कर्ज़ माफी नही, शाश्वत कर्ज मुक्ति आत्मनिर्भर कृषि आत्मनिर्भर भारत

 कर्ज़ माफी नही, शाश्वत कर्ज मुक्ति आत्मनिर्भर कृषि आत्मनिर्भर भारत पद्मश्री डॉ सुभाष पालेकर जी का ता 22, 23, 24, 25 मार्च 2026 को सुभाष पालेकर कृषि इस विषय पर चार दिवसीय निवासी शिबीर सुनने चलो सिसौली,चलो सिसौली... तहसील बुढ़ाना (सिसौली से बुढ़ाना 10 किमी ) जिला मुजफ्फरनगर

( मुजफ्फरनगर से सिसौली 35 किमी) उत्तर प्रदेश में .....  ...  सिसौली गांव शामली से 35 किमी,मेरठ से 70 किमी, गाजियाबाद से 100 किमी, दिल्ली से 125 किमी दूरी पर है।


 श्री राकेश टिकैत जी का किसान संगठन भारतीय किसान यूनियन के द्वारा आयोजित पद्मश्री डॉ सुभाष पालेकर गुरुजी का चार दिवसीय निवासी शिबीर......

प्रवेश फीस ... प्रति व्यक्ति चार दिन की ...1000 रुपए, जिसमें चार दिन का चाय नाश्ता मध्यान्ह भोजन, रात्रिकालीन भोजन, निवास, प्रशिक्षण, पैड,पेन, बैच, आदि सुविधा प्रदान कर दी जाएगी।

प्रवेश फीस नीचे दिए बैंक खाते पर ऑनलाइन भरना है।......


Punjab National Bank 

Ac.No.6848000100079012

Name..Charan Singh Chaudhary 

IFSC code..PUNB0684800

Branch..vikas bhavan, 

Mujaffarnagar UP


बैंक में ऑनलाइन पैसे भरने के बाद बैंक डिटेल्स का स्क्रीन शॉट, आधार कार्ड नंबर, नाम, पत्ता व्हाट्स एप मेसेज में लिखकर नीचे दिए व्हाट्स एप मोबाइल नंबर पर मैसेज भेज दीजिएगा ..... चरण सिंग़ बालियान मोबाइल नंबर 9258116961


विषय

 इस चार दिवसीय निवासी शिबीर में आप पद्मश्री डॉ सुभाष पालेकर गुरुजी के वाणी से.... हिन्दी भाषा में ....सुनेंगे ....... 

1) संपूर्ण शतप्रतिशत स्वदेशी होनेवाली सुभाष पालेकर कृषि के माध्यम से एक देशी गोमाता के गोबर गोमूत्र से दस से पंद्रह एकड़ खेती बगैर कोई खाद डाले, बिना जहरीली दवा का छिड़काव , सिर्फ दस प्रतिशत सिंचाई के पानी से,देशी बीजों से और देशी गोमाता से कैसे खेती करना है?

2)  देशी गोमाता से ग्रामीण अर्थ व्यवस्था को संपूर्ण स्वदेशी आत्मनिर्भर सुभाष पालेकर कृषि से कैसे साकार करना है ? 

3).उससे एक एकड़ भूमि में पालेकर फूड फॉरेस्ट पंच स्तरीय बागवानी मॉडल से परिवार की आर्थिक आत्मनिर्भरता एवं भोजन आत्मनिर्भरता कैसी प्राप्त कर सकते है और रोग मुक्त, कृषि कर्ज मुक्त, शोषण मुक्त मानवी जीवन किसान कैसे प्राप्त कर सकता है ?

4)  गांव छोड़कर शहर भाग रहे बेरोजगार युवाओं को गांव में पालेकर फूड फॉरेस्ट पंच स्तरीय बागवानी मॉडल के द्वारा स्थानिक रोजगार कैसे उपलब्ध करना है ? ,

5). सुभाष पालेकर कृषि कैसे प्राकृतिक कृषि नहीं हैं ?. वह विदेशी प्रचलित गो आधारित परंपरागत कृषि से, विदेशी जैविक खेती से, विदेशी रासायनिक खेती से, वैदिक कृषि से, यौगिक कृषि से और अन्य कृषि तकनीकों से कैसे पूरी तरह अलग हैं ?

6). सुभाष पालेकर कृषि क्या हैं, कैसी करनी है ? सुभाष पालेकर कृषि में धान, गेहूं, सभी  मिलेट, सरसों, गन्ना, सब्जियां, कपास, मूंगफली, मूंग, उड़द, अरहर, सोयाबीन,और अन्य फसलों को  कैसे  ले?.

7) सुभाष पालेकर कृषि को छोड़ कर अन्य शेष सभी कृषि पद्धतियां जैसे प्रचलित विदेशी पाश्चात्य रासायनिक खेती, विदेशी जैविक खेती, विदेशी गो आधारित खेती, विदेशी वैदिक कृषि, और अन्य कृषि तकनीक वास्तव में जीव जमीन पानी पर्यावरण जैव विविधता इन प्राकृतिक संसाधनों का विनाश कैसे कर रही हैं,?

