PM Modi का लक्षद्वीप दौरा और विपक्ष का तंज
पीएम मोदी का लक्षद्वीप दौरा और विपक्ष का तंज
हाल ही में पीएम मोदी ने लक्षद्वीप का दौरा किया है। जहां उन्होंने 1156 करोड़ के विकास परियोजनाओं के उद्घाटन और शिलान्यास किए हैं। पीएम मोदी के इस दौरे के बाद उनके स्नॉरकेलिंग एडवेंचर की कुछ तस्वीरें और वीडियो भी बहुत तेजी से वायरल होने लगी हैं।
जबकि विपक्ष को उनके इस दौरे पर छुट्टियां मनाने का तंज कसते हुए देखा गया। लेकिन पीएम मोदी का यह दौरा वास्तव में कितना महत्वपूर्ण है, बताते हैं कैसे ..
भारत में दक्षिण-पश्चिम तट से 200 से 440 किमी दूर लक्षद्वीप सागर में स्थित एक भारतीय द्वीपसमूह है। यह द्वीपसमूह भारत का सबसे छोटा केंद्र शासित प्रदेश होने के साथ साथ एक जिला भी है। जिसके राजधानी का नाम कवारट्टी है।
भारत के अधिकांश अन्य भारतीय राज्यों और क्षेत्रों की तरह, लक्षद्वीप की सरकारी संरचना 1950 के राष्ट्रीय संविधान द्वारा निर्धारित की जाती है। लक्षद्वीप का नेतृत्व भारत के राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त एक प्रशासक करता है। यह 36 द्वीपों का समूह था।
जिसे पहले लक्कादीव, मिनिकॉय और अमिनीदिवि नाम के तीन द्वीपों के समूह के नाम से जाना जाता था। जबकि कालांतर में 36 द्वीपों के समूह में से एक द्वीप समंदर में डूब जाने के बाद मौजूदा समय में अब यहां 35 द्वीप ही शेष बचे हुए हैं।
लक्षद्वीप नाम के अर्थ से यह भी परिभाषित होता है कि इन द्वीपों की संख्या पहले हजारों और उससे भी पहले लाखों में भी रही हों।
यहां की अधिकतर आबादी मलयालम भाषा बोलती है। मलयालम और संस्कृत भाषा के अनुसार लक्षद्वीप का अर्थ एक लाख द्वीप है। लक्षद्वीप में 10 उपविभागों वाला एक ही जिला शामिल है। यह क्षेत्र केरल उच्च न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में आता है।
भले ही आज लक्षद्वीप का कुल सतही क्षेत्रफल मात्र 32 वर्ग किमी है, लेकिन इसके साथ साथ 4,200 वर्ग किमी का अनूप क्षेत्र, 20,000 वर्ग किमी का प्रादेशिक जल क्षेत्र और 400,000 वर्ग किमी में फैले आर्थिक क्षेत्र भी इसी इलाके में आते हैं।
1982 में बनाए गए यूनाइटेड नेशंस लॉ ऑफ सी कन्वेन्शंस के रूल्स के मुताबिक किसी राष्ट्र के तट से 22 किलोमीटर के इलाके पर उसी देश का अधिकार होगा। इस तरह से लक्षद्वीप मलदीव्स और श्रीलंका जैसे देशों से निकट होने की वजह से और भारत के अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के हिसाब से भी बहुत ज्यादा महत्व का है।
लक्षद्वीप की राजधानी कावारट्टी में ही भारतीय नौसेना बेस आईएनएस द्वीपरक्षक है। इस तरह से भारत के सामरिक सुरक्षा के लिहाज से लक्षद्वीप का कितना महत्व हो जाता है यह बात समझी जा सकती है।
लेकिन चीन के करीब आए मालदीव के नए राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्ज़ू का आधिकारिक तौर पर इसी महीने चीन का दौरा भी होने वाला है। चीन ने कहा है कि मालदीव के नए राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्ज़ू इसी महीने चीन का दौरा करेंगे।
संक्षेप में कहें तो मालदीव के नए राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्ज़ू सरकार का चीन के साथ बढ़ती नजदीकियों को आईएमएफ के आंकड़े से समझा जा सकता है। आईएमएफ के आंकड़ों के अनुसार मालदीव पर चीन का करीब 1.3 बिलियन डॉलर कर्ज है। जो उसके कुल सार्वजनिक कर्जे का लगभग 20 पर्सेंन्ट है।
इस तरह से चीन मालदीव का सबसे बड़ा बाहरी ऋणदाता है। चीन के कर्ज के जाल में फंसकर पहले भी कई देशों की आर्थिक स्थिति लचर हो चुकी है। इसलिए मालदीव के नए राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्ज़ू सरकार के साथ साथ भारत के उन विपक्षी दलों को भी यह बात समझने की आवश्यकता है।
कि मालदीव 1965 में स्वतंत्रत होने के बाद से भारत उन्हें पहचान दिलाने वाले और उनके साथ राजनयिक संबंध स्थापित करने वाले सबसे पहले राष्ट्रों में से एक है। फिर भी ऐसा क्यों हो रहा है। मालदीव का बहुत कुछ भारत के लक्षद्वीप से मिलता जुलता है।
बावजूद इनके इन सभी बातों को भी नजरअंदाज करके अगर मालदीव चीन के प्रभाव में आ रहा है तो। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मालदीव के हीं तर्ज पर भारत के लक्षद्वीप को भी उससे कहीं ज्यादा भारतीयों और विशेषकर पूरी दुनिया के पर्यटकों के लिए एक पसंदीदा टूरिस्ट प्लेस के तौर पर विकसित करके भारत को एक नई पहचान भी दिलाई जा सकती है।
ऐसे में पीएम मोदी के लक्षद्वीप दौरे को लेकर भले ही विपक्ष पीएम मोदी पर छुट्टियां बिताने जैसा तंज कसते हुए भी दिखा। लेकिन चीन के साथ साथ मालदीव को भी इस बात की आहट अब लगने लगी है कि भारत को चीन और मालदीव की बढ़ती नज़दीकियों से कोई परेशानी नहीं होने वाली है।
बल्कि चीन और विशेषकर मालदीव के इन हरकतों का भारत के पास उनसे कहीं ज्यादा बेहतर विकल्प पहले से हीं मौजूद है। यहीं कारण है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन और मालदीव के बीच बढ़ती नज़दीकियों के बावजूद लक्षद्वीप को लेकर और ज्यादा आशान्वित हैं।
मालदीव में सबसे ज्यादा भारतीय पर्यटकों की संख्या होती है, लेकिन उन सभी पर्यटकों के पास भारत का हीं लक्षद्वीप मालदीव जैसे देशों से कहीं ज्यादा बेहतर विकल्प है। पीएम मोदी ने लक्षद्वीप दौरे का फोटो और वीडियो शेयर करके यह बात भारतीयों समेत पूरी दुनिया को भी बता दिया है।
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