पद्मश्री डॉक्टर सुभाष पालेकर का आह्वान
पद्मश्री डॉ सुभाष पालेकर
व्हाट्स एप नं 9850352745
ता 28 सितंबर 2023 अनंत चतुर्दशी
विषय ...हमारा पाश्चात्य विदेशी जन्नूक रोपित बी टी genetically modified GM बीजों का विकास करने वाले जन्नूक अभियांत्रिकी तकनीक को विरोध क्यों है?
साथियों और बहनों,
सुभाष पालेकर कृषि जन आंदोलन जन्नूक रोपित माने genetically modified GM माने बी टी कपास और GM सरसों बीजों के निर्माण करने वाले जन्नूक अभियांत्रिकी (genetic engineering) तकनीक का और उसका अमल करने वाले रेन्विक जैव वैज्ञानिकों molecular biologist का सख्त विरोध करता है। क्यों कि यह जन्नूक रोपन तकनीक genetic engineering technology माने ईश्वर निर्मित प्राकृतिक देशी बीजों पर किया गया मानवी निर्मम जबरन बलात्कार हैं ।ईश्वर निर्मित प्रकृति में इस तरह के जबरन बलात्कार का कहीं भी अस्तित्व नहीं है, प्रकृति में सिर्फ ईश्वर निर्मित स्वयं उत्परिवर्तन क्रिया (self mutation )से अधिकाधिक सशक्त बलवान अधिक उत्पादक देशी किस्मों का विकास बिना मानवीय सहायता ईश्वर करता है । इसलिए यह कपास में हो यां सरसों में हो रही जन्नूक रोपन की राक्षसी कृति ईश्वरीय व्यवस्था को दियी खुली चुनौती है, अधर्म है, नास्तिकता है,पशूत्व है। देशी बीजों के हाथ पांव बांधकर उनकी अनुमति लिये बिना एवं उनके कडे विरोध के बावजूद उन देशी बीजों पर बलात्कार करने का अपराध पाश्चात्य जन्नूक अभियांत्रिकी वैज्ञानिक (genetic engineer scientist )माने रेन्विक जैव वैज्ञानिकों ( molecular biologist) द्वारा खोजी जन्नूक अभियांत्रिकी तंत्र विज्ञा के ( genetical engineering technology) माध्यम से देशी हरबेशियम कपास पौधों के जड़ों के पास अपना कार्य करने वाले बैसिल्लस थुरिएंजीएंसीस ( Basillus thuringiensis)नाम के ईश्वर निर्मित सूक्ष्म जीवाणूओं के शरीर में से अमेरिकन बोल वर्म के विरोध में प्रतिरोध शक्ति ( resistance power) निर्माण करने वाले बी टी जन्नूक बोलगार्ड प्रोटीन को जबरन निकालकर उस बीटी जन्नूक को देशी कपास के गर्भाशय में जबरन बलात्कार करके रोपित किया, इस जघन्य पाशविक बलात्कार से गर्भ धारणा होकर उस कपास के पौधों को बच्चा रुपी जो बीज पैदा हुआ,उसे जन्नूक रोपित बी टी बीज माने जी एम GM बीज ( genetically modified GM) माने आम भाषा मे बी टी कपास बीज यां जी एम GM बीज कहते हैं। यह सारा अप्राकृतिक अवैज्ञानिक अमानवीय जघन्य कर्म संस्थागत जैवसूरक्षा समिति माने इन्स्टीट्यूशनल बायोसेफ्टी कमिटी ( Institutional Biosafety Committee), जन्नूक परिचालन पर पूनरावलोकन करने वाली समिति माने रिव्यू कमिटी ऑन जेनेटिक मॅनीपुलेशन ( Review Committee on Genetic Manipulation) और जन्नूक अभियांत्रिकी अनुमोदन समिति माने जेनेटिक इंजीनियरिंग अप्रूव्हल कमिटी ( Genetic Engineering Approval Committee) इन संस्थाओं के कडी निगरानी में हो रहा है। क्यां ईश्वर निर्मित प्रकृति में इस तरह का कोई जघन्य अप्राकृतिक बलात्कार अस्तित्व में है? नहीं है, बिल्कुल नहीं