हर रविवार को चलनेवाली श्रृंखला बद्ध लेख मालिका
पद्मश्री डॉ सुभाष पालेकर
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ता 19 अक्टूबर 2025 रविवार
हर रविवार को चलनेवाली श्रृंखला बद्ध लेख मालिका ....
लेख क्रमांक 16
विषय ... फसलों के जड़ों को सभी खाद्य तत्वों की उपलब्धता मानव के उपस्थिति के बिना होने वाली ईश्वर निर्मित स्वयं विकासी स्वयं पोशी आत्मनिर्भर व्यवस्था में देशी गोमाता एवं देशी गोवंश और देशी कैंचवो की क्या भूमिका है?.
साथियों और बहनों,
हम जो जीवन जी रहे हैं वह हमारा ईश्वर देय असली जीवन नही है, ईश्वर निर्मित आध्यात्मिक व्यवस्था के विरोध में हम मानव निर्मित बौद्धिक आतंक वाद ने हमपर थोपा हुआ नकली झूठा नास्तिक जीवन जी रहे हैं। हम इस बौद्धिक आतंक वाद के पूर्व नियोजित शिकार हैं। और आश्चर्य की बात यह है कि हम इस नकली मायावी नास्तिक जीवन को ही असली आध्यात्मिक जीवन मान रहे है। कैसे? यह हम विगत तीन लेखों से समझ रहे हैं। आज का चौथा, कुल मिलाकर 16 वा लेख उसी विषय को आगे ले जा रहा है। पिछले लेख क्रमांक 15 में आप ने मेरा सिद्धांत, जो मैने दुनिया के तमाम दार्शनिकों के दर्शन के ठीक विरोध में वैज्ञानिक कसौटियों सिद्ध किया है, .....कोई भी खाद किसी भी पेड़ पौधे का भोजन नहीं है, इसलिए उसे भूमि में डालने की बिल्कुल आवश्यकता नहीं है , आपने समझा है । खाद एक भ्रम है, छलावा है, प्राकृतिक संसाधनों के विनाश के लिए जिम्मेदार हैं।
हमने यह भी देखा कि फसलों के शरीर का 95.0 से 98.5 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ हवा पानी और सौर ऊर्जा से बनता है, जिसमें मानव की कोई भी भूमिका नहीं है। वह ईश्वर निर्मित व्यवस्था है। आज हम देखेंगे कि ईश्वर मानव के उपस्थिति के बिना और किसी भी मानव निर्मित खाद के बिना फसलों के जड़ों को नाइट्रोजन फॉस्फेट पोटाश कैल्सियम मैग्नेशियम गंधक और बाकी सारे सूक्ष्म खाद्य तत्व मानव अस्तित्व के बिना कैसे उपलब्ध करता हैं ? इस ईश्वरीय अद्भुत व्यवस्था में देशी गोमाता एवं देशी गोवंश की क्या भूमिका है?.
भारतीय दर्शन शास्त्र में ईश्वर ने हमारे लिए एक महत्वपूर्ण संदेश भेजा है कि किसी भी पेड़ पौधे के या सजीव के या मानव के शरीर का गठन पंच महाभूतों से होता हैं ... पृथ्वी आप तेज वायु और आकाश।
हमने यह भी देखा है कि पेड़ पौधे के शरीर का 95.0 से 98.5 प्रतिशत हिस्सा आखिरी चार महाभूत आप माने पानी, तेज माने सौर ऊर्जा, वायु माने हवा में से लिया कर्ब द्वि प्रानीद वायु carbon di oxide और आकाश से गठित होता हैं और उस में मानव की और किसी भी खाद की कोई भी उपस्थिति नहीं है। आज हम देखेंगे कि ईश्वर मानव के उपस्थिति के बिना देशी गोमाता और देसी कैंचवो की मदद लेकर पहला महाभूत पृथ्वी माने नाइट्रोजन फॉस्फेट पोटाश कैल्सियम मैग्नेशियम गंधक और बाकी सारे सूक्ष्म खाद्य तत्वों की माने खनिज तत्वों की आपूर्ति कैसे करता हैं ?
