पद्मश्री डॉक्टर सुभाष पालेकर का आह्वान

 पद्मश्री डॉ सुभाष पालेकर

व्हाट्स एप नं 9850352745

ता 26 सितंबर 2023

साथियों और बहनों,

जीन किसान साथियों ने मई 2023 में आयोजित नाशिक शिवार फेरी में शामिल होकर उसमें श्री हितेश पटेल मो नं 9823290969 जी का सुभाष पालेकर कृषि के द्वारा खडा किया गया सर्वोत्तम पालेकर फुड फाॅरेष्ट पंचस्तरीय माॅडेल बीजवाले अंगूर समेत देखा है और वही माॅडेल खडा करने के व्यवस्था में पुरे समर्पण भाव से जो लग गये है, उन्हें विनम्रतापूर्वक अनुरोध है कि आपको आपके प्रस्तावित निर्माणाधीन माॅडेल में लगाने के लिए बीज वाले पोषणयुक्त औषधि निर्यातक्षम अंगूर की रेड ग्लोब किस्म के नर्सरी पौधे थैलियों में चाहिए, जिन्हें हम जनवरी 2024 में लगायेंगे , उन्होंने तुरंत मुझे मेरे व्हाट्स एप नं 9850352745 पर मेसेज भेजना है, जिसमें आपको आपका नाम पत्ता परिचय व्हाट्स एप नं, कूल कितने नर्सरी पौधे चाहिए, कहा पहुंचाना है इसकी पुरी जानकारी दीजिए, ताकि हम आपके नर्सरी पौधों को आरक्षित रख सके। यह मालूम पडा है कि अंगूर की छांट कलम cutting कुरियर से पहुंचाने में उनको क्षति होती है, पहुंचने तक अधिकांश सुखते है। इसलिए अब हमने निश्चित किया है कि हम अगले जनवरी फरवरी में रेड ग्लोब अंगूर के नर्सरी पौधे ही लगायेंगे।

        अब यह वैज्ञानिक कसौटियों पर सिद्ध हो गया है कि अंगूर के अधिकतम पोषण मूल्य और औषधि मुल्य बीज वाले अंगूर के बीज में और छिल्के में होते हैं, बिना बीज वाले अंगूर में पोषण मूल्य और औषधि मुल्य बीजवाले अंगूर के तुलनामे बहुत कम होते हैं। बीजवाले रेड ग्लोब अंगूर में ये सारे पोषण मूल्य और औषधि मुल्य होते हैं।बीज वाले अंगूर प्रकृति में ईश्वर द्वारा निर्मित किए हैं, बिना बीज वाले नंपुसक अंगूर उस अंगूर बेलमे उत्परिवर्तन क्रिया से निर्मित अप्राकृतिक विकृति है, अपवाद है । और अपवाद नियम नहीं बन सकता।                   दुसरी बात, बिना बीज वाले अंगूर किस्मों में अंगूर फल का आकार और लंबाई बढ़ाने के लिए जिबरेलिक एसिड जैसे मानव द्वारा संश्लेषित खतरनाक रसायनिक हार्मोन का उपयोग करना ही पड़ता है। ये हार्मोन तेजी से कोशिकाओं का विभाजन और गुनन करके अंगूर फल का आकार और लंबाई दुगुनी कर देता है, माने अनियंत्रित कोशिकाओं विभाजन होता है। कैंसर बिमारी का लक्षण भी अनियंत्रित कोशिका विभाजन ही हैं।‌ जिन पाश्चात्य देशों के कृषि वैज्ञानिकों ने इस मानव द्वारा संश्लेषित जिबरेलिक एसिड जैसे हार्मोन का,जो ईश्वर निर्मित वनस्पति जन्य रसायन हार्मोन नहीं है,मानव द्वारा संश्लेषित नकली हार्मोन है,उसके उपयोग करने की सलाह हमारे देश के अंगूर उत्पादकों को और कृषि वैज्ञानिकों को दी है, क्या वे पाश्चात्य वैज्ञानिक हमारे देश के उच्चतम न्यायालय में प्रतिज्ञा पत्र affidavit लिखकर देंगे कि रासायनिक खेती में पैदा बिन बीजवाले अंगूर,जिनका आकार और लंबाई बढ़ाने के लिए जिबरेलिक एसिड जैसे नकली संश्लेषित हार्मोन का उपयोग किया है, उन अंगुरों को खानें से खानेवाले मानव को कैंसर जैसी जानलेवा बिमारियां बिल्कुल नहीं होगी?  देश के हर नागरिक को यह सवाल पुंछने का संवैधानिक अधिकार है और मानवाधिकार भी है। हम उनसे बिल्कुल लड़ना नहीं चाहते हैं। क्यों कि वे भी सत्य से निरंतर दूर जा रहें हैं,भटक रहे हैं, उन्हें मैं दोष नहीं दुंगा।इस स्थिति में हमारे पास एक ही विकल्प बचता है कि हम इसके आगे सिर्फ सुभाष पालेकर कृषि से पैदा ज़हर मुक्त पोषण मुल्यों से संपृक्त एवम औषधि रेड ग्लोब, अनाब ए शाही जैसे बीजवाले अंगूर ही खायेंगे, जिनका आकार और लंबाई अपने आप बिना बीज वाले अंगूर से ज्यादा बढती हे, हमें जिबरेलिक एसिड जैसे खतरनाक रसायनिक हार्मोन का उपयोग करने की बिल्कुल आवश्यकता नहीं होती। गये साल रेड ग्लोब अंगूर प्रति किलो 150 रुपए भावसे निर्यात हुएं हैं, अगले जनवरी 2024 में प्रस्तावित नाशिक शिवार फेरी में निर्यातक रेड ग्लोब अंगूर उत्पादक खुद अपना अनुभव आपके सामने बतायेंगे।  बीजवाले अंगूर का बेदाना सर्वोत्तम पोषणयुक्त औषधि होता है, जिसके बेदाना माने किसमिस निर्माण में कोई भी रसायन का उपयोग नहीं होता है।

     साथियों, मुझे आपकी पौधों की मांग आगे के दो दिन में मालूम होनी चाहिए, क्यों कि अक्तूबर के पहले सप्ताह में उनके बेलों की अक्तूबर छंटाई शुरू हो जायेगी। धन्यवाद

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