संस्थापक सीता माता मंदिर निर्माण समिति की कलम से
बिहार जो कभी भारतवर्ष का सर्वोत्तम राज्य था आज सबसे निकृष्ट पद पर आसीन है हर प्रकार से निचले पायदान पर है बिहार की दुर्दशा के लिए कौन जिम्मेदार है अगर इसका गहराई से आकलन करें तो कुछ बातें सामने आती है और जो बातें सामने आती है वह मन को विचलित कर जाती है ख्याल आता है की जो बिहार भारत का मान था सम्मान था वह आज दुर्भाग्य और दुर्दशा का शिकार कैसे हो गया वह कौन से कारक है जो बिहार को इस स्थिति में लाकर खड़ा कर दिया जी बिहार में साक्षात सरस्वती निवास करती थी जहां हर मानव के जीवा पर सरस्वती का वास होता था जिसके मुख से निकला हुआ हर एक शब्द भारत वर्ष को मजबूती देता था जिसने भारतवर्ष को एक सूत्र में बांधकर रखने का सफल प्रयास किया सिर्फ भारतवर्ष ही नहीं समस्त मानव जाति का कल्याण और दुख से बाहर करने का सफल प्रयास निरंतर करता रहा समस्त मानव जाति को एक नया आयाम दिया जिस पर हम आज भी गर्भ करते हैं लेकिन हम उस परंपरा को कायम नहीं रख पाए हर दृष्टिकोण से बिहार सफल रहा था याद कीजिए भगवान गौतम बुद्ध को जिसने अहिंसा का पाठ पढ़कर समस्त मानव जाति को एक नया रास्ता दिया करुना और दया का महत्व समझाया मानव को मानव से प्रेम करने का अर्थ समझाया याद कीजिए भगवान महावीर को जिन्होंने मनुष्य को छोड़ अन्य जीव पर भी दया और करुना बरसाए रखना की सीख दी और उन्होंने बताया कि हर एक प्राणी जो इस धरा पर है हर एक जीव जो इस धरा पर है वह हमारे लिए उपयोगी है मानव जाति के लिए उपयोगी है यानी प्रकृति के रहस्य को खोलकर मानव जाति के समक्ष रखा और उसके महत्व को समझाया याद कीजिए चंद्रगुप्त मौर्य को जिसने अहंकारी शासन को समाप्त कर एक न्यायिक व्यवस्था वाला शासन स्थापित किया याद कीजिए सम्राट अशोक को जिसने शासन की परिभाषा करना सिखाए और भारत वर्ष का मान बढ़ाने के साथ-साथ भारत की सीमा रेखा को भी बढ़ाया जिस पर आज भी हम गर्व करते हैं मनुष्य को स्थिति के अनुसार परिवर्तनशील होना चाहिए यह भी सम्राट अशोक ने बताया जो तलवार की धार पर विश्वास करता था वह भगवान बुद्ध के संपर्क में आकर अहिंसा और करुणा और दया का पाठ पढ़ने लगा याद कीजिए गुरु गोविंद सिंह जी को जिन्होंने सिर्फ बिहार ही नहीं बिहार के अलावा अन्य राज्यों को भी मदद किया अपने शौर्य से अपने पुरुषार्थ से याद कीजिए बाबू वीर कुंवर सिंह जी को जो भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में एक अतुलनीय उदाहरण है जिसकी तुलना किसी और से नहीं की जा सकती है याद कीजिए पीर अली को जो फांसी पर झूल गए और वीर कुंवर सिंह का साथ देते रहे याद कीजिए बत्तख खान को जिन्होंने अपना प्राण त्याग कर गांधी जी को बचाया याद कीजिए जय प्रकाश नारायण जी के संपूर्ण क्रांति को याद कीजिए अनुग्रह नारायण सिंह को याद कीजिए बिहार केसरी को याद कीजिए सच्चिदानंद सिंह को याद कीजिए देश रतन डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद जी को जो ज्ञान के साक्षात प्रतिमूर्ति थे आज तक वैसा लाल भारत में पैदा नहीं हुआ जिसकी कॉपी पर लिखा गया हो एग्जामिनि इज बेटर देन एग्जामिनर