How effective is customer service?
ग्राहक सेवा कितनी कारगर है?
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने कहा था- ग्राहक हमारे परिसर में आनेवाला सबसे महत्वपूर्ण अतिथि है। वह हम पर निर्भर नहीं है। हम उस पर निर्भर हैं। वह हमारे कार्यों में बाधा नहीं है। वह इसका हिस्सा है।
हम उसे सेवा देकर कोई लाभ नहीं दे रहे हैं। वह हमें ऐसा करने का अवसर देकर हमें लाभ दे रहा है।
आरबीआई द्वारा बैंकों को यह निर्देश जारी किया गया है कि वे हर 6 महिने में एक बार बोर्ड की बैठक में अपना समय दें, और ग्राहक सेवा की समीक्षा करें।
2009 में किए गए 860 से अधिक कार्यालयों के एक अध्ययन से पता चलता है कि इनमें से केवल 39 फीसदी यह मानते हैं कि उनके कर्मचारियों के पास ग्राहकों की समस्याएं सुलझाने के लिए उपकरण और प्राधिकार उपलब्ध हैं।
गौरतलब है कि कई निजी क्षेत्रों की कंपनियां जहां अपने ग्राहकों की समस्याओं को सुलझाने के लिए लगातार प्रयासरत् दिखती रही हैं। वहीं इन क्षेत्रों में कई ऐसी कंपनियों का नाम भी आता है, जो लगातार अपने ग्राहकों पर ध्यान न देते हुए, और उन्हें परेशान करती या ठगती भी रही हैं।
इनमें टेलिकॉम, बैकिंग और कई इलेक्ट्रॉनिक क्षेत्रों की कंपनियां भी हैं, जिनके उपर लगातार यह आरोप लगता रहा है। कि ये अपने ग्राहकों पर ध्यान नहीं दे रही हैं, या फिर जानबूझकर हीं उन्हें ठग भी रही हैं।
वहीं कई सरकारी संस्थानों पर भी यह आरोप लगते रहा है कि वे अपने ग्राहकों की उपेक्षा करती हैं, एवं उनकी सुविधाओं पर अपना ध्यान नहीं देती हैं।
आज सरकारी-गैरसरकारी या निजी किसी भी क्षेत्रों की संस्थानों को हम देख लें मगर इन सभी क्षेत्रों में अब वैसी संस्थानों की संख्या भी बढ़ने लगी हैं।
जिन संस्थानों के उपर अपने ग्राहकों पर ध्यान नहीं देने का आरोप लगातार बढ़ते जा रहा है।
हालाकि इन सभी हालातों से निपटने के लिए हीं हमारे देश में भी इन सभी संस्थानों के अंतर्गत और इन संस्थानों के अलावा अन्य ग्राहक सेवा भी कार्यरत हैं।
परंतु ऐसे में सवाल यह भी उठता है कि फिर ये ग्राहक सेवा भी हमारे देश में कितनी कारगर है ? क्योंकि जिन सभी समस्याओं का निपटारा ग्राहक सेवा के अंतर्गत हीं हो जाना चाहिए था।
अब ऐसे समस्याओं के निपटारे के लिए भी ग्राहक अब अदालतों के चक्कर काटते देखे जा सकते हैं। और यहीं नहीं ऐसे लोगों की संख्या में लगातार अब वृद्धि भी होती जा रही है।
जो एक उपभोक्ता या ग्राहक के रूप में इन संस्थानों के ठगी का शिकार हो रहे हैं। और फिर ये ग्राहक अपने समस्या के मामले में इन संस्थानों के अंतर्गत या इसके बाहर के भी किसी ग्राहक सेवा से।
किसी भी तरह का कोई खास मदद ना मिल पाने की वजह से, अब वे इन सभी मामलों में अंततः अदालतों का हीं सहारा भी ले रहे हैं।
जो बात अब इन सभी ग्राहक सेवाओं के लिए एक बहुत बड़ी प्रश्नचिन्ह भी बनता जा रही है।
अपने उपर खड़े हुए इस प्रश्नचिन्ह पर अब स्वयं ग्राहक सेवा को भी विचार करने की जरूरत है, तभी इसके आगे भी ग्राहक सेवा की विश्वसनियता बरकरार रखी जा सकेगी।
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