8)  ये तमाम कृषि पद्धतियां कैसे वैश्विक तापमान वृद्धि एवं जल वायु परिवर्तन को बढ़ावा दे रही हैं, भूमि की उर्वरा शक्ति और उत्पादन क्षमता का कैसे विनाश कर रही हैं ?

9), अदृश्य वैश्विक शोषणकारी साहूकारी लुटेरी अर्थ व्यवस्था किसानों को कैसे कर्ज के और आत्महत्या के चक्र व्यूह में जबरन फंसा रही है ?

10). सुभाष पालेकर कृषि में कैसे कोई भी मानव निर्मित खाद डालने की बिलकुल आवश्यकता नहीं हैं, सिर्फ दस प्रतिशत पानी से खेती होती हैं, लागत मूल्य न्यूनतम और जहर मुक्त उपज होने से दाम डेढ़ गुने, किसानों की आय दुगुनी,उपज में घट नही , वैश्विक मांग, वैश्विक बाजार मुट्ठी में लेने की संभावना, यह कैसे ? 

11).गांव का पैसा और सम्पत्ति गांव में रहेगी, गांव का पैसा सम्पत्ति शहर और विदेश नहीं जाएगी, बल्कि शहर का और विदेश का पैसा सम्पत्ति गांव आयेगी, कैसे ?

12) आत्मनिर्भर कृषि पर आधारित आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थ व्यवस्था के माध्यम से भारत को आत्मनिर्भर कैसे बनाना है ? ... 

...इन विषयो पर वैज्ञानिक कसौटियों पर विश्लेषण एवं समीक्षा और शाश्वत समाधान सुनने हेतु....चार दिवसीय निवासी शिबीर हिन्दी भाषा में सुनने का सुवर्ण अवसर ....प्रदान किया जा रहा है।


शिबीर स्थल ... किसान भवन, ग्राम डाक सिसौली ,तहसील बुढ़ाना,जी मुजफ्फरनगर उत्तर प्रदेश।

 सिसौला आने के लिए मुजफ्फरनगर से,  श्यामली से, मेरठ से, गाजियाबाद से, पर्याप्त बस निरंतर लगातार उपलब्ध है। 

     सिसौली आने के लिए नजदीकी रेलवे स्टेशन मुजफ्फरनगर ,मेरठ, गाजियाबाद और नई दिल्ली है। Air port नई दिल्ली है।


ता 22 रविवार, 23 सोम, 24 मंगल  , 25 बुधवार मार्च 2026 , शिबीर हर रोज सुबह 8.30 से शाम 8.30 बजे तक लगातार चलेगा, सिर्फ जलपान के पंद्रह मिनिट के दो अवकाश और मध्यान्ह भोजन का एक घंटे का एक अवकाश दिया जाएगा। 

     आपको ता 21 मार्च 2026 को श्याम तक किसी भी हालत में शिबीर स्थल पहुंचना है। आखरी दिन ता 25 मार्च 2026 को दोपहर दो बजे मध्यान्ह भोजन के पहले शिबीर समाप्त होगा। आप आपके घर वापसी का रेलवे आरक्षण ता 25 मार्च के देर श्याम मुजफ्फरनगर से , या श्यामली से, या मेरठ से या गाजियाबाद से या नई दिल्ली से कर सकते है।


.आप पहले अपने आने जाने का ट्रेन रिज़र्वेशन तुरन्त कीजियेगा। दो महीने के पहले ट्रेन रिज़र्वेशन करने से कन्फर्म रिजर्वेशन मिल जाता हैं। 


सभी प्रशिक्षणार्थियों को पद्मश्री डॉ सुभाष पालेकर जी द्वारा लिखित नवीनतम अत्याधुनिक 400 रुपए मूल्य की हिंदी गाइड किताब खरीदना अनिवार्य नहीं हैं, लेकिन खरीदकर घर में संग्रह में रखना आवश्यक होगा। क्योंकि, चार दिन जो सुना उसे भूल जाने की संभावना को कोई नकार नहीं सकता। इससे अपूर्ण जानकारी से उस कृषि तकनीक का अमल करते समय बहुत सारी गलतियां हो जाती है, परिणाम गलत मिल सकते है। लेकिन, यह खरीदी गाइड किताब हर दिन बार बार घर बैठे पढ़ सकते है, जिससे गलती नहीं होती, परिणाम सौ प्रतिशत मिलते है। इस गाइड किताब को घर के लोग, गांव के युवा किसान पढ़ सकते है, जिससे उनके कृषि में भी बदलाव लाना संभव हो सकता हैं और अज्ञानवश घर में होने वाला एवं गांव में अज्ञान से होनेवाला विरोध समाप्त हो सकता हैं। पद्मश्री डॉ सुभाष पालेकर गुरुजी जी द्वारा लिखित अन्य हिंदी किताबों को शिबीर में खरीदने के लिए स्टाल पर उपलब्ध कराया जाएगा।


अधिक जानकारी हेतू संपर्क कीजियेगा ...