मैं आपको यह बताना चाहता हूं कि ये पांच महाभूत है, जो कुल मिलाकर 108 भूतों से गठित होते है। भूत माने तत्व। हमारे देश के वैष्णव पंथी मित्र अपने गले में तुलसी की माला पहनते है। उसमें 108 छोटे छोटे गोल मनी होते है। क्यों? क्योंकि हमारा मानवी देह भी 108 तत्वों से गठित होता हैं। मूलभूत विज्ञान ने इन 108 तत्वों का वर्गीकरण उनके मात्रा के अनुसार चार वर्गों में किया है।
वर्ग न 1... कार्बन, उदजन माने हाइड्रोजन और प्राणवायु ये तीन तत्व होते है , जो पेड़ पौधों के शरीर का 95.09 से 98.5 हिस्सा प्रकाश संश्लेषण क्रिया से व्याप्त करते है। इन्हें ईश्वर उसके सुनियोजित व्यवस्था के माध्यम से पेड़ पौधों को मानव के बिना उपलब्ध करता है। कैसे ? यह हमने पिछले लेख में आप को बताया है।
वर्ग न 2... नाइट्रोजन फॉस्फेट पोटाश ये तीन अत्यंत महत्वपूर्ण तत्व होते है।
वर्ग न 3 .. कैल्शियम, मैग्नेशियम और गंधक ये तीन माध्यम महत्व के तीन तत्व होते है।
वर्ग न 4 ...बाकी सारे निन्यानबे 99 सूक्ष्म खाद्य तत्व
अब हम देखेंगे कि ईश्वर पेड़ पौधों के जड़ों को नाइट्रोजन फॉस्फेट पोटाश बिना मानव उपस्थिति कैसे उपलब्ध करता हैं।
हवा में कुल 78.5 प्रतिशत नाईट्रोजन माने नत्र वायु होता हैं। माने हवा नाइट्रोजन का महासागर है। फिर यह यूरिया को किसानों पर क्यों थोपा गया?
करोड़ों साल पहले ईश्वर ने प्रकृति को पृथ्वी पर भेजा , बाद में आज से तीन लाख साल पहले मानव को पृथ्वी पर विकसित किया। माने प्रकृति का निर्माण ईश्वर ने किया, मानव ने नहीं किया। माने प्रकृति ईश्वर का संविधान है। प्रकृति ही ईश्वर है। अगर हमे ईश्वर को जानना है तब पहले उसका संविधान प्रकृति को जानना है। घने जंगल उसके तमाम सजीवता के जैव विविधता के साथ के प्रकृति के रूप में खड़े है।
जंगल के किसी भी पेड़ पौधे का कोई भी हरा पत्ता तोड़िए और उसका दुनिया के किसी भी आधुनिकतम प्रयोग शाला में वैज्ञानिक कसौटियों पर परीक्षण कीजिए, वह परीक्षण प्रतिवेदन माने रिपोर्ट आपको बताती हैं कि उन घने जंगलों के पेड़ पौधों के पत्तों में किसी भी खाद्य तत्वों की कमी deficiency नही है। सभी खाद्य तत्व मिल गए है। नाइट्रोजन फॉस्फेट पोटाश मिल गए, कैल्शियम मैग्नेशियम गंधक मिल गए, बाकी सारे सूक्ष्म खाद्य तत्व मिल गए है। किसने दिए ? वहां आरक्षित घने जंगलों में मानव कही भी उपस्थित नहीं हैं। माने उन जंगल के पेड़ पौधों को खाद्य तत्व मानव ने नहीं दिए, लेकिन मिल गए। इसका अर्थ यह है कि ईश्वर निर्मित स्वयं विकासी स्वयं पोशी आत्मनिर्भर व्यवस्था ने उपलब्ध किए है। क्या है यह व्यवस्था? कैसी है यह व्यवस्था?
ईश्वर पेड़ पौधों को नाइट्रोजन मानव के उपस्थिति के बिना कैसे उपलब्ध करता हैं?
