हरित क्रांति के भारतीय सरसेनापती डॉ एम एस स्वामीनाथन जी का कल दीर्घ आयु के चलते स्वर्गवास हुआ, उनके मुक्त आत्मा को ईश्वर चीर शांति दे , यहीं ईश्वर चरणों में प्रार्थना है, हार्दिक श्रद्धांजलि

 पद्मश्री डॉ सुभाष पालेकर

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ता 29 सितंबर 2023

विनम्र श्रद्धांजलि

हरित क्रांति के भारतीय सरसेनापती डॉ एम एस स्वामीनाथन जी का कल दीर्घ आयु के चलते स्वर्गवास हुआ, उनके मुक्त आत्मा को ईश्वर चीर शांति दे , यहीं ईश्वर चरणों में प्रार्थना है, हार्दिक श्रद्धांजलि,ओम शांति शांति।

         अनाज के बारे में जब हमारा देश परावलंबी था, हम भूखमरी टालनें के लिए पी एल 480 जैसे मानहानि कारक करार करके हम पुरी तरह अमेरिका से निकृष्ट गेहूं और मिलों जवार के विशाल आयात पर निर्भर बन गये थे, यह किसी भी देश को आत्मसम्मान नहीं है। इसलिए खाद्यान्न के उत्पादन में स्वावलंबी बनने के लिए हमारे देश ने डॉ एम एस स्वामीनाथन जी के नेतृत्व में हरित क्रांति को स्वीकार करके उसका अमल किया। आज हम गेहूं और चावल के उत्पादन में आत्मनिर्भर हैं और निर्यात भी कर रहे हैं, यह तत्कालीन भारत सरकार और डॉ एम एस स्वामीनाथन जी और उनके सभी कृषि वैज्ञानिकों का ऐतिहासिक कार्य है, उसके लिए उन्हें बडे आदर के साथ हमारे सुभाष पालेकर कृषि जन आंदोलन के माध्यम से हार्दिक श्रद्धांजलि अर्पण करते हैं। उनके मृत्यु के पश्चात हरित क्रांति ने अब जरुर पुनर्विचार करना चाहिए कि अब भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद Indian Council of Agriculture Research  ICAR ने हरित क्रांति का ऐसा सक्षम विकल्प देश को देना होगा जो वैश्विक तापमान वृद्धि और जल वायु परिवर्तन को रोक लगाएगा, भारत सरकार हर साल लाखों टन खानेका तेल दालें फल रासायनिक खाद दवाएं अवजार और तकनीक का विशाल मात्रा में आयात करता है उह आयात को पुरी तरह बंद कर सके, किसानों की आत्महत्याओं को रोक सकें, जीव जमीन पानी पर्यावरण और जैवविविधता इन प्राकृतिक संसाधनों के होने वाले विनाश को बंद कर सके, किसानों का और युवा शक्ति का गांवों से होने वाला पलायन को रोक सकें, जहरीले भोजन से होने वाले कोरोना कर्करोग cancer मधुमेह diabetes उच्च रक्तचाप,दिल की बिमारियों से हो साल हो रहे मानव मृत्यु को रोक सकें, प्राकृतिक आपदाओं से फसलों की होने वाली बर्बादी को रोक सकें और देश के प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेन्द्र मोदी जी के किसानों की दुगुनी आय और आत्मनिर्भर भारत इन दोनों सपनों की आपूर्ति कर सकें। यही भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की डॉ एम एस स्वामीनाथन जी को दियी जाने वाली सही श्रद्धांजलि होगी। लेकिन,बड़े दुःख और पीडा से कहना पड़ रहा है ऐसा कोई भी कृषि तकनीक आज भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पास नहीं है। हमारे पास है।

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