धरती पर भगवान का रूप हैं डॉक्टर्स - चिराग पासवान

 धरती पर भगवान का रूप हैं डॉक्टर्स - चिराग पासवान

- शक्तिशाली ऊर्जा का स्रोत है शांत मन - बीके आशा दीदी

- 52 वें राष्ट्रीय माइंड बॉडी मेडिसिन सम्मेलन का हुआ शुभारम्भ

- भारत सरकार के केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान हुए उद्घाटन सत्र में शामिल

- ब्रह्माकुमारीज़ के ओम शांति रिट्रीट सेंटर में हुआ आयोजन


गुरुग्राम, 21 फरवरी 2026

डॉक्टर्स धरती पर भगवान का रूप हैं। डॉक्टर्स पर लोग आँख बंद करके विश्वास करते हैं। उक्त विचार भारत सरकार के केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान ने व्यक्त किए। ये बात उन्होंने ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान द्वारा 52 वें राष्ट्रीय माइंड बॉडी मेडिसिन सम्मेलन में कही। ओम शांति रिट्रीट सेंटर के दादी प्रकाशमणी सभागार में केयरिंग, कंपैशन एंड कम्युनिकेशन विषय पर उन्होंने कहा कि जब आत्मा का परमात्मा से संबंध स्थापित हो जाता है तो शब्दों का महत्व कम हो जाता है। परमात्मा एक ऐसा बिंदु है जिस तक पहुंचने का सभी प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यहाँ आने पर उन्हें जो अनुभव हुआ, शब्दों में बयाँ करना मुश्किल है।


माननीय मंत्री ने कहा कि भगवान ने डॉक्टर्स को विशेष शक्तियां दी हैं। कोविड के समय में डॉक्टर्स की भूमिका बहुत विशेष रही है। डॉक्टर्स ने स्वयं का ध्यान न रखकर भी दूसरों की सेवा में अपना सारा समय दिया। जिस भावना के साथ डॉक्टर्स कार्य करते हैं अगर उसका कुछ प्रतिशत समाज में आ जाए तो जीवन सरल हो जाए। जीवन का लक्ष्य किसी पद पर पहुंचना  नहीं बल्कि जीवन का असली लक्ष्य दूसरों के जीवन में खुशियाँ और सकारात्मकता लाना होना चाहिए।


माननीय मंत्री ने कहा कि समाज में महिलाओं का अहम योगदान है। नारी सृष्टि की जननी है। ये कहना बेमानी है कि महिलाओं को सशक्त करने की जरूरत है। क्योंकि महिलाओं को भगवान ने सशक्त करके भेजा है। जीवन में संयम जरूरी है। मनुष्य आशावादी दृष्टिकोण से ही आगे बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि उनके जीवन में भी बहुत सी परिस्थितियां आई। लेकिन हर समय उन्होंने संयम रखा। जीवन में बहुत से भटकाव आते हैं लेकिन सकारात्मक ऊर्जा व्यक्ति को सही मार्ग पर ले जाती है। जो व्यक्ति मन से शक्तिशाली है वो कई बीमारियों से मुक्त रहता है। सकारात्मक अभिव्यक्ति से हम बहुत कुछ कर सकते हैं।


डॉ. योगिता स्वरूप, वरिष्ठ आर्थिक सलाहकार सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने कहा कि स्वास्थ्य के लिए आध्यात्मिक रूप से सशक्त वातावरण जरूरी है। सबसे पहले मन को हील करने की जरूरत है। मन की हीलिंग ही शरीर को भी हील करती है। ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान में इस प्रकार का वातावरण मन को हील करता है।


ओआरसी की निदेशिका राजयोगिनी बीके आशा दीदी ने कहा कि सबसे पहले स्वयं की केयर जरूरी है। केयर सिर्फ शरीर की नहीं लेकिन सबसे जरूरी मन की है। मन को पॉजिटिव रखना ही मन की केयर है। जब हम स्वयं की केयर करेंगे तो हमारे आस पास के लोग भी स्वयं को सुरक्षित अनुभव करेंगे। पॉजिटिव और पॉवरफुल वातावरण से भी व्यक्ति ठीक हो जाता है। जीवन में दिल और दिमाग का संतुलन जरूरी है। स्वयं को समय देना जरूरी है। कुछ समय शांति में रहें। एक शांत मन ही शक्तिशाली ऊर्जा का स्रोत है। खुशी सबसे बड़ी खुराक है। खुशी का प्रभाव दवाई पर भी सहज रूप से पड़ता है।


ब्रह्माकुमारीज़ के अतिरिक्त महासचिव राजयोगी डॉ. प्रताप मिड्ढा ने कहा कि संस्थान विश्व में एकमात्र ऐसा संस्थान है, जिसका संचालन महिलाएं करती हैं। वर्तमान समय की चुनौतियां जिस प्रकार का तनाव पैदा कर रहीं हैं, उससे डॉक्टर्स भी अछूते नहीं हैं। सम्पूर्ण स्वास्थ्य के लिए योग का विशेष महत्व है। मेडिसिन के साथ मेडिटेशन जरूरी है। उन्होंने कहा कि संस्थान के द्वारा माउंट आबू में निर्मित ग्लोबल हॉस्पिटल इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। जहाँ आध्यात्मिकता और आधुनिकता का संतुलन है।


कार्यक्रम में संस्थान के मेडिकल विंग के सचिव राजयोगी डॉ. बनारसी ने स्वागत वक्तव्य दिया। उन्होंने कहा कि ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान द्वारा चलाए जा रहे नशा मुक्ति अभियान ने देशभर के साढ़े चार करोड़ से भी अधिक लोगों को जागृत किया गया।

 

कार्यक्रम में जीबी पंत हॉस्पिटल के हृदय रोग विभाग के प्रोफेसर डॉ. मोहित गुप्ता ने भी अपने विचार रखे। संस्थान के दिल्ली, लॉरेंस रोड सेवाकेंद्र प्रभारी राजयोगिनी लक्ष्मी ने राजयोग का गहन अनुभव कराया। मंच संचालन जीबी पंत हॉस्पिटल के पैथोलॉजी विभाग की प्रोफेसर डॉ. रीना तोमर ने किया। कार्यक्रम में 600 से भी अधिक चिकित्सकों एवं शिक्षाविदों ने शिरकत की।

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