Forty Years Plan फ़ोर्टी ईयर्स प्लान (Romantic & Social Awareness Drama)
फ़ोर्टी ईयर्स प्लान
यह कहानी एक ऐसे भोलेभाले व्यक्ति की कहानी है, जो अपनी पत्नी से बहुत प्यार करता है। लेकिन उसकी पत्नी इस व्यक्ति की ज़रा भी इज़्ज़त नहीं करती है। क्योंकि उसके पत्नी की नज़रों में इस व्यक्ति को इतनी भी अक्ल नहीं रहती है कि जिससे वह स्वयं अपना हित भी कभी समझ सके। इस व्यक्ति की पत्नी एक कमाऊ पत्नी है। इसलिए वह इसके ऊपर हमेशा रोबदाब हीं चलाती रहती है। इसीलिए धीरे-धीरे यह व्यक्ति अपनी पत्नी की रोबदाब सहते हुए अपनी पत्नी के साथसाथ उसकी और सभी साथियों और सहेलियों का भी रोब-दाब सहन करने का भी अभ्यस्त होते जाता है। इसी क्रम में वह समाज में सबके मज़ाक का पात्र भी बनते चला जाता है। आसपास के लोग उसके साथ इस तरह का व्यवहार भी करने लगते हैं जैसे वह भोला भाला व्यक्ति कोई नामर्द व्यक्ति भी हो। लेकिन जब उसे यह नामर्द व्यक्ति समझने वाली व्यवहार स्वयं उसकी पत्नी भी करने लगती है। तब उस समय से उसकी पत्नी फिर भी उसे अपना पति तो मानती है, परंतु वह उसके साथ कभी भी शारीरिक संबंध स्थापित करना नहीं चाहती है। तथा इसी क्रम में लोगों की बातों में आकर इस भोले-भाले व्यक्ति की पत्नी इसके कई खूबियों को भी बिल्कुल नज़रअंदाज करने लग जाती है। उसकी पत्नी हमेशा इस गम में रहने लगती है कि उसका पति उसके किसी काम का नहीं है। वह समझती है उसका पति एक नंबर का नकारा है। Historical वह अपने इस ग़म को भुलाने के लिए लोगों की बातों में आकर धीरे-धीरे स्वयं हीं शराब पीने की आदी भी होती चली जाती है। कई बार तो ऐसा भी होने लगता है कि उसके घर पर रातरात भर किटी पार्टी साथ-साथ शराब पीने वाली महिलाओं की जमघट लगते रहने के कारण वह स्वयं कई बार नौकरी पर भी नहीं जा पाती है। इस क्रम में एक ऐसा समय भी आ जाता है कि जब उसकी पत्नी लगातार पार्टी करने और शराब पीते रहने के कारण कई महिनों तक अपनी नौकरी पर नहीं जा पाती है। दूसरी तरफ यह व्यक्ति चूकि अपने पत्नी से स्वयं बहुत प्यार भी करता है इसलिए वह स्वयं उससे कुछ अच्छी बात कहने से भी डरने लगा होता है। इसलिए वह चाहकर भी अपने पत्नी से इस संबंध में कुछ अपना अच्छा राय भी उसे नहीं दे पाता है। इसी क्रम में वह भोलाभाला व्यक्ति एक दिन एक ऐसे व्यक्ति के संपर्क में भी आता है जो कि स्वयं को एक संन्यासी कहता है। वह कई व्यक्तियों को अपने आश्रम में आनंद पूर्व रहने की बात भी उससे कहता है। वह संन्यासी व्यक्ति फोर्टी ईयर्स प्लान पार्टी का संस्थापक होता है। तथा वह संन्यासी व्यक्ति जब उस भोलेभाले व्यक्ति से अपने पार्टी का प्लान बताता है तब यह भोलाभाला व्यक्ति उसकी बातों पर स्वयं इस तरह से विश्वास करने लग जाता है जैसे वास्तव में वह संन्यासी व्यक्ति इस भोलेभाले व्यक्ति के लिए कोई एक मसीहा भी बनकर आ गया हो। फिर इस भोलेभाले व्यक्ति का हमारे प्रचलित पारिवारिक सामाजिक व्यवस्था से तत्काल मोह भी भंग हो जाता है। एक तरफ इस भोलेभाले व्यक्ति की पत्नी सिर्फ लोगों की बातों में आकर, अपने पति की इज़्ज़त ना कर पाने की वज़ह से उसके प्रति बिल्कुल लापरवाह होती चली जाती है। तो वहीं दूसरी तरफ यह भोला व्यक्ति स्वयं भी एक संन्यासी की बातों में आकर अपनी पत्नी की बुरी आदतों के प्रति भी अब बिल्कुल बेपरवाह हो जाता है। तथा इसी क्रम में यह भोला भाला व्यक्ति जिस संन्यासी के संपर्क में आया रहता है उसका सबसे बड़ा तथा विश्वसनीय शिष्य भी दिखने लगता है। तभी इस भोलेभाले व्यक्ति को अपने संन्यासी गुरू के कहने पर एक दिन अचानक से अपना घर द्वार और सब कुछ छोड़कर भी तब उसी संन्यासी व्यक्ति के पास रहने के लिए भी जाना होता है। जहां रहने के दौरान इस भोलेभाले व्यक्ति के पूछने पर वह संन्यासी व्यक्ति तब उसे अपनी भी पूरी कहानी बताता है। जिसमें वह संन्यासी व्यक्ति उसे अपने जीवन में किये गए अपने सभी अच्छे और बुरे कर्मों से भी तब उसे अवगत कराता है। जिसकी बातों का इस भोलेभाले व्यक्ति के उपर फिर इस तरह से प्रभाव होता है कि तब वह फौरन हीं पुनः अपने घर भी लौटकर चला जाता है। जहां जाने पर तब उसकी पत्नी फिर से उसे इस बात के लिए भी डांटना शुरू कर देती है। ..