आपने प्रयोग शाला के रिपोर्ट में देखा कि घने जंगलों के पेड़ पौधों में नाइट्रोजन की कमी नहीं है । माने उन्हें नाइट्रोजन मिल गया, मानव ने नहीं दिया, पत्तों ने हवा में से नाइट्रोजन नहीं लिया, क्योंकि ईश्वर ने किसी भी पेड़ पौधे के हरे पत्तो को हवा में से सीधा नाइट्रोजन लेने की क्षमता और अनुमति नहीं दी है। पत्तों के इर्दगिर्द हवा में 78.5 प्रतिशत नाइट्रोजन का महासागर फैला हुआ है, पत्ते चाहे तो हवा में से कितना भी नाइट्रोजन ले सकते हैं, लेकिन, ईश्वर की अनुमति नहीं है, ईश्वर के आदेश का शतप्रतिशत पालन करते है। माने मानव ने नाइट्रोजन नहीं दिया, पत्तों ने हवा में से नहीं लिया, लेकिन मिल गया। इसका अर्थ है कि पेड़ पौधों के जड़ों के पास कोई तो और मध्यस्त तीसरा जीव खड़ा है, जिसने हवा में से सीधा नाइट्रोजन लिया और पेड़ पौधों के जड़ों को उपलब्ध किया। कौन है? वह एक सूक्ष्म जीवाणु है, जिसको ईश्वर ने हवा में से नाइट्रोजन लेकर जड़ों को बिना मानवीय सहायता एवं उपस्थिति उपलब्ध करने का ठेका contract दिया है। उस सूक्ष्म जीवाणु का नाम है, नत्र स्थिरक सूक्ष्म जीवाणु nitrogen fixing bacteria।
ये नत्र स्थिरक सूक्ष्म जीवाणु दो प्रकार के होते है... सहजीवी नत्र स्थिरक सूक्ष्म जीवाणु symbiotic nitrogen fixing bacteria और असहजीवी नत्र स्थिरक सूक्ष्म जीवाणु nonsymbiotic nitrogen fixing bacteria। ये नत्र स्थिरक सूक्ष्म जीवाणु भूमि के सतह के पेड़ पौधों के जड़ों के सान्निध्य में होने वाले मिट्टी में रहकर प्रति वर्ग मीटर भू सतह पर एक साल में हवा में से 140 से 170 मिली ग्राम नाइट्रोजन को सोख लेते है, और जड़ों को उपलब्ध करते है और बचा हुए नाइट्रोजन को जड़ों के पास मिट्टी में संग्रहित करते है। नत्र स्थिरक सूक्ष्म जीवाणु के माध्यम से हवा में से नत्र वायु नाइट्रोजन लेकर अपने जड़ों को उपलब्ध करने वाले लगभग 650 वनस्पति प्रकार है, जो नौ परिवारों से सम्बन्धित हैं, जिन में से 519 वनस्पति प्रकार लेग्यूमिनोसी leguminosae family परिवार से संबंधित हैं। इस लेग्यूमिनोसी परिवार के तीन उप परिवार subfamilies है.. Mimosoide 321 नत्र स्थिरक वनस्पति प्रजातियां, Papilionoidae 172 नत्र स्थिरक वनस्पति प्रजातियां, और Caesalpinoidae 26 नत्र स्थिरक वनस्पति प्रजातियां। इस लेग्यूमिनोसी परिवार की सभी प्रजातियां नत्र स्थिर करने वाली नहीं है, कुछ प्रजातियों में वह क्षमता होती हैं, जिनमें हमारे द्विदल फली वर्गीय दलहन की सभी फसले समाविष्ट है।
जैसे मैने कहा कि ये नत्र वायु स्थिरक सूक्ष्म जीवाणु दो प्रकार के होते हैं ... सहजीवी नत्र स्थिरक सूक्ष्म जीवाणु और असहजीवी नत्र स्थिरक सूक्ष्म जीवाणु।
सहजीवी symbiotic नत्र स्थिरक सूक्ष्म जीवाणु चार प्रकार के होते है। 1) राइजोबियम Rhizobium जीवाणु bacteria
2) मायकोरायझा फफूंद Mycorrhiza fungus, इसके दो उप प्रकार है Ectomycorriza और Endo Mycorrhiza
3) नील हरित शैवाल Blue green algae
4 ) ग्लोमस फफूंद Glomus fungus
