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 पद्मश्री डॉ सुभाष पालेकर

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ता 17 अगस्त 2023


विषय ..जहर मुक्त, पोषण मुल्यों से संपृक्त एवम औषधि शुद्ध शाकाहार ही मानव की सर्वश्रेष्ठ सर्वोत्तम दवां है।


साथियों और बहनों,

हमारे रक्त का अम्ल विम्ल निर्देशांक PH value 7.4 है, माने हमारा रक्त विम्ल धर्मी alkaline है, अम्ल धर्मी acidic नहीं है। इसका अर्थ है कि हमारे रक्त को सिर्फ विम्ल धर्मी भोजन चाहिए, अम्ल धर्मी acidic भोजन बिल्कुल नहीं चाहिए। हमारे रक्त का दैनंदिन कार्य होता है हमारे शरीर के साठ लाख करोड़ ( 60 trillion) कोशिकाओं को रोज प्राण शक्ति Vital power, अच्छे जीवाणू good bacteria, किण्वक माने एंजाइम्स enzymes, खनिज तत्व minerals, जीवनसत्त्व vitamins, प्राणवायु oxygen, हजारों वनस्पति जन्य रसायन phyto chemicals, प्रथिन माने प्रोटीन, स्निग्धांश माने फैट fat, कर्बोदके carbohydrates और अन्य महत्वपूर्ण तत्वों की आपूर्ति करना। इन कूल साठ लाख करोड़ कोशिकाओं में 70 % कोशिकाएं अंतरजात रोग प्रतिरोधक क्षमता innate immunity देने वाली कोशिकाएं होती है जो ईश्वर ने हमारे जन्म के समय हमें अनमोल भेंट के रूप में दियी होती है, जो हमें कर्क रोग cancer, मधुमेह diabetes, उच्च रक्तचाप high blood pressure, कोरोना, दिल की धड़कन रुक जाना heart failure जैसे जानलेवा बिमारियों से मुक्त रखती है। हमारे रक्त में ईश्वर ने ऐसी अद्भुत व्यवस्था खडी कियी है, जिससे हमारे रक्त में रक्त की गुठलियां नहीं बनती और हमें उच्च रक्तचाप या हार्ट अटैक नहीं होता, शर्करा नियंत्रक व्यवस्था होने से मधुमेह diabetes नही होता। हमारे विम्ल धर्मी रक्त को सिर्फ विम्ल धर्मी alkaline भोजन चाहिए, अम्ल धर्मी acidic भोजन बिल्कुल नहीं चाहिए। 

      अगर हम अम्ल धर्मी भोजन खाते हैं, तब हमारा रक्त अम्ल धर्मी acidic बन जाता है। अब रक्त जी जान से उसकी अम्लता acidity को घटाकर रक्त को दोबारा विम्ल बनाने की कोशिश करता है, इस के लिए उसे बड़ी मात्रा में कैल्शियम की, अच्छे जीवाणू की और एंजाइम की आवश्यकता होती है। यह कैल्शियम को रक्त हमारे हड्डियों में से और दांतों में से लेता है, परिणाम स्वरूप हड्डियों में छेद निर्माण होते हैं, जिससे हमें गंभीर अस्थि छेद osteoporosis, अस्थि संधी शोथ osteo arthritis यह बिमारी होती है, जो आगे बढ़कर हड्डियों का कैंसर तक पहुंचता है, दांत कमजोर बनते हैं, गिरते हैं, दंत रोग होते हैं और गली गली में डेंटल हाॅसपीटल खड़े होते हैं। रक्त की एसिडिटी अम्लता को घटाने के लिए अपना अपना दैनंदिन काम छोड़कर आपतकाल में बुलाये अच्छे जीवाणू और एंजाइम इस कार्य में लग जाने से हमारे शरीर के सभी महत्वपूर्ण इंद्रियों के कोशिकाओं के व्यवहार में रुकावटें पैदा होती है, परिणाम स्वरूप, इंद्रिय बुरे जीवाणू bad bacteria के शिकार बनकर बिमारियों को निमंत्रण मिलता है। 

     हमारे शरीर को सिर्फ विम्ल धर्मी जहर मुक्त पोषण मुल्यों से संपृक्त एवम औषधि शुद्ध शाकाहारी भोजन चाहिए, तब हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता बलवान रहती है, जो हमें जानलेवा बिमारियों से बचाती है। ये विम्ल धर्मी भोजन पदार्थ है... सुभाष पालेकर कृषि में पैदा सभी ज़हर मुक्त और पांच प्रतिशत से लेकर सोला प्रतिशत तंतू पदार्थ माने फायबर होने वाले, ग्लुटेन मुक्त विम्ल धर्मी देशी मिलेटस ( जवार, बाजरा,मंडुआ finger millet, झंगोरा Barn yard millet, कांगनी Fox tail millet, कुटकी little millet, कोदरा Kodo Millet, बर्री चीना Proso Millet, कोराले मकरा Brown Top Millet,और राजगीरा Amaranthus cruentus, ज़हर मुक्त दाले, ज़हर मुक्त तिलहन से लकड़ी के तेल घानी से निकाला पोषणयुक्त औषधि सुगंधित गाढा खाद्य तेल, ज़हर मुक्त गन्ने से सिर्फ भिंडी का रस और चुने का उपयोग करके छोटे गूड निर्मिती गृह उद्योग में निर्मित ज़हर मुक्त पोषण मुल्यों से संपृक्त एवम औषधि गूड, ज़हर मुक्त मसाले, ज़हर मुक्त देशी सब्जियां, ज़हर मुक्त मौसमी फल, सलाद की हरी सब्जियां और कंद। 

