय अखिल भारतीय साधु-संत महासम्मेलन का समापन हुआ। समापन सत्र में बोलते हुए हरिद्वार से वरिष्ठ महामंडलेश्वर स्वामी प्रबोधानंद जी ने कहा कि भारत एक मात्र देश है, जिसमें गृहस्थ जीवन त्याग, तपस्या और सेवा का प्रतीक है। जीवन में नित्य नवीनता के लिए तपस्या जरूरी है। विश्व में जहाँ एक और भोग के लिए युद्ध हो रहे हैं। लेकिन ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान ने भोग को छोड़कर तपस्या का जीवन अपनाया। जोधपुर से महामंडलेश्वर स्वामी शिव स्वरूपानंद ने कहा कि गृहस्थ आश्रम सबसे महत्वपूर्ण है। पवित्र...