व्यापक चर्चा की आवश्यकता
संपूर्ण मानव विकास एवम् पर्यावरण संरक्षण के कई आयाम मुझे परिलक्षित होते हैं। जिन पर व्यापक चर्चा की आवश्यकता है।
1. मिट्टी , पानी, हवा, जंगल, पशु का विकास।
2. गैर रासायनिक कृषि, खेती के साथ-साथ सामाजिक उद्यम और पशुपालन।
3. विकास के लिए नई वैज्ञानिक और प्राकृतिक दृष्टि , परंपरा और ज्ञान विज्ञान का संगम ।
4. नागरिकों (जन) का स्वास्थ्य, बच्चों की शिक्षा, ग्राम गुरुकुल ,वोकेशनल ट्रेनिंग, सरकार और समाज का आपसी समन्वय , कर्मचारी संपर्क ,गांव और शहर के लोगों का एक दूसरे को समझना।
5. ईश्वर की बनाई हुई व्यव्स्था और प्रकृति को समझना । स्थानीय स्थिति अनुसार निराकरण और मॉडल का विकास।
6. भूमि कानून,सामुदायिक वनाधिकार एवं पेसा कानून का ज्ञान ।
इन सब के लिए सब से पहले इन आयामों पर कार्य करना जरूरी है
1.लालच और स्वार्थ की बजाय परमार्थ की भावना का विकास
2.स्थानीय लोगों की सहभागिता और सामाजिक चेतना.
कार्ययोजना
इसके लिए गांव गांव घूमना होगा, वही रुक कर चौपाल चर्चा कर विश्वास जगाना होगा।
ये कार्य सरकारी प्रशिक्षण कार्यक्रमों और शहर के होटलों, हाल में प्रशिक्षणों से नहीं होगा, बल्कि छोटे छोटे समूहों में बातचीत करने से ही संभव है।
अनिल कुमार अग्रवाल
भोपाल
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