पद्मश्री डॉक्टर सुभाष पालेकर
पद्मश्री डॉ सुभाष पालेकर
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ता 14 अक्टूबर 2023
साथियों और बहनों,
अस्त्र शस्त्र पत्थर डंडे शोषण और भ्रष्टाचार से होने वाले हर प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष आतंकवादी हिंसा के पिछे उसका संचालन करने वाला बौद्धिक आतंकवाद होता है। लेकिन दोष इस बौद्धिक आतंकवाद को नहीं दिया जाता, उल्टा उसे गौरवान्वित किया जाता है, उसे किसी दार्शनिक रुपबंध में बिठाया जाता है। चाहे सामरिक हिंसा हो या बौद्धिक हिंसा हो, दोनों की निंदा होनी चाहिए। अस्त्र शस्त्र से होने वाली बर्बादी हम आंखों से देख सकते हैं, लेकिन मानव निर्मित विध्वंसक अप्राकृतिक अवैज्ञानिक तकनीक से होने वाली बौद्धिक बर्बादी हमारे आंखों को ही अंधी कर देती है, हमारे मन-मस्तिष्क बुद्धि को गुलाम बनाती है, तब पृथ्वी माता का होने वाला विनाश शस्त्र अस्त्र से होने वाले विनाश से कई गुना ज्यादा होता है। आज आर्थिक साम्राज्य वाद के होड़ में यहीं हो रहा है। इसे रोकने का दायित्व सिर्फ सरकार का है या किसी गैर सरकारी संगठन का या किसी सामाजिक संगठन का या किसी आध्यात्मिक संगठन का है,यह सिद्धांत ग़लत है, अव्यवहार्य है इस तरह की अपेक्षा करना ही अव्यवहार्य है। इतिहास साक्षी है, इस विनाश को रोकने में तमाम सरकारी या संगठनात्मक प्राचीन अर्वाचीन प्रयास विफल रहे हैं। इस विनाश को रोकने का ऐतिहासिक दायित्व हमारे रचनात्मक सृजनात्मक युवा पीढ़ी का है ,जो सिर्फ उनके द्वारा चलाए जाने वाले राजनीति मुक्त, अधर्म मुक्त जन आंदोलन से ही संभव हो सकता है। इस युवा शक्ति में अपार सृजनात्मक ऊर्जा है, जिसका सिर्फ हिंसात्मक दुरुपयोग किया जा रहा है, रचनात्मक सदुपयोग के लिए उन्हें ठीक सिद्ध मंच नहीं मिल रहा है। इस मंच को खडा करने का और उसे युवा शक्ति के समर्थ हाथों में सौंपने का दायित्व हमारा आपका है, जो इस पृथ्वी माता को विनाश से बचाना चाहते हैं , उसे बचाने का जिनका सिद्ध रचनात्मक सृजनात्मक कार्य प्रारुप माने माॅडेल के रूप में सामने खड़ा हैं।
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