है। ईश्वर निर्मित प्रकृति में किसी भी भूमि में होनेवाले सुक्ष्म जीवाणू के शरीर में से कोई जन्नूक gene निकालकर उसे किसी पौधे के बीज में रोपन करने की मानें जबरन डालने के कृत्य का कहीं भी अस्तित्व नहीं है। इसका अर्थ यह है कि यह जन्नूक रोपन रुपी बलात्कार ईश्वरीय व्यवस्था के विरोध में कियी खुली बग़ावत है, ईश्वर को दियी खुली चुनौती है। यह चुनौती आध्यात्म कैसे हो सकता है? यह तो शतप्रतिशत नास्तिकता है।
प्रकृति में हर पेड़ पौधा,जीव जंतु, प्राणी, पंछी,मानव उसके सामने खड़ी हर गंभीर समस्या के साथ सशक्त मुकाबला माने प्रति रक्षात्मक संघर्ष युद्ध करने के लिए स्वयं में ईश्वर देय स्वयं उत्परिवर्तन क्रिया ( God gifted Self mutation) के द्वारा अनुकूल परिवर्तन लाता है और उन गंभीर समस्याओं पर मात करके उस युद्ध को जीत जाता है और स्वयं का वंश और ज्यादा सशक्त करके आगे बढ़ाता है, जैवविविधता को सुरक्षित रखकर आगे बढ़ाता है।यह सब ईश्वरीय व्यवस्था है। यह स्वयं विकसन self mutation क्रिया देशी परंपरागत बीजों में ईश्वर निरंतर शुरू रखता है। इसके लिए ईश्वर किसी भी मानव की प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष सहायता नहीं लेता। ईसी ईश्वरीय व्यवस्था से यह सजीव सृष्टि विकसित होती आ रही है, नई नई प्रजातियों का निर्माण होता आ रहा है, सजीव सृष्टि की जैवविविधता निरंतर बढ रही है। इस सृष्टी विकास के लिए ईश्वर ने किसी जन्नूक अभियांत्रिकी तकनीक genetic engineering technology का उपयोग नहीं किया। सुभाष पालेकर कृषि में हम इस ईश्वरीय व्यवस्था को आगे बढ़ाते हैं। हम इन देशी बीजों पर पाश्चात्य विदेशी रेन्विक जैव वैज्ञानिकों ( Molecular biologist) के द्वारा कपास और सरसों के बीजों पर होने वाले इस तरह के जन्नूक अभियांत्रिकी ( genetical engineering) द्वारा हो रहे खुले मानवी अवैज्ञानिक बलात्कार के कट्टर विरोध में है।
ईस जन्नूक रोपन जबरन बलात्कार क्रिया से जन्मे जन्नूक रोपित बीटी GM बीजोंरुपी बच्चों का क्यां दोष है? उन जन्नूक रोपित बी टी बीजों के द्वारा खडी उनकी जन्नूक रोपित बी टी कपास की फसल रुपी बच्चें का यां संभाव्य जन्नूक रोपित सरसों फसल रुपी बच्चें का क्या दोष है? बताइए? वे बीटी कपास की खडी फसल तो निष्कलंक निर्दोष हैं। क्यों कि वह बलात्कारित पैदास है, बलात्कार करने वाली नहीं है, माने वह अपराधी एवं पापी दुराचारी नहीं है। फिर उसके प्रति अनेक सामाजिक कार्यकर्ता social activist के द्वारा हों रही यह असिमित घृणा क्यों ? जीन देशी बीजों पर उनके हाथ पांव बांधकर उनके कडे विरोध के बावजूद जबरन अवैज्ञानिक बलात्कार किया गया है, इसमें उन देशी कपास के बीजों का क्या दोष है? अगर दोषी है,तो वें पाश्चात्य विदेशी जन्नूक अभियंता माने रेन्विक जैव वैज्ञानिक (molecular biologist scientist) दोषी है, जिन्होंने यह जन्नूक रोपन तकनीक का विकास करके दुनिया के तमाम किसानों पर वह तकनीक जबरन थोंपा। बलात्कार से पैदा बी टी कपास फसल यां सरसों फसल रुपी बच्चे दोषी कैसे हो सकतें हैं?
इसलिए सुभाष पालेकर कृषि जन आंदोलन जबरन बलात्कार के परिणाम स्वरूप जन्मे बच्चों रुपी बी टी कपास या सरसों फसल के निर्दोष फसल को गोद में लेकर उन्हें अपने प्रिय दत्तक पुत्र के रूप में मानकर उन्हें जीवामृत घनजीवामृत आच्छादन वाफसा और जैवविविधता इन सुभाष पालेकर कृषि के सारे संस्कार करते हैं और इस तरह उन्हें उनके निष्कलंक सन्मान के साथ जीने के उनके जन्मसिद्ध ईश्वर देय अधिकार उन्हें लौटाते है। हम जो ये सारे संस्कार एवं सन्मान देशी बीजों से पैदा फसल को देते हैं, वहीं संस्कार एवं सन्मान खडे बीटी कपास को भी देते हैं, उनके साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं करते हैं। परिणाम स्वरूप, ये बीटी कपास रुपी रावण अपने आप देशी कपास रुपी श्री राम बन जाते हैं,वैसा व्यवहार करने लगते हैं, बीटी कपास में होनेवाले कोई भी अमेरिकन गुलाबी सुंडी का आक्रमण या गंभीर बिमारियों के सारे दोष सुभाष पालेकर कृषि में खडी बीटी कपास फसल में आपको दिखाई नहीं देते है। इसलिए हम बीटी कपास और देशी कपास दोनों के प्रति एकसमान स्नेह प्यार ममता का व्यवहार करते हैं,हमारे पास कोई भी भेदभाव नहीं है। क्यों कि हमारी भूमिका उसी स्वास्थ चिकित्सक वैद्य डाॅकटर की है,जो पापी दुराचारी डाकू को बड़े प्यार ममता स्नेह से वहीं वैद्यक सेवा देता है जो साधू संत को भी समता भाव से देते हैं। हमारे पास कोई भी भेदभाव नहीं है।
हमने सिद्ध किया है कि सुभाष पालेकर कृषि में देशी बीज यां सिधे चयनित बीज ( straight line selected seeds), या उन्नत बीज ( improved seeds) यां संकर बीज ( hybrid seeds) या जन्नूक रोपित ( genetically modified GM seeds) बीजों को बोकर सुभाष पालेकर कृषि में खडी बीटी कपास की फसल पड़ोस के रासायनिक खेती में लिये बी टी कपास के फसल से कई गुना अच्छी है, स्वस्थ निरोगी है, तुलनात्मक ज्यादा उत्पादन दें रही है, कोई अमेरिकन गुलाबी सुंडी ( American pink boll worm) से प्रादुर्भूत नहीं है, कोई बिमारियां नहीं है, हरी-भरी बोंडियों bolls लदी खडी है,शिवार फेरी में माने हमारे जन आंदोलन के द्वारा आयोजित किसानों के खेती पर्यटन यात्रा में हजारों किसान यह सुभाष पालेकर कृषि का चमत्कार देखते हैं।
इस स्थिति में हमारा सारे कृषि वैज्ञानिकों को, सरकारों को, किसानों को, समाजसेवी संस्थाओं को और प्रसार माध्यमों को खड़ा सवाल है कि अगर न्यूनतम लागत वाले सुभाष पालेकर कृषि में देशी बीजों से यां चयनित बीजों से बोई खडी फसल पड़ोस के अधिकाधिक लागत मूल्य होने वाले रासायनिक बी टी जन्नूक रोपित कपास फसल से समान यां ज्यादा उत्पादन देती है, उसपर कोई अमेरिकन गुलाबी सुंडी American pink boll worm नहीं है, बिमारियां नहीं है, तब हम जन्नूक रोपित बी टी कपास या सरसों के बीजों को क्यों खरीदें और उन्हें क्यों लगायें?
दुसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि बी टी कपास के पौधों में अब बी टी जन्नूक बोलगार्ड प्रोटीन का विरोध हो रहा है, अब अमेरिकन गुलाबी सुंडी कीटनाशक दवाओं को साथ नहीं दे रहीं हैं, कितने भी अधिकाधिक जहरीले कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करें, उनका इस अमेरिकी गुलाबी सुंडी American pink boll worm पर कुछ भी प्रभाव नहीं पड़ रहा है, उनका नियंत्रण असंभव हो गया है। क्यों कि इस अमेरिकन गुलाबी सुंडी ने अपने शरीर में इन जहरीले कीटनाशक दवाओं के विरोध में और रोपित बीटी जन्नूक के विरोध में प्रतिरोधक क्षमता का निर्माण किया है। क्यों कि उन्हें भी जीना है, मरना नहीं है। परिणाम स्वरूप, कपास का वैश्विक उत्पादन लगातार घट रहा है, वैश्विक मंडी में और भारतीय मंडी में भी कपास के दाम बढ रहें हैं। इस वास्तविकता को अब कृषि वैज्ञानिकों ने भी स्वीकार करना चाहिए। इस वास्तविक स्थिति को नई दिल्ली स्थित हरित क्रांति के सरसेनापती भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद Indian Council of Agriculture Research ICAR ने अधिकृत स्वीकार किया है। इसी आय सी ए आर द्वारा सन 1961 में प्रकाशित एक अंग्रेजी किताब Handbook of Agriculture के छटे आवृत्ति में पेज़ नंबर 1512 में लिखा है कि ...The genetically modified plants approved for cultivation express one or more of the following basic phenotypic characteristics like delayed fruit ripening, fertility restoration, herbicide tolerance, insect resistance,male sterility ,modified colour, modified oil,virus resistance etc.
ईस का हिंदी अनुवाद है ... किसानों को लगाने के लिए दिये जन्नूक रोपित बी टी कपास के फसल में कम अधिक मूलभूत ऋतु जैविकी phenotypic गुणधर्मों की निर्मिती होती है,जैसे देरी से होने वाली फल पक्वता, जहरीले कीटनाशक दवाओं के विरोध में प्रतिरोधक क्षमता, जहरीले खरपतवार दवाओं के विरोध में प्रतिरोधक क्षमता, उर्वरा शक्ति मे अनुर्वरता, नर नंपुसकता male sterility, रंग में बदलाव,तेल के गुणधर्मों में बदलाव, विषाणुओं के विरोध में प्रतिरोधक क्षमता virus resistance, आदि हानिकारक गुणधर्म पैदा हो सकतें हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद मेरे दावे की वैज्ञानिक पुष्टि करती है। इसका अर्थ यह है कि अब कोई भी जन्नूक रोपित बी टी कपास या सरसों की फसलें किसानों को बहुत बड़े ख़तरे में और अनसुलझे समस्याओं के चक्रव्यूह में फंसा रही है, जिसमें से बाहर निकल आने का रास्ता समाधान भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पास नहीं है और किसी भी रेन्विक जैव वैज्ञानिकों molecular biologist scientist के पास नहीं है। लेकिन सुभाष पालेकर कृषि के पास इस चक्रव्यूह में से बाहर निकल आने का ठोस उपाय जरूर है। आप आकर प्रत्यक्ष देख सकते हैं।
हमारा जन्नूक रोपित बी टी GM बीजों को विकसित करने वाले विदेशी जन्नूक अभियांत्रिकी तकनीक के प्रति कट्टर विरोध होने का और एक कारण यह है कि ये कृषि वैज्ञानिक जो दावा करते हैं कि संकर बीज और बीटी जी एम GM बीज देशी बीजों से ज्यादा उत्पादन देते हैं और अधिक मुनाफा देते हैं, यह उनका दावा शतप्रतिशत असत्य झूठ हैं, दुनिया को गुमराह करने वाला है। यह उनका दावा सच है या झूठ, इसकी तुलनात्मक वैज्ञानिक जांच मैंने अनुसंधानात्मक प्रयोग करके कियी।
मैंने एक भूखंड में देशी कपास के बीज बोये, पड़ोसी दुसरे भूखंड में संकर और बीटी कपास के बीज बोये। दोनों फसलों को कुछ भी खाद माने गोबर खाद, रासायनिक खाद, कंपोस्ट खाद, वर्मी कंपोस्ट खाद, खल्लियां पंचगव्य, बायोडायनैमिक खाद और अन्य खाद नहीं डाले, सिंचाई भी नहीं कियी, किसी भी दवा का छिड़काव नहीं किया, उसे जीवामृत घनजीवामृत भी नहीं दिया, कुछ भी नहीं डाला, सिर्फ बीज बोया, खरपतवारों का नियंत्रण गुडाई निराई से किया और हर दिन फसल का निरीक्षण किया।
उसी समय दुसरे एक आधे भूखंड में देशी कपास के बीज बोये, और शेष आधे भूखंड में संकर और बीटी कपास के बीज बोये। दोनों फसलों को कृषि वैज्ञानिकों ने जो प्रति एकड़ मात्रा बताई उसी मात्रा में रासायनिक खाद डाले और कीटनाशक दवाओं का छिड़काव किया, खरपतवार नाशक दवाओं का उपयोग किया। सिंचाई नहीं कियी, हर दिन फसल का निरीक्षण किया।
