Who am I
हमें अपने आप को क्यों पहचानना चाहिए ।
किसी इंसान को जब कोई महान कार्य करना हो तो उसको स्वयं अकेला हीं बढ़ना पड़ता है। जैसे- एक रॉकेट को अपने लक्ष्य पर बढ़ने के लिए अपना बहुत ज्यादा इंधन पृथ्वी के गुरूत्वाकर्षण बल को पार करने में खर्च करना होता है, वैसे हीं हमें भी अपने बड़े लक्ष्य पर बढ़ने के लिए अपने अंदर के ऊर्जा को बिल्कुल संतुलित रुप से संचित करते अपने मन में बैठे जड़ता को मिटाते हुए आगे बढ़ना होता है। जड़ता का अर्थ यहां पर यह है कि जब हमें किसी महान लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आगे बढ़ना होता है, तब हमारे अंदर पहले से बैठे हूवे दूर्गुण हमें अपने माया-मोह के जाल में फँसाने का प्रयास भी करते हैं। क्योंकि पहले से हम भी इन्हीं सभी दूर्गुणों में फँसे एक सामान्य मनुष्य हीं रहते हैं। अतः जब हम अपने लिए कोई महान लक्ष्य चुनते हैं - तब हमे भी अपने इस महान लक्ष्य की क़ीमत कई मायनों में पत्ता नहीं होती है। इसीलिए तब हम स्वयं हीं अपने इस महान लक्ष्य के वास्तविक क़ीमत या कर्म को कई मायनों में अलग भी महसूस करने लग जाते हैं। ऐसा इसलिए भी होता है-क्योंकि इस अवस्था में हम सब कुछ नया हीं कर रहे होते हैं। इसलिए इस नये कार्य में हमें अपना पहला अनुभव खूद ब खूद छोटा या बहुत बार तो गलत भी लगने लगता है। हमारा पहला अनुभव हमारे पहले कार्य के अनुरूप होता है। अतः जब हम कोई महान कार्य करने की ठानते हैं, तब हमारा पहला अनुभव उस महान कार्य के अनुरुप स्वयं हमें पर्याप्त मालूम नहीं पड़ता है। हमें अपने अनुभव के आधार पर अपने ज्ञान को बढ़ाते हुए अपना कर्म भी सही तरीके का करना होता है। ऐसे समय में हमें अपनी जड़ता व दोष को भी पुनःऔर पुनः मिटाते रहने की आवश्यकता होती है। तभी हम अपने किसी महान लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा की ओर बढ़ पाते हैं। अन्यथा लक्ष्य के अनुरूप अपने जड़ता को समाप्त ना कर पाना हीं हमारे नाकामयाबी का एक बड़ा कारण भी बन जाता है। एक सामान्य मनुष्य काम,क्रोध,माया- मोह के जाल में फँसा रह जाता है। वहीं एक विशेष मनुष्य अपने आप को पहचान कर स्वयं से इन सभी जड़ताओं का त्याग करके और अपनी शक्ति को संचित कर अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने की एक सीढ़ी बना लेता है। इस तरह यह सब करके जब एक व्यक्ति अपने आप को अपने लक्ष्य के अनुरूप ढ़ाल लेता है तब वह अपने लक्ष्य पर स्वतः हीं बढ़ते चला जाता है। तथा महान लक्ष्य की प्राप्ति के कारण स्वयं भी महान कहा जाता है।
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