महात्मा गांधी जी का स्मरण करते हुए विषय की शुरुआत करते हैं
डॉ सुभाष पालेकर
व्हाट्स एप नं 9850352745
ता 2 अक्टूबर 2023 गांधी जयंती
विषय ....अहिंसक संवैधानिक वैज्ञानिक आध्यात्मिक महायुद्ध ?
साथियों और बहनों,
आज दुनिया के एकमात्र अद्वितीय अलौकिक महान रचनात्मक सृजनात्मक व्यक्तित्व महात्मा गांधी जी का स्मरण करते हुए विषय की शुरुआत करते हैं।
अहिंसक संवैधानिक वैज्ञानिक आध्यात्मिक महायुद्ध? कैसे संभव है? आप स्वयं को पुंछने लगे होंगे कि अस्त्र शस्त्र के बिना अहिंसक महायुद्ध कैसे लडा जा सकते हैं? केवल असंभव !मैंने दिया विषय का शीर्षक पढ़कर आपके सदाचंचल मनमे हिमालय से भी ऊंचा सवाल अपने हाथ में आशंका की बंदूक लेकर खडा होगा। तुरंत आपकी सदा हिंसा के निरर्थक विश्लेषण में लगी रहने वाली आतंकवादी बुद्धि इस विषय के निरर्थक समीक्षा में लग जायेगी और मन बुद्धि के इस निरर्थक कसरत रुपी बौद्धिक आतंकवाद को देखते देखते आपकी अंतरात्मा आपसे और दूर दूर जाती हुई दिखाई देती होगी। लेकिन, मैंने विषय को सोच-समझकर लिखा है, क्यों कि मैं मेरे मन बुद्धि का गुलाम नहीं हुं। हां, अहिंसक संवैधानिक वैज्ञानिक आध्यात्मिक महायुद्ध। इसका साक्षात प्रमाण है महात्मा गांधी, जिन्होंने मानवी सभ्यता एवं इतिहास मे पहली बार जिसके साम्राज्य पर सूरज ढलता नहीं था उस ब्रिटिश साम्राज्य वाद के विरोध में वे अहिंसक संवैधानिक वैज्ञानिक आध्यात्मिक सत्याग्रह रुपी महायुद्ध लड़े और अपने व्यक्तिगत रूप में जीत गये, लेकिन पाश्चात्य आर्थिक साम्राज्य वाद के विरोध में लड रहे गांधी वाद , महात्मा कार्ल मार्क्स का मार्क्सवाद और महान वैज्ञानिक डॉ अल्बर्ट आइंस्टीन का सापेक्षता वाद उस मानव-निर्मित शोषणकारी अवैज्ञानिक नास्तिक पाश्चात्य आर्थिक साम्राज्य वाद को हराने में अभी तक असफल रहे हैं, इस वास्तविकता को हमें स्वीकार करना ही पड़ेगा। ऐसा क्यों हुआ? क्यों कि इन तीनों महात्माओं का लडाया गया युद्ध बाहरी गलत अदृश्य शत्रु के विरोध में था। असली युद्ध अन्दर का है, बाहरी नहीं है। साथियों और बहनों, वास्तव में यह हमारा अहिंसक संवैधानिक वैज्ञानिक आध्यात्मिक महायुद्ध किसी सरकार के, किसी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के, किसी गैर सरकारी संगठन के, सामाजिक संगठन के, आध्यात्मिक संगठन के,या किसी किसानों के संगठनों के , यां किसी जाति पंथ धर्म के, किसी राजनीतिक दल के यां किसी विशेष विचारधारा के विरोध में यां किसी व्यक्ति विशेष के विरोध में नहीं है। असल में हमारा यह महायुद्ध अज्ञान के, अविज्ञान के, असत्य के, अधर्म के, हिंसा के विरोध में है। ये हमारे मुख्य वास्तविक शत्रु है। लेकिन, मजे की बात है कि इन अज्ञान अविज्ञान असत्य हिंसा और अधर्म रुपी शत्रुओं को स्वयं का अस्तित्व ही नहीं है। वे अस्तित्व विहिन है। अज्ञान माने ज्ञान को भगाकर निर्माण हुइ अदृश्य अवस्था, अविज्ञान माने विज्ञान को जबरन भगाकर निर्माण होने वाली अदृश्य अवस्था, असत्य माने सत्य को भगाकर निर्माण होने वाली अदृश्य अवस्था, हिंसा माने अहिंसा को भगाकर निर्माण होने वाली अदृश्य अवस्था, और अधर्म माने ईश्वर निर्मित कायदे कानून को नकारते हुए असली ईश्वर निर्मित धर्म को भगाकर निर्माण