जिन्हें भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपना गुरु मानते हैं

 

यह बात शायद बहुत कम लोगों को हीं पत्ता होगी कि मौजूदा समय में दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेता बन चुके नरेंद्र दामोदर दास मोदी आरएसएस से जुड़ने के बाद एक वकील साहब जिनका नाम लक्ष्मण राव इनामदार था, उनके कपड़े भी स्वयं धोते थे। जिन्हें नरेंद्र मोदी अपना गुरु मानते हैं। लक्ष्मण राव इनामदार को आरएसएस का प्रचारक होने के साथ साथ गुजरात आरएसएस का फाउंडिंग फादर भी कहा जाता है। लक्ष्मण राव इनामदार की नरेंद्र दामोदर दास मोदी से मुलाकात सबसे पहले 1967 में हुई थी। 1974 में जब गुजरात में नवनिर्माण आंदोलन शुरू हुआ तो नरेंद्र मोदी लक्ष्मण राव इनामदार के साथ आ गए और अहमदाबाद के आरएसएस कार्यालय हेडगेवार भवन में रहने लगे। जहां उनकी दिनचर्या लोगों के चाय नास्ते बनाने से शुरु होती थी और वे उस जगह की साफ-सफाई करने के साथ अपना और अपने उस गुरु के कपड़े भी स्वयं धोया करते थे। इस बात का जिक्र वरिष्ठ पत्रकार एम.वी. कामथ और कालिंदी रंदेरी द्वारा लिखित पीएम मोदी की ऑटोबायोग्राफी नरेंद्र मोदी द आर्किटेक्ट ऑफ अ मॉडर्न स्टेट में की गई है। जबकि इसी बात का जिक्र इससे पहले गुजराती भाषा में राजा भाई नेने और पीएम मोदी द्वारा लिखित सेतुबंध नाम से आई एक किताब में भी की गई थी। जिसका अनावरण 18 अगस्त 2001 को सात आरसीआर में किया गया था। जो उस वक्त के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का प्रधानमंत्री आवास था। यह किताब पीएम मोदी के गुरू लक्ष्मण राव इनामदार के जीवन पर आधारित थी। इस किताब में आरएसएस प्रचारक और पीएम मोदी के गुरु लक्ष्मण राव इनामदार की तुलना रामसेतु से की गई। इसके कुछ ही दिन बाद 7 अक्टूबर 2001 को नरेंद्र दामोदर दास मोदी तत्कालिन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के पसंद से गुजरात के मुख्यमंत्री भी बनाए गए। इसके बाद साल 2008 में नरेंद्र दामोदर दास मोदी ने एक और किताब ज्योतिपुंज भी लिखी। यह किताब आरएसएस के उन 16 चुनिंदा स्वयंसेवकों पर आधारित थी जिन्होंने स्वयं गुमनाम रहकर आरएसएस के विचारों और कार्यों को प्रचारित करने के साथ संघ के कार्यों को आगे बढ़ाए। उस किताब का भी एक अध्याय लक्ष्मण राव इनामदार को हीं समर्पित था। जिसमें वकील साहब के नाम से चर्चित लक्ष्मण राव इनामदार के बारे में बताते हुए नरेंद्र दामोदर दास मोदी लिखते हैं कि वे कैसे एक आरएसएस कार्यकर्ता को कार्य करने के लिए मना लेते थे। आरएसएस प्रचारक इनामदार कहते थे कि अगर आप इसे बजा सकें तो यह बांसुरी है और अगर नहीं तो महज एक लकड़ी का टूकड़ा। यह जानकारी कैसी लगी कमेंट कर जरूर बताएं और अगर अच्छी लगी तो लाइक और शेयर भी जरूर कर दें।

 



 

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