याद कीजिए मंडन मिश्र को याद कीजिए प्रेमचंद को याद कीजिए फणीश्वर नाथ रेणु को याद कीजिए रामधारी सिंह दिनकर को यादों के इतिहास को अगर हम खोलेंगे तो कभी अंत नहीं होगा और सिर्फ एक जाति में नहीं हर एक जातियों में अतुल्य विभूति बिहार में पैदा हुए जिसकी तुलना किसी और से कि नहीं जा सकती चाहे जनरल कास्ट के लोग हो ओबीसी के लोग हो sc के लोग हो st लोग हो विभूतियां से भरा पड़ा है बिहार का इतिहास उसी धारा के मानव पर आज हत्या अपहरण बलात्कार लूटपाट करने जैसी विकृत प्रवृत्ति का पोषक हो गया है उपरोक्त विभूतियों का जिनका मैंने जिक्र किया उनको आइकॉन नहीं मानकर हत्या करने वाले लोग जिन पर सबसे ज्यादा अपराधिक मुकदमा है बलात्कार करने वाले लोग जिन पर सबसे ज्यादा इस क्षेत्र के मुकदमा है अपहरण करने वाले लोग लूटपाट करने वाले लोग आज हमारे बिहार की युवा के आइकन बने हैं ऐसे लोग बिहार के युवा के आदर्श हैं बिहार उन्नति के शिखर से अवनति के निचले पायदान पर खड़ा हो गया है इसका कारण क्या रहा होगा क्या हमारे राज्य से यानी बिहार से माता सरस्वती का पलायन हो गया क्या हमने माता सरस्वती का जो मूल पूजा अध्ययन है उसका त्याग कर दिया क्या लोकतांत्रिक सरकारी जो आई उसने बिहार को अपने नीतियों से छलनी कर दिया बिहार में जातिवाद का जहर घोल दिया वर्ग भेद का जहर गोल दिया अपने स्वार्थ सिद्धि के लिए लोगों को बिहार वासियों को खंड-खंड में बांटना शुरू कर दिया आरक्षण का लॉलीपॉप दिखाकर सरस्वती का अपमान करवाया जिसे आज हम ओबीसी या एससी या st कहते हैं जिसे आज हम दलित कहते हैं वह हमारे समाज का हमारे राज्य के उत्थान का प्रतीक हुआ करते थे लोहार जाति के लोग इस धरा पर के लोगों को रक्षा कवच पहनाया उसे भय मुक्त किया बढ़ई जाति के लोग हमें कुर्सी पर बैठने उठने आदि के तरकीब सिखाएं यादव जाति के लोग समाज को ताकतवर बनाया चर्मकार जिसे हम चमार कहते हैं उसने अपने कला कौशल से निकृष्ट पदार्थ से हमारे पैरों के संरक्षण किया इतना बड़ा विज्ञान इतना बड़ा कला कौशल विश्व में कहीं नहीं मिलेगा यह भारतीय समाज के आर्किटेक्ट थे सबसे बड़े वैज्ञानिक सामाजिक संरक्षण के अग्रणी थे उनके मानसिक स्तर को कुचलने का प्रयास किया गया उसे दलित कहकर उसके सोच को दबाया गया दलित शब्द कहने वाले लोग भी इस जाति के लोग हैं और वह इसलिए कहते रहे की ताकि उनका स्वार्थ पूरा होते रहे और एक मुफ्त में उनका वोट मिलता रहे और सत्ता के शिखर पर बैठकर वह रंगरेलियां करते रहे मौज मस्ती करते रहे अपने सुख के सारे दरवाजे उन्होंने खोल दिए और उन लोगों को वहीं खड़ा रखा जो उनको मजबूत करने में लगे यह कटु सत्य है आरक्षण के इतने दिनों के बाद भी दलित बस्तियों में जाएं ओबीसी के बीच जाएं एससी एसटी के बीच जाएं आपको उनके स्थिति में कोई खास परिवर्तन नजर नहीं आता दिखेगा यानी सरकार की नीतियां समाज को तोड़ने की रही समाज को जोड़ने के लिए कभी नहीं प्रयास किया गया कहा गया सनघे शक्ति कलियुगे इस परिभाषा को भी गलत दिशा में लें जाया गया सभी जातियां एक साथ मिलकर रहें यह प्रयास नहीं किया गया शिक्षा में कदाचार को लगातार बढ़ावा दिया गया