17 September

 पद्मश्री डॉ सुभाष पालेकर

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ता 17 सितंबर 2023

साथियों और बहनों,

प्राचीन भारतीय गोवंश केंद्रित संस्कृति अब नकली बुद्धिमत्ता संचालित स्वयंचालित यंत्र (artificial intelligence guided automatic robot machine )

केंद्रित विकृति बन गई है। मानवी संसाधनों को आधार देने के लिए आई यह भस्मासुर यांत्रिक मानवी संस्कृति अब ईश्वर देय असीमित सृजनशील कुशल मानवी संसाधनों की जगह लेकर पुंजी केंद्रित साहुकारी पाश्चात्य अप्राकृतिक अवैज्ञानिक शोषणकारी अर्थ विचारों को पुरे दुनिया पर प्रस्थापित करने हेतु मानव के नवनिर्माण करने के सृजनात्मक कौशल एवं सर्वश्रेष्ठ प्रज्ञा को नष्ट करने की ओर तेजी से अग्रसर हो रही है। यह संकट वैश्विक तापमान वृद्धि और जल वायु परिवर्तन से भी भयावह है। अगर इसको रोका नहीं गया तो मानवी सभ्यता की जगह यांत्रिक सभ्यता लेकर मानवी सभ्यता को सदा के लिए लुप्त होने की संभावना को नकारा नहीं जा सकता। इस महाभयावह संकट को रोकने का कार्य सिर्फ वह जन आंदोलन कर सकता है,जो जाती पंथ धर्म राजनीति और विचारधारा से उप्पर उठकर भारतीय बौद्धिक संपदा को एकत्रित लाकर उसे इस दिशा में कार्यान्वित करेगा। हमारी भावी पीढ़ी इसकी बेसब्री से इंतजार कर रही है।

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