पद्मश्री डॉ सुभाष पालेकर की कलम से
पद्मश्री डॉ सुभाष पालेकर
ता 17 अक्टूबर 2024
साथियों और बहनों,
विदर्भ के वर्धा में महात्मा गांधी जी के पावन निवास से पुनित सेवाग्राम आश्रम में कल परसो मै नई दिल्ली के विश्व युवक केंद्र और कमलनयन बजाज फाउंडेशन के संयुक्त प्रयासों से आयोजित एक राष्ट्रीय संगोष्ठी माने कॉन्फ्रेंस में शामिल था, जिसमें भारत देश के सभी राज्यों से गैर सरकारी संगठनों के, सामाजिक संगठनों और स्वयं सेवी संस्थाओं के संचालक प्रतिनिधि शामिल हुए थे। उसमे कल मेरा सुबह नौ बजे से दोपहर दो बजे तक भाषण था, जिसे सुनकर उनके मन में स्वदेशी और विदेशी, रसायनिक खेती,गो आधारित खेती, जैविक खेती, वैदिक खेती, बायो डायनेमिक खेती , यौगिक खेती और अन्य प्रचलीत कृषि पद्धतियों के बारे में , वैश्विक तापमान वृद्धि और जल वायु परिवर्तन, नकली बुद्धिमता artificial intelligence, इन सभी समस्याओं के बारे मे जो असमंजस भ्रांतियां थी, वे सब पूरी तरह निकल गई।
अब उनके समझ में आ गया कि ये सारी कृषि पद्धतियां और पाश्चात्य जीवन शैली का प्रचार एवं पाश्चात्य तकनीकी युद्ध... यह सारी किसानोंको, ग्रामीण अर्थ व्यवस्था को, देश की अर्थ व्यवस्था को, जीव जमीन पानी पर्यावरण और जैव विविधता जैसे प्राकृतिक संसाधनों को लूटने की एक सोची समझी नीती है, और आश्चर्य की बात यह है कि इन विधियों का प्रचार करने वालों को मालूम नहीं है कि ये कृषि पद्धतियां लुटेरी हैं, सोचा समझा एक चक्रव्यूह है । जब यह उन्होंने पहली बार मेरे भाषण में सुना तब वे आश्चर्य चकित हुए। दोष उनका बिल्कुल नहीं है, दोष है हम सभी हमारे देश के उन जागृत सामाजिक बदलाव लाने वाले कार्यकर्ताओं का जो समस्याओं के जड़ तक पहुंच कर उन जड़ों को उखाड़ने वाला स्थाई समाधान दुर्भाग्य वश नहीं दे पा रहे है, उनकी अनेक मर्यादाओं के कारण जनता को जागृत करने में असफल रहे है।
यह काम देश के युवा शक्ति का है, और नई दिल्ली की विश्व युवक केंद्र युवाओं को जागृत करने का अभिनव उपक्रम कर रहा है, बजाज फाउंडेशन उन्हें मजबूत साथ दे रहा है। दोनों संस्थाओं का मनपूर्वक आभार।
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