ये सहजीवी symbiotic नत्र स्थिरक सूक्ष्म जीवाणु जैसे ही जड़ों का उन्हें नाइट्रोजन भेजने का संदेश आता है, वैसे ही वे हवा में से सीधा नाइट्रोजन सोखते है और जड़ों के हाथ में रखते है, जड़े उन्हें हरे पत्तो के तरफ भेज देती हैं। उसके बदले में जड़े इन नत्र स्थिरक सूक्ष्म जीवाणु को उनका भोजन मिट्टी में स्त्रवित करके उपलब्ध करती हैं। माने दोनों में बहुत ही सुन्दर सहजीवन होता है। अब मुझे बताइए इस सारी ईश्वर निर्मित व्यवस्था में मानव कहा है? मानव कही भी उपस्थित नहीं हैं। खाद कहा है? खाद कही भी उपस्थित नहीं हैं। जड़े नत्र स्थिरक सूक्ष्म जीवाणु को जो भोजन खिलाती है, उसमें अधिकतम अमीनो अम्ल amino acids, कार्बोदक carbohydrates, जीवनसत्त्वे vitamins, nucleotides, Glucose, Fructose, Leucine, valine, a amino butyric acid, Glutamine, a Alanine, Asoargine, Serine, Climatic acid, Aspartic acid, और अन्य अमीनो अम्ल और जैविक अम्ल,और अन्य विविध जैविक संयुग होते है। उस भोजन में रोग प्रतिरोधक संयुग भी होते है, जो अच्छे जीवाणु good bacteria को रोग निर्माण करने वाले दुश्मन रोगाणु सूक्ष्म जीवाणु का नाश करते है और नत्र स्थिरक सूक्ष्म जीवाणु की पूरी सुरक्षा करते हैं।
यह सहजीवी नत्र स्थिरक सूक्ष्म जीवाणु रायझोबीएम हम जो दाल खाते है उन सभी द्विदल फली वर्गीय दलहन फसलों के जड़ों पर गांठें nodules बनाते है, उनमें निवास करते है और नाइट्रोजेनस किण्वक nitrogenase enzyme और लेग़ हीमोग्लोबिन leghemoglobin के सहायता से हवा में से नाइट्रोजन लेते है और जड़ों के हाथ में देते है। अब मुझे बताइए इस नत्र स्थिरीकरण प्रक्रिया में मानव कहा है? खाद कहा है? दोनों की उपस्थिति कही भी नहीं हैं।
इन रायज़ोबियम की अलग अलग प्रजातियां अलग अलग दलहन फसलों के जड़ों को सहजीवन देती है। जैसे Rhizobium leguminosarum मटर प्रकार की फसले, Rhizobium phaseoli बींस राजमा प्रकार की फसले, Rhizobium trifolii क्लोवर clover प्रकार की फसले, Rhizobium meliloti अल्फा अल्फा प्रकार की फसले, Rhizobium lupini लूपिनी प्रकार की फसले, Rhizobium japonicum सोयाबीन प्रकार की फसले, Rhizobium spacies लोबिया प्रकार की फसले। अगर किसी कारणवश हरे पत्तो को भूमि में से नाईट्रोजन नहीं मिला तब इस आपातकाल में ईश्वर ने पत्तों के सतह पर बैठकर हवा में से सीधा नाइट्रोजन सोखने का और पत्तों को उपलब्ध करने का ठेका contract कुछ विशिष्ट नत्र स्थिरक सूक्ष्म जीवाणु जैसे Acetobacter diazoptrophicus , Hesbaspirrilum sp को दिया है।
Mycorrhiza fungus जड़ों को अपने बाहों से पूरी तरह लपेट लेता है, अपने अनेक हाथ hyphae भूमि के अंदर सर्वत्र फैलाते है, और जहां नाइट्रोजन नाइट्रेट्स के रूप में सोख लेते है साथ में जो भी सभी प्रकार के खाद्य तत्व सभी खनिज तत्व भूमि में उपस्थित हैं उनका रूपांतरण जड़ों को उपलब्ध स्थिति में करके जड़ों को खिलाते है । साक्षात अन्नपुर्णा है। सहजीवी नील हरित शैवाल Blue Green Algae पानी में रहकर बहते पानी में होने वाले हवा के बुलबुलों में से नाइट्रोजन लेकर धान फसल के जड़ों को उपलब्ध करते है। सहजीवी ग्लोमस फफूंद Glomus fungus भी धान के जड़ों के पास पानी में रहकर पानी में होने वाले हवा के बुलबुलों में से नाइट्रोजन सोखकर धान फसल के जड़ों को उपलब्ध करते है। अब मुझे बताइए इस नत्र स्थिरीकरण प्रक्रिया में मानव कही भी उपस्थित नहीं है। यह ईश्वरीय अद्भुत व्यवस्था है।
असहजीवी nonsymbiotic नत्र स्थिरक सूक्ष्म जीवाणु इन प्रकार के होते है,जैसे Azotobacter, Azospirillium, Acetobacter, Frankia, Clostridium pasteurianum, Beijerinkia, Acromobacter, Aerobacter, Granulobacter, Radiobacter, Pseudomonas, Actonomycetes और अनेक प्रजातियां के असहजीवी नत्र स्थिरक सूक्ष्म जीवाणु जड़ों के पास मिट्टी में निवास करते हैं और हवा में से नाइट्रोजन लेकर जड़ों के सामने मिट्टी में रखते है, जड़े उसे मिट्टी में से उठाकर पत्तो के तरफ भेज देती हैं।