श्री अर्जुन बालियान मोबाइल नंबर 

     9258116961

श्री अमोल पालेकर 9881646930

श्री गौरव कुमार टिकैत मो न 

      9219571111

श्री गौरव कुमार बालियान मो न 

      9997962258

श्री चरण सिंह राकेश टिकैत मो न 

      9219045555

श्री अमित पालेकर मो न 

       9673162240


विषय ... संपूर्ण भारत में किसानों के हित में व्यवस्था के विरोध में भव्य जन आन्दोलन खड़े करने वाले तीन महत्वपूर्ण महान किसान नेता हो गए हैं .....

उत्तर भारत में भारतीय किसान यूनियन संघटन के निर्माता स्व महेंद्र सिंह टिकैत जी,

दक्षिणी भारत में कर्नाटक राज्य रैयत संघ के निर्माता स्व प्रोफेसर नंदजूनडस्वामी जी, और महाराष्ट्र में शेतकरी संघटना के निर्माता स्व शरद जोशी जी। विगत पचास वर्षों से ये किसान आंदोलन निरंतर जारी है, किसान संगठन जी जान से पूरी शक्ति से लड़ रहे है , कुछ तत्कालीन समस्याओं का तात्कालिक समाधान किसानों को मिल पाया है। लेकिन किसानों की गहन  समस्याओं का शाश्वत समाधान अभितक किसानों को नहीं मिल पाया है। इसका कारण है, शोषण और भ्रष्टाचार आधारित पाश्चात्य शोषणकारी अवैज्ञानिक विनाशकारी अर्थ व्यवस्था, किसानों की और ग्रामीण अर्थ व्यवस्था की भयावह लूट करने वाली विदेशी अफ्रीकन परंपरागत खेती, विदेशी यूरोपियन जैविक खेती, विदेशी अमेरिकी रासायनिक खेती, लुटेरी बाजार नियंत्रण व्यवस्था, विश्व व्यापार संगठन की किसान विरोधी नीति, वैश्विक टैरिफ महायुद्ध, वैश्विक तापमान वृद्धि एवं जल वायु परिवर्तन से बढ़ती मात्रा में हो रहा कृषि फसलों का विनाश और प्राकृतिक स्त्रोतोंका विनाश, गांव से हो  रहा मजदूरों का और किसानों का पलायन, किसानों के कृषि उपज का दाम लागत मूल्य से आधा मिलना, और भ्रष्टाचार का तेजी से फैल रहा कैंसर, जो किसान और सरकार के बीच में खड़ा है, ये तमाम समस्याएं गरीब और अमीर के बीच के दरार को निरंतर बढ़ा रही हैं। इस शोषण का सबसे अधिक शिकार किसान बन गया है। किसानों का और ग्रामीण अर्थ व्यवस्था के उच्चतम शोषण से ही किसी भी देश के अर्थ व्यवस्था का वृद्धि दर growth rate of economy बढ़ता है। सुभाष पालेकर कृषि से इस समस्याओं का कैसे शाश्वत समाधान मिल सकता, इस पर शिबीर में चर्चा होगी।

      आज भारत की अर्थ व्यवस्था अमेरिका, चीन और जर्मनी के बाद दुनिया की चौथी सर्वोच्च अमीर अर्थ सम्राट अर्थ व्यवस्था है। माने हमारा देश दुनिया का चौथा सबसे अमीर देश Rich India बन गया है। दूसरी ओर आज भारत के 80 करोड़ लोगों को पूरे साल भर हर साल मुफ्त में अनाज दिया जा रहा है। माने ये 80 करोड़ गरीब लोग दरिद्रता रेखा below poverty line के नीचे जी रहे हैं। देश के 25 करोड़ छोटे किसान बैंक और साहूकारों के कर्ज के पहाड़ के नीचे दबकर आत्महत्या की ओर तेजी से प्रस्थान कर रहे हैं, बहुत घाटे में चल रहे हैं ,माने ये 25 करोड़ गरीब किसान भी दरिद्रता रेखा below poverty line के नीचे जी रहे हैं। माने देश के कुल जन संख्या का तीन चौथाई माने 105 करोड़ किसान दरिद्रता रेखा के नीचे जी रहे हैं, यह गरीब भारत है। भारत के लोगों की प्रति व्यक्ति सालाना आय दुनिया के 138 देशों के लोगों के प्रति व्यक्ति आय से कम है। 

     इसका अर्थ है कि हमारा देश दो हिस्सों में बंट गया है.. Rich India और गरीब भारत। इन दोनों के बीच में होनेवाली दरार विशाल है, प्रचलित पाश्चात्य अर्थ व्यवस्था से यह दरार दिनोदिन और बढ़ने वाली हैं। जब तक दुनिया में यह एडम स्मिथ की शोषणकारी अवैज्ञानिक अप्राकृतिक विदेशी पाश्चात्य अर्थ व्यवस्था जारी रहेगी, तबतक इस दरार को मिटाना सपने में भी संभव नहीं हैं । लेकिन, सुभाष पालेकर कृषि जन आन्दोलन से इस दरार को घटाने की कोशिश हम जी जान से कर रहे हैं। कैसे? इसकी भी चर्चा इस शिबीर में होगी।

 

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