होने वाली ईश्वर विरोधी कर्म कांड रुपी अदृश्य अवस्था, अंधेरा माने प्रकाश को भगाकर निर्माण होने वाली अदृश्य अवस्था। अर्थात, अगर इन हमारे सत असत विवेक मन-मस्तिष्क बुद्धि को गुलाम बनाकर हमें ईश्वर से दूर ले जाने वाले अज्ञान अविज्ञान असत्य हिंसा और अधर्म को भगाना है तो हमें सिर्फ एक ही करना है, दोबारा ज्ञान विज्ञान सत्य अहिंसा धर्म एवं प्रकाश और जैवविविधता को पुनर्स्थापित करना है। यह करने के लिए किसी देशी विदेशी फंडिंग एजेंसी के यां किसी सरकार के यां किसी उद्योग समूह के सामाजिक दायित्व निधि corporate social responsibility fund के रुप में मिलने वाली आर्थिक मदद की बिल्कुल आवश्यकता नहीं है। क्यों कि हमारा यह महायुद्ध किसी भी बाहरी दृश्यमान शत्रु के विरोध में नहीं है, हमारा यह महायुद्ध हमारे मन में छुपकर बैठे हमारे खरे सही शत्रु होने वाले काम मोह लोभ मद मत्सर और तृष्णा इन षडरिपू के विरोध में है, माने हमारा यह महायुद्ध अन्दर का है,बाहर का नहीं। बाहर का महायुद्ध अस्त्र शस्त्र से जिता जा सकता है, यां हारा जा सकता है। लेकिन मन बुद्धि में चल रहे इस अंदर के अदृश्य महायुद्ध को किसी बाहरी मानव द्वारा निर्मित अस्त्र शस्त्र से नहीं लढ सकते। यह सर्वथा असम्भव है। इस अदृश्य अहिंसक संवैधानिक वैज्ञानिक आध्यात्मिक महायुद्ध को जीतने के लिए एक अमोघ महा अस्त्र हमारे पास है,जिसका नाम है आत्मनिर्भरता,आध्यात्म, आध्यात्मिक अहिंसक संवैधानिक वैज्ञानिक शोषणमुक्त जीवन शैली और आध्यात्मिक कृषि। सुभाष पालेकर कृषि जन आंदोलन में इन दोनों का ही हम लोगों में जाकर शिबीरों में, मेरी लिखी सभी भाषाओं में लिखी किताबों के द्वारा प्रचार करते हैं, उन्हें समझाते है और हमारे सिद्ध प्रारुप माने माॅडेल भी शिवार फेरी में प्रत्यक्ष में दिखाते हैं। यह अहिंसक संवैधानिक वैज्ञानिक आध्यात्मिक महायुद्ध के विरोध में कोई भी आम आदमी घर बैठे अपनी नौकरी यां व्यवसाय यां कार्य आगे जारी रखते हुए अहिंसक लड सकते हैं और जीत सकते हैं, इसके लिए उनकी नौकरी छोड़ने की यां अपना व्यवसाय बंद करने की यां अपना चल रहा कार्य बंद करने की बिल्कुल आवश्यकता नहीं है। हमारे द्वारा चलाए जा रहे इस अहिंसक संवैधानिक वैज्ञानिक आध्यात्मिक महायुद्ध के विरोध में कैसे अहिंसक लड़े और जीत हासिल करें इस को सुनने का, जानने का और प्रत्यक्ष देखने का सुअवसर आपको मेरे आगामी जनवरी यां फरवरी 2024 में श्रीक्षेत्र शिर्डी साईं बाबा में होनेवाले प्रस्तावित आठ दिन के शिबीर और शिवार फेरी में आपको मिलने वाला है। जल्द उसकी अधिकृत घोषणा होगी, जैसे ही वह घोषणा आप तक पहुंचती है, आप तुरंत आपका शिर्डी साईं बाबा या नाशिक के लिए रेलवे ट्रेन का आरक्षण reservation करा दिजिए। यह पांच दिवसीय शिबीर सिर्फ हिंदी भाषा में होगा और तीन दिवसीय शिवार फेरी माने सुभाष पालेकर कृषि करने वाले आदर्श किसानों के खेत में जाकर उन अद्भुत प्रारुप माने माॅडेल को अपनी आंखों से प्रत्यक्ष सामने देखना परखना माने कृषि पर्यटन करना, इस कृषि पर्यटन में आपको हिंदी अंग्रेजी गुजराती मराठी कन्नड़ तेलुगू तमिल भाषाओं में जानकारी देने का प्रबंध हम करेंगे।
धन्यवाद।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें