लेख- अश्विनी कुमार उपाध्याय

 विश्व का सबसे बड़ा झूठ यह है कि सिंधु से हिंदू और हिंदू से हिंदुस्तान बना. सच्चाई यह है कि हिंदू का उल्लेख वेद में है।


"ऋग्वेद" के "ब्रहस्पति अग्यम" में हिंदू शब्द का उल्लेख है:-


हिमालयं समारभ्य, यावद् इन्दुसरोवरं ।

तं देवनिर्मितं देशं, हिन्दुस्थानं प्रचक्षते ।


अर्थात : हिमालय से इंदु सरोवर तक देव निर्मित देश को हिंदुस्तान कहते हैं।


वेद में ही नहीं बल्कि शैव ग्रंथ में भी हिंदू शब्द का उल्लेख है:

 

हीनं च दूष्यतेव् हिन्दुरित्युच्च ते प्रिये।


अर्थात जो अज्ञानता हीनता का त्याग करे उसे हिंदू कहते हैं


"कल्पद्रुम" में लिखा है : हीनं दुष्यति इति हिन्दूः ।


अर्थात जो अज्ञानता और हीनता का त्याग करे वह हिंदू हैं


"पारिजात हरण" में लिखा है :


हिनस्ति तपसा पापां दैहिकां दुष्टं ।

हेतिभिः श्त्रुवर्गं च स हिन्दुर्भिधियते ।


अर्थात जो अपने तप से शत्रुओं और दुष्टों का नाश करे वह हिंदू है ।


"माधव दिग्विजय " में लिखा है :

ओंकारमन्त्रमूलाढ्य पुनर्जन्म द्रढ़ाश्य: ।

गौभक्तो भारत: गरुर्हिन्दुर्हिंसन दूषकः ।


अर्थात जो "ओमकार" को ईश्वरीय धुन माने, कर्मों पर विश्वास करे, गौ-पालन करे तथा बुराइयों से दूर रहे, वह हिंदू है ।


ऋगवेद (8:2:41) में हिंदू नाम के बहुत ही पराक्रमी और दानी राजा का वर्णन है जिन्होंने 46,000 गौमाता दान में दी थी।


ऋग्वेद मंडल में लिखा है:


बुराइयों को दूर करने के लिए सतत प्रयासरत, सनातन धर्म के पोषक और पालक हिंदू हैं।


हीनं दुष्यति इति हिंदू: अर्थात जो अज्ञानता और हीनता का त्याग करे उसे हिंदू कहते हैं।


धर्म की जय हो, अधर्म का नाश हो,

प्राणियों में सद्भावना हो, विश्व का कल्याण हो


वंदेमातरम, भारत माता की जय


अश्विनी उपाध्याय

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