मेरे द्वारा किए प्रयोग विधि के निष्कर्ष बताते हैं कि जिस देशी कपास को कोई भी खाद नहीं डाले थे, दवां का छिड़काव नहीं किया था और सिंचाई नहीं कियी थी, वहां मुझे प्रति एकड़ तीन क्विंटल कपास की उपज मिली। लेकिन उसी समय जिस संकर और बीटी कपास को कोई भी खाद नहीं डाले थे, किसी भी दवाओं का छिड़काव नहीं किया था और सिंचाई नहीं कियी थी, उस में मुझे प्रति एकड़ सिर्फ दो क्विंटल कपास की उपज मिली। माने यह सत्य सामने आया है कि संकर और बीटी कपास फसल की उपज देशी कपास फसल से एक तिहाई कम मिली। क्यों? अगर कृषि वैज्ञानिक दावा करते हैं कि संकर और बीटी कपास फसल की उपज देशी कपास से ज्यादा मिलती है, वैसे आनुवंशिक गुणधर्म उसमें होते हैं,तब मिलना चाहिए। लेकिन ज्यादा नहीं मिली, उल्टा कम मिली। इस से वैज्ञानिक कसौटियों पर यह सिद्ध होता है कि संकर बीज और बीटी कपास फसल मे देशी कपास फसल से अधिक उत्पादन देने की आनुवंशिक क्षमता नहीं है। कृषि वैज्ञानिक झूठ दावा करते हैं।
लेकिन, दुसरे अनुसंधानात्मक प्रयोग में मुझे मालूम पड़ा कि जब मैंने देशी कपास फसल और संकर एवं बीटी कपास फसल को दोनों को समान मात्रा में रासायनिक खाद डालें और कीटनाशक दवाओं का छिड़काव किया, खरपतवार नाशक दवाओं का उपयोग किया,तब संकर और बीटी कपास फसल ने देशी कपास के फसल से ज्यादा उत्पादन दिया । माने जब रासायनिक खाद नहीं डाले तब बीटी कपास ने देशी कपास से कम उत्पादन दिया, और जब रासायनिक खाद डाले तब ज्यादा उत्पादन दिया। इसका अर्थ यह है कि देशी कपास के तुलनामे संकर और बीटी कपास फसल के द्वारा मिली अधिक उपज वास्तव में यह उन संकर बीजों का यां बीटी कपास बीजों के आनुवंशिक गुणधर्म का परिणाम नहीं है, यह परिणाम रासायनिक खाद का है, कीटनाशक दवाओं के छिड़काव का है। माने संकर कपास और बीटी कपास की देशी कपास से ज्यादा उत्पादन सिर्फ रासायनिक खाद डालने के बाद और कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करने से मिलता है, नहीं तो मिलती नहीं। अर्थात अब यह सिद्ध होता है कि महंगे संकर बीज और जन्नूक रोपित बी टी बीज बोना माने अधिकाधिक उत्पादन मिलने के लालच दिखाकर किसानों को बैंकों से और साहुकारों से कर्ज लेकर महंगे संकर बीज और बीटी कपास बीजों को , महंगे रासायनिक खादों को, महंगे जहरीले कीटनाशक दवाओं को, महंगे खरपतवार नाशक दवाओं को खरीदने के लिए जबरन बाद्य करना, उन्हें कर्ज के पहाड़ के निचे रौंदना और अंतमे आत्महत्या करने के लिए अथवा गांव छोड़कर शहरों के तरफ़ भागने के लिए उन्हें विवश करना। अर्थात हरित क्रांति के द्वारा पुरस्कृत संकर बीज और बीटी कपास बीज एक पूर्व निर्धारित भयावह चक्रव्यूह है , जिसमें से बाहर निकलने का एक ही वैज्ञानिक आध्यात्मिक अहिंसक संवैधानिक मार्ग है..... सुभाष पालेकर कृषि SPK. अगर अन्य कोई वैज्ञानिक आध्यात्मिक अहिंसक संवैधानिक मार्ग किसी के पास है तो हम उसे माॅडेल के रूप में देखकर स्वागत करेंगे
धन्यवाद,
आपके सकारात्मक रचनात्मक सृजनात्मक और नकारात्मक दोनों तरह की प्रतिक्रिया की राह देख रहा हूं, हार्दिक स्वागत है। कृपया इस पोस्ट को सर्वत्र फारवर्ड किजिएगा।
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