जनता के और किसानो के हित की सरकार की योजनाएं

 पद्मश्री डॉ सुभाष पालेकर 

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ता 25 अक्टूबर 2024

जनता के और किसानो के हित की सरकार की योजनाएं सरकार बनाती है, उन योजनाओं का सम्पूर्ण लाभ लाभार्थियों को मिलने के लिए उन योजनाओं के कार्यान्वयन के लिए गैर सरकारी संगठनों की यां सामाजिक संस्थाओं की मदद ली जाती हैं, ताकि योजनाओं के कार्यान्वयन प्रक्रिया में कोई स्वार्थी दलाल या भ्रष्ट लोगों का प्रवेश न हो।

      भारत सरकार के द्वारा किसानों के हित के लिए देश के प्रधान मंत्री माननीय श्री नरेन्द्र भाई मोदी जी के इच्छा से सुभाष पालेकर कृषि को नीती बनाया, जिसे भारत सरकार प्राकृतिक खेती यह नाम से पुकारती है, साथ में अधिकतम उत्पादक किसान स्वयं सामूहिक स्तर पर उनके कृषि उपज पर व्यक्तिगत या सामूहिक प्रक्रिया करके अपने कृषि उपज की मूल्य वृध्दि value addition करके उसे सीधे शहरी उपभोक्ताओं को बेचने की व्यवस्था खड़ी करने के लिए भारत सरकार ने फार्मर्स प्रोड्यूसर कंपनिया खोलने का एक ऐतिहासिक निर्णय लिया, महिलाओं को सक्षम बनाने के लिए सखी मंडल के गठन का और उन्हें प्रशिक्षित करने का बहुत ही प्रभावशाली उपक्रमशीलता अभियान शुरू किया , इसके लिए सुभाष पालेकर कृषि जन आन्दोलन भारत सरकार का हार्दिक अभिनंदन करता है।

    हमारे सुभाष पालेकर कृषि जन आन्दोलन के किसान उस अभियान में सरकार को सक्रीय मदद भी कर रहे है,अपनी निशुल्क सेवा दे रहे हैं, जो कि हमारे सुभाष पालेकर कृषि जन आन्दोलन का सैद्धांतिक मूल्य है,ताकि  योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता रहे, और आगे भी हम सरकार को और समाज को हमारी निशुल्क सेवा देते रहेंगे।

       किसी भी सरकार ने जब भी मुझे शिबीर मांगे हैं, मैने मेरी निशुल्क सेवा उन्हें दी है, जिसके परिणाम स्वरुप, देश के इतिहास में पहली बार देश के प्रधान मंत्री माननीय श्री नरेन्द्र भाई मोदी जी ने मेरी सौ प्रतिशत स्वदेशी भारतीय सुभाष पालेकर कृषि के खोज को सम्मानित करने के लिए मुझ जैसे किसान को सन 2016  में पद्मश्री पुरस्कार प्रदान किया। इसके पहले किसान को देश के श्रेष्ठ पुरस्कार से सम्मानित नहीं किया गया। 

     लेकिन, मेरा मानना एवं आग्रह है कि सरकारी योजनाओं के कार्यान्वयन में सौ प्रतिशत पारदर्शिता और लाभार्थियों को सौ प्रतिशत लाभ मिलने के लिए, देश के ऐसे युवा शक्ति का अन्तर्भाव करना चाहिए, जो रचनात्मक सर्जन शील अहिंसक संवैधानिक अध्यात्मिक समाधान देने में ही अपनी श्रद्धा विश्वास निष्ठा रखते है और इस दिशा में सहयोग देने हेतू जन आन्दोलन के माध्यम से सरकार से जुड़ना चाहते है। इससे निराश लेकिन समर्पित युवा शक्ति को एक नव निर्माण का सुयोग्य समर्थ मंच मिल जाएगा, परिणाम स्वरुप, वह युवा शक्ति नशा हिंसा व्यभिचार आत्महत्या और तोड़फोड़ से दूर रहेंगी और देश को प्रधान मंत्री माननीय श्री नरेन्द्र भाई मोदी जी के आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने के रचनात्मक सर्जन शील अहिंसक संवैधानिक अभियान में जुट जाएगी। 

       युवा शक्ति के हाथों में विश्व विद्यालय की पदवी माने डिग्री है, लेकिन उनके पास कोई हूनर कौशल skill न होने से नौकरी मिलने के लिए उन डिग्रीयो का महत्व मिट्टी मोल बनता हैं। डिग्री है लेकिन नौकरी नहीं, नोकरी नहीं तो शादी नही, भूमि है लेकिन रसायनिक खेती या जैविक खेती में घाटा ही घाटा है, अंत में आत्महत्या या गांव छोड़कर पलायन, ये दो विकल्प उनके सामने बचते है। 

       हम हमारे सुभाष पालेकर कृषि जन आन्दोलन के माध्यम से एक एकड़ पालेकर फूड फॉरेस्ट पंच स्तरीय मॉडल के रूप में कोई भी किसान परिवार अपने दस प्रतिशत सिंचाई के पानी के उपलब्धता में एक देशी गोमाता का उपयोग करके और देशी बीजों का उपयोग करके न्यनूतम लागत मूल्य में उस मॉडल में दुनिया में उपस्थित सभी फसलों कों उगाकर पारिवारिक भोजन आत्मनिर्भरता एवं पारिवारिक आर्थिक आत्मनिर्भरता प्राप्त करने हेतु उन्हें मेरे सौ प्रतिशत स्वदेशी शिबीरो के माध्यम से हम प्रशिक्षित कर रहे है और उन्हें वे मॉडल प्रत्यक्ष दिखाने के लिए कृषि पर्यटन यात्रा माने शिवार फेरी का आयोजन देश भर सर्वत्र निरंतर कर रहे है।

        लेकिन, हमारे इस निशुल्क अभियान को विरोध करने के लिए कुछ असामाजिक तत्व आगे आ रहे है, यह बड़े दुर्भाग्य की बात है। जो देश के सामने समस्याओं का पहाड़ खड़े कर रहे हैं उनका सम्मान किया जा रहा है, और हम हमारे निशुल्क सेवा के माध्यम से उन समस्याओं का वैज्ञानिक शाश्वत समाधान दे रहे है, लेकिन हमारा विरोध हो रहा हैं, मेरे शिबीर के आयोजन में हमे मदद करने वाले संस्थाओं को और किसानों को गुमराह किया रहा हैं। क्या यही संवैधानिक दायित्व होता है? हे भगवान,उन्हें सद्बुद्धि दे। नहीं तो वैश्विक तापमान वृद्धि global warming और जल वायु परिवर्तन climate change एवं नकली बुद्धिमता artificial intelligence और बौद्धिक आतंक बाद निकट भविष्य में सभी सजीव सृष्टि को नाश के तरफ तेजी से ले जा रहे हैं । उस विनाश को रोकने का सुभाष पालेकर कृषि जन आन्दोलन के माध्यम से हमारे पास होने वाले सीमित संसाधनों से हम सौ प्रतिशत प्रामाणिक एवं पारदर्शी प्रयास कर रहे है। क्या हम गलत काम कर रहे है ? क्या हमारा यह निशुल्क सेवा देना असंवैधानिक है ? अगर नहीं हैं तब फिर यह हमारा विरोध क्यों किया जा रहा है ?

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