जिसके कारण बिहार के अधिकतर युवा डिग्रिधारी होते हुए भी नौकरी योग्य नहीं माने जाते हैं दूसरे शब्दों में कहें तो बिहार को प्रतिभा से वंचित कर दिया गया जो बिहार को रसातल में लेकर चला गया बिहार के युवा और युक्तियां के आइकॉन आज ऐसे लोग हैं जिन पर ठीक से थूका भी नहीं जा सकता है वह उनके आदर्श बने हुए हैं कोई बाहुबली बना हुआ है कोई छोटे सरकार छोटे साहब बने हुए हैं ऐसे लोग जिनका आप पिछला इतिहास देखेंगे तो घृणा छोड़कर और कुछ नहीं होगा जिन्होंने अपने झूठ प्रतिष्ठा के लिए पता नहीं कितने निर्दोष लोगों का जान लिया होगा उनके बीवी बच्चों के साथ अन्याय किया होगा ऐसे लोग बिहार के युवाओं के आदर्श हैं शर्म आती है मन विचलित हो जाता है बिहार कहां जा रहा है भूमिहार है तो भूमिहार पत्रकार भूमिहार नेता को आगे बढ़ाने में लगे हैं राजपूत है तो राजपूत पत्रकार राजपूत नेता को आगे बढ़ाने में लगे हैं यादव हेतु यादव पत्रकार यादव नेता को बढ़ाने में लगे हैं पासवान है तो पासवान पत्रकार पासवान नेता को आगे बढ़ाने में लगा है चर्मकार है तो चमार पत्रकार चमार नेता को आगे बढ़ाने में लगा और ऐसा हो भी क्यों ना जब हर तबका हर वर्ग यही काम कर रहा है और नेताओं का भी ऐसा ही सोच है तो भला बिहार का भला क्या होगा इंसान बने या बनाने की कवायत बिहार में हो ही नहीं रही है मेरा मानना है एक अच्छा इंसान इन सभी गलत प्रवृत्ति के लोगों पर हावी होता है और उसकी तुलना में कोई खड़ा नहीं हो पता आजकल बिहार में ऐसे गाने भी हिट होते हैं की प्रधान हो या जिला बाबुआन से हिला फिर इसको देखा देखी बबुआन के जगह भूमिहार लोगों ने किया फिर किसी और जाति या संप्रदाय का नाम सामने आएगा इस गाने पर और यह ट्रेंड चलता रहेगा यही प्रवृत्ति लेखक और कवियों में भी है वह अपने कलम का दुरुपयोग कर गलत लोगों का मान बढ़ाता है यानी चापलूसी करता है यह विकृत मानसिकता का प्रतीक है ऐसे गायक ही सुपरहिट होते हैं और उनको प्रतिष्ठा भी मिलती है यह गिरता बिहार का लक्षण है प्रतीक है हर जाति के नेता विशविमन करने से बाज नहीं आ रहे हैं समाज को कैसे तोड़ा जाए इस प्रक्रिया में मुल्लबीस है मेरा बिहार के युवा युवतीयों से विनम्र अपील है ऐसे नेता ऐसे आदर्श जो समाज के लिए घातक हैं उसका त्याग करें और ऐसे लोगों को अपना आदर्श माने जो आपका जीवन चरित्र बदल दे जो आपको सुख समृद्धि की ओर ले जाय और आप इंसान बनकर बिहार का मान बढ़ाएं किसी भी आपराधिक व्यक्ति का उम्र 10 से 12 साल से ज्यादा नहीं होता है इसके बाद या तो वह शांत हो जाता है या फिर उपरांत हो जाता है लेकिन एक इंसान इस धरा पर सदा विद्यमान रहता है अपनी प्रतिभा का पहचान करें उसका सम्मान करें आप इस धरा पर कुछ करने आए हैं इस लिए आपका योगदान होना अनिवार्य है अनन्याय जुल्म भ्रष्टाचार व व्यभिचार के खिलाफ साहस के साथ खड़े हो और बिहार की खोई हुई प्रतिष्ठा को वापस दिलाने का कार्य करें यह आपकी जिम्मेदारी भी है और कर्तव्य भी अन्यथा यह धारा आपको माफ नहीं करेगी
आपका
रूपेश कुमार
(संस्थापक )सीता माता मंदिर निर्माण समिति
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