पद्मश्री सुभाष पालेकर

 पद्मश्री डॉ सुभाष पालेकर

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ता .7 सितंबर 2023 शाम 

साथियों और बहनों,

जो पाश्चात्य भोगवादी जीवन शैली से और पाश्चात्य अप्राकृतिक अवैज्ञानिक हरित क्रांति एवं जैविक खेती से खुद की होने वाली लूट शोषण चूपचाप अज्ञान वश होने देता है, होते हुए चूपचाप सहन करता है,उस ग्रामीण क्षेत्र के ग़ुलाम मानव समूह को भारत कहते है ....और जो ग्रामीण क्षैत्र के समृद्ध प्राकृतिक संसाधनों के और मानवी संसाधनों के शोषण एवं लूट पर खडा है वह इंडिया है। ......जो खेती में  हर साल घाटा सहन करके, खुद की आत्महत्या स्वीकार करके एवं ख़ुद भूका रहकर अपना सामाजिक दायित्व समझकर शहरी लोगों की भूक मिटाता है, वह भारत है ...जो छटे सातवें वेतन आयोग के माध्यम से,बेपार के माध्यम से और आय टी के माध्यम से मिलने वाले आवश्यकता से कई गुना ज्यादा पैसे अपने जेबों में भरकर भी हर वस्तु और अनाज फल सब्जियां सस्ते में चाहता है, महंगाई महंगाई का जाप करके अपने स्वार्थ को समृद्ध करता है ,उन लोगोंके निवासी शहरी क्षेत्र को इंडिया कहते हैं।....यह ग्रामीण भारत आज भी भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता को संरक्षित करके उसे जी जान से आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, इसके विपरित यह शहरी इंडिया आज भी अतिरिक्त भोगवादी अप्राकृतिक अवैज्ञानिक युरोप अमेरिकन संस्कृति एवं सभ्यता को पुरे देश में फैलाने की जी जान से कोशिश कर रहा है, उसका ऊंची आवाज में गुणगान कर रहा है ‌।......... दुसरे विश्व महायुद्ध के बाद हमारे देश पर लागू शोषणकारी आर्थिक साम्राज्य वाद को कडी टक्कर अपने स्वयं विकासी स्वयं पोषी स्वावलंबी स्वदेशी शोषण मुक्त ग्रामीण अर्थ व्यवस्था के माध्यम से देनेवाला भारत है,  इसके विपरित  विदेशी शोषणकारी लूटेरे पुंजी केंद्रित साहुकारी अर्थ व्यवस्था को, उसके द्वारा भेजी अवैज्ञानिक विदेशी शोषणकारी हरित क्रांति को , एवं जैविक खेती को और मजबूत एवं बलवान और क्रूर बनाने में लगा क्षेत्र इंडिया है। ... हमारे पुरातन देशी बीजों को, हमारे आयुर्वेद जड़ी बूटी को और हमारे ग्रामीण संस्कृति का मूलाधार होने वाले देशी गोमाता को जी जान से बचाने में लगा भारत है,.. इसके विपरित, हमारे देशी बीजों को खत्म करने के लिए लायें विदेशी शोषणकारी विनाशकारी संकर बीजों को, विदेशी विनाशकारी विध्वंसक जन्नूक रोपित genetically modified seeds बीजों को, हमारे देशी गोधन को नष्ट करने हेतु लाये विदेशी जर्सी होल्सटीन काऊ को और हमारे आयुर्वेद एवं प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति को नष्ट करने हेतु लाये विदेशी अप्राकृतिक एलोपैथि शास्त्र को असहाय भारतीय किसानों और भारतीय जनता पर जबरन थोंपने वाला इंडिया है। .....हमारी अस्सल भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता के जड़ों को मजबूत करने की कोशिश करने वाला ग्रामीण भारत हैं, इसके विपरित, इन जड़ों को उखाड़कर हमारे देश पर  अप्राकृतिक अवैज्ञानिक भोगवादी एवं प्राकृतिक संसाधनों का विनाश करने वाले पाश्चात्य जीवन शैली को भारतीय जीवन पर थोंपने का काम करने वाला इंडिया है। ...... पुरातन काल से कौशल हुन्नर अच्छे संस्कार ज्ञान विज्ञान सत्य अहिंसा धर्म और जीवन रक्षक शिक्षा को सिखाने वाली निस्वार्थ सेवाभावी सर्वोत्तम गुरुकुल शिक्षा व्यवस्था देने वाला भारत था,   इसके विपरित, ज्ञान के नाम पर अज्ञान , विज्ञान के नाम पर अविज्ञान , सत्य के नाम पर असत्य , धर्म के‌ नाम पर अधर्म सिखाने वाली, अकुशल हन्नर रहित एवं संस्कार विरहित शिक्षा सिखने वाला इंडिया है।

     अब सवाल पैदा होता है कि हमें क्या चाहिए? स्वदेशी रक्षक भारत या विदेशी रक्षक इंडिया? क्या आप ज़वाब देंगे?

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