      इसके विपरित, गेंहू और सफेद चावल अम्ल धर्मी है, उनमें फायबर नाम मात्र ( गेहूं में सिर्फ 1.2 %, सफेद चावल में सिर्फ 0.2% ) होता है, जो वास्तव में 3.6 % चाहिए, गेहूं में खतरनाक ग्लुटेन होता है, इसलिए इन दोनों को भोजन में उपयोग में नहीं लाना है।सगी मां का दूध छोड़कर किसी भी प्राणी का ( गोमाता, भैंस,बकरी,ऊंटनी) दूध दही घी पनीर पंचगव्य मिठाइयां अम्ल धर्मी acidic है, इसलिए हमारे स्वास्थ्य के लिए धोकादायक है।नहीं पीना है, नहीं खाना हैं। ईश्वर निर्मित व्यवस्था में मानव छोड़कर अन्य कोई भी प्राणी अपने सगी मां का दूध छोड़कर किसी अन्य किसी भी प्राणी का दूध नहीं पीता, अर्थात यह ईश्वरीय कानून हैं, आध्यात्म है। दूध दही घी पनीर पंचगव्य मिठाइयां शहद ये सारे खाद्य पदार्थ शाकाहारी भोजन नहीं है, मांसाहारी भी नहीं है, मिश्र आहारी है और ईश्वर निर्मित व्यवस्था में मिश्र आहारी प्राणी अस्तित्व में नहीं है। शाकाहार माने वनस्पति जन्य आहार। गोमाता भैंस बकरी ऊंटनी वनस्पति नहीं है, प्राणी है। तब वह शाकाहार कैसे हो सकता है? मैं इनका उपयोग नहीं करता, क्यों कि मैं ईश्वर निर्मित शुद्ध शाकाहारी हूं। बाजार से खरीदकर लाई सफेद शक्कर अम्ल धर्मी acidic है, उसमें सिर्फ कर्बोदके carbohydrates होते हैं, पोषण मूल्य बिल्कुल नहीं होते, बिमारियों को निमंत्रण देती है। नहीं खाना हैं। बडी यांत्रिक तेल घाणी में अनेक रसायनों का उपयोग करके, उसमे से पोषण तत्वों को प्राकृतिक रंग और स्वाद को निकालकर पैदा किया पतला खाद्य तेल अम्ल धर्मी है, बिमारियों को निमंत्रण देता है। रासायनिक खेती से पैदा सभी दालें, खाद्य तेल, सब्जियां, फल , हरी सब्जियां,कंद ,अनाज , मैदा, बिस्कुट, पास्ता, तलें पदार्थ, आईसक्रीम, डबलरोटी अम्ल धर्मी है, नहीं खाना हैं। मांसाहार अम्ल धर्मी अप्राकृतिक अवैज्ञानिक नास्तिक है और बिमारियों को निमंत्रण देने वाला है, नहीं खाना हैं। 

    जब हम‌ ये सब अम्ल धर्मी acidic , जहरीले, अप्राकृतिक अवैज्ञानिक मानव द्वारा रसायनों से synthetic संस्कारित भोजन खाते हैं और अप्राकृतिक अवैज्ञानिक ऐलोपैथिक दवां खाते हैं, तब हमारा शरीर रक्त इन्हें स्वीकार नहीं करता है, परिणाम स्वरूप इनके अवशेष जहरीले कुडे toxic garbage के रुप हमारे शरीर के कोशिकाओं में संग्रहित हो जाते हैं। अगर इनका निरविषीकरण detoxification करना संभव नहीं हुआ, तब इस स्थिति में यह ज़हरीला कुडा रोग-प्रतिरोधक क्षमता होने वाले कोशिकाओं को ( white blood cells सफेद रक्त कोशिकाएं, टी लिम्फोसाइट कोशिकाएं, बी लिम्फोसाइट कोशिकाएं, मैकझोफील न्यूट्रोफिल कोशिकाएं) , अच्छे जीवाणू को, एंजाइम को नष्ट करता है, प्राण ऊर्जा के आपूर्ति को रोकता है, जिससे हमारी ईश्वर देय रोग प्रतिरोधक क्षमता  innate immunity कमजोर बनती है, परिणाम स्वरूप हमें ये सारी जानलेवा बिमारियां घेर लेती है और हमें मृत्यु के बाहु में ढकेलकर मोक्ष प्राप्ति देती है। 

     प्रकृति में इतना विशाल शरीर वाला बाहुबली शक्तिमान हाथी, शुद्ध शाकाहारी हैं सिर्फ घास खाता है, दूध दही घी पनीर पंचगव्य मिठाइयां शहद नहीं खाता, ऐलोपैथिक दवां नहीं लेता, फिर भी बिमारियों से मुक्त हैं, किसी भी पोषण तत्वों की कमी उसके शरीर में नहीं है, स्वस्थ निरोगी बलवान है। इसका सुस्पष्ट अर्थ है कि उसके अथवा शुद्ध शाकाहारी मानव के शरीर को जीन‌ जिन पोषण मुल्यों की और औषधि मुल्यों की आवश्यकता है, वह सभी उसे शुद्ध वनस्पति जन्य ज़हर मुक्त पोषण मुल्यों से संपृक्त एवम औषधि शुद्ध शाकाहार से मिल जाते हैं, मांसाहार खाने की और दवां लेने की कोई आवश्यकता नहीं है। क्यों कि  सुभाष पालेकर कृषि से पैदा जहर मुक्त, पोषण मुल्यों से संपृक्त एवम औषधि शुद्ध शाकाहार ही हमारी सर्वश्रेष्ठ दवां है। धन्यवाद

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