इस तरह ईश्वर ने हवा में से नाइट्रोजन लेकर हर पेड़ पौधे के जड़ों को उपलब्ध करने की जिम्मेदारी अलग अलग नत्र स्थिरक सूक्ष्म जीवाणु के अलग अलग प्रजातियों को सौंपी है, ईश्वर की उस स्वयं विकासी स्वयं पोशी आत्मनिर्भर व्यवस्था में मानव की और खाद की उपस्थिति कही भी नहीं है। लेकिन अब इस ईश्वर निर्मित व्यवस्था में देशी गोमाता और देशी कैंचवो की क्या भूमिका है यह आपको समझाना मेरा दायित्व बनता है।
इन सारे सहजीवी नत्र स्थिरक सूक्ष्म जीवाणु और असहजीवी नत्र स्थिरक सूक्ष्म जीवाणु, दोनों की निर्मिति मानव कारखाने में या प्रयोग शाला में नहीं कर सकता हैं। प्रयोग शाला में कोशिका विभाजन से एक कोशिका की दो कोशिकाएं होती है, निर्माण नहीं होती। क्योंकि ईश्वर ने मानव को निर्माण क्षमता creation power नहीं दी है। हम गेहूं के दाने या चावल के दाने कारखाने में पैदा किसी भी हालत में नहीं कर सकते है। यह ईश्वर का एकाधिकार है। इन दोनों सहजीवी नत्र स्थिरक सूक्ष्म जीवाणु और असहजीवी नत्र स्थिरक सूक्ष्म जीवाणु के निर्माण का ठेका ईश्वर ने देशी गोमाता को और देशी कैंचवो को दिया है। इन दोनों का निर्माण देशी गोमाता के आंत intestine में और देशी कैंचवो के आंत में होता हैं। देशी गोमाता के आंत में से जब गोबर बाहर निकल कर नीचे भूमि के सतह पर गिरता है,तब ये दोनों जीवाणु प्रकार भूमि में प्रवेश करते है और हवा में से नाइट्रोजन सोखकर सभी फसलों के जड़ों को उसकी आपूर्ति करते है। देशी कैंचवो की विष्ठा जब वे भूमि पर विसर्जित करते है तब उस विष्ठा excreta में से ये दोनों प्रकार के नत्र स्थिरक सूक्ष्म जीवाणु भूमि में प्रवेश करते है, भूमि में फैल जाते है और हवा में से नाइट्रोजन सोखकर पड़ोसी सहजीवी फसलों के जड़ों को उपलब्ध करते है।
सुभाष पालेकर कृषि में हम देशी गोमाता के ताजा गोबर से जीवामृत घन जीवामृत का निर्माण करते है, उसे भूमि पर डालते है या सिंचाई के पानी के साथ मिलाकर भूमि में छोड़ते है। जीवामृत घन जीवामृत कोई खाद नहीं है, वे अनंत करोड़ सूक्ष्म जीवाणुओ के असंख्य प्रजातियों का सर्वोत्तम जामन culture है। हमे खाद नहीं चाहिए, सिर्फ जामन चाहिए।
अब मुझे बताइए कि इस ईश्वर निर्मित नत्र स्थिरीकरण व्यवस्था में किसी भी मानव निर्मित खाद की उपस्थिति कही भी नहीं है, और मानव की उपस्थिति कही भी नहीं हैं, हरित क्रांति की उपस्थिति कही भी नहीं हैं। ईश्वर किसी भी खाद के कट्टर विरोध में हैं।
आपसे मेरा विनम्र अनुरोध हैं कि मेरे सिद्धांत को स्वीकार कीजियेगा कि कोई भी खाद किसी भी पेड़ पौधे का भोजन नहीं है, इसलिए उसे भूमि में डालने की बिल्कुल आवश्यकता नहीं हैं।
मेरे अगले लेख क्रमांक 17 में ता 26 अक्टुबर 2025 को आप देखेंगे कि ईश्वर पेड़ पौधों के जड़ों को फॉस्फेट पोटाश कैल्सियम मैग्नेशियम गंधक और बाकी सारे सूक्ष्म खाद्य तत्वों को मानव के उपस्थिति के बिना और किसी भी मानव निर्मित खाद के बिना कैसे उपलब्ध करता हैं?
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धन्यवाद। दीपावली की आप सब को हार्दिक बधाईयां, शुभ कामनाएं।
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