कि वह इतने इतने दिनों तक कहां कहां रहता है, और अपनी जिम्मेवारियों को समझता क्यों नहीं है। इसी क्रम में यह व्यक्ति अपनी पत्नी को यह सारी घटना बताता है। तब वह फिर से इस बात के कारण भी अपने पति का और सभी लोगों के सामने भी मज़ाक बनाने लगती है। और वो तब भी इस बात के लिए भी स्वयं को ज़रा भी दोषी नहीं समझ पाती है। उसके बाद भी वह जब भी अपनी पत्नी के साथ कभी कभी शारीरिक संबंध स्थापित भी करना चाहता है। तब भी फिर से उसकी पत्नी उसके साथ शारीरिक संबंध स्थापित करने में उसका कभी साथ नहीं देती है। इस क्रम में वह बिल्कुल हीं किसी प्यासे मछली की तरह इस तरह के एक क्षणिक सुख के अभाव में छटपटाने लगता है। तथा इसी क्रम में तब इस भोलेभाले व्यक्ति को उस संन्यासी की बातों की भी फिर से याद आने लगती है। तब वह फिर से अचानक हीं अपना घर छोड़कर और उस संन्यासी के पास चला जाता है। जो संन्यासी व्यक्ति फोर्टी ईयर्स प्लान पार्टी का संस्थापक सदस्य भी रहता है। उसे अपने पास आते देखकर वह उसके उपर हंसता है। और कहता है.. । मुझे पता था कि तुम एक ना एक दिन मेरे पास लौटकर फिर आओगे। इसीलिए मैनें तुम्हें वापस जाने भी दिया। क्योंकि, तब तुम आज के इस प्रचलित पारिवारिक सामाजिक व्यवस्थाओं के मोह माया के जाल से निकलने का भले हीं दावा कर रहे थे। लेकिन तुम तब भी उस मोह माया के जाल से निकल नहीं पाए थे। इसलिए मैनें तुम्हें यह बात बताया था कि इस फोर्टी ईयर्स प्लान पार्टी का एक नियम यह भी होता है कि एक बार जो व्यक्ति इस पार्टी का सदस्य बन जाता है, उस व्यक्ति की सदस्यता भी कम से कम चालीस वर्षों तक की हो जाती है। तथा इस बीच उस व्यक्ति को इसी पार्टी के सारे व्यवस्था और नियमों के अंतर्गत स्वयं अपना जीवन भी लगातार कम से कम चालीस वर्षों तक जीना हीं होता है। लेकिन घर से लौटकर दुबारा इस आश्रम में आने के बाद जब वह भोलाभाला व्यक्ति फिर भी संन्यासी व्यक्ति द्वारा उसे अपने फोर्टी ईयर्स प्लान पार्टी के इसी व्यवस्था और नियमों के अंतर्गत स्वयं उसको भी औरों की तरह हीं फिर भी इसी तरह से जीवन जीने के लिए ज़रा भी बाध्य भी नहीं करता है। और ऐसा नियम रहते हुए भी वह संन्यासी व्यक्ति अपनी पार्टी में आए और किसी व्यक्ति को भी इसी नियम को मानने हेतु स्वयं कभी किसी और को भी बाध्य नहीं करता है। अपनी पार्टी के व्यवस्था और नियमों को लोगों की जरूरतों के हिसाब से स्वयं कई कई बार बदलते और लोगों की ज़रू़रतों के हिसाब से इस व्यवस्था में कुछ कुछ बातें जोड़ते भी रहता है। इसी क्रम में वह संन्यासी व्यक्ति अबकी बार इस भोलेभाले व्यक्ति को उसके पूछने पर अपनी पार्टी के एक और नियम से भी तब उसे परिचित करा देता है। जब वह संन्यासी व्यक्ति से अपने पत्नी के बारे में यह बात फिर बताता है। कि वह उसके चाहने के बावजूद भी कभी भी उसके साथ शारीरिक संबंध नहीं बनाती थी। तो पहली बार की तरह इस बार भी वह संन्यासी व्यक्ति इस भोलेभाले व्यक्ति को फिर अपने आश्रम में वह एक टोकन रखने का डिब्बा दिखाते हुए वह बात फिर से उसे बताता है, जो बात सुनकर वह भोलाभाला व्यक्ति पहली बार आश्रम छोड़कर और फिर अपने घर भी लौट गया था। लेकिन इस बार जब वह संन्यासी व्यक्ति आश्रम में उस भोलेभाले व्यक्ति को वह टोकन रखने वाला वहीं डब्बा दिखाकर फिर वह बात करता है कि वह जब भी चाहे तो इस टोकन वाले डिब्बे में अपने नाम के साथ इस पार्टी में मौजूद किसी भी दूसरी औरत के नाम का एक टोकन डालकर और तब उसके द्वारा डाले गए टोकन के साथ भी फिर अपना नाम मिलने पर उस औरत के साथ अपना शारीरिक संबंध भी बना सकता है। लेकिन इसके बाद तब वह चाहकर भी फिर कभी चालीस वर्ष से पहले कहीं और नहीं जा सकता है। मगर तब यह भोलाभाला व्यक्ति संन्यासी के इस बात से पहले की तरह दुःखी नहीं होता बल्कि खुश हो जाता है। अब वह आश्रम में मौजूद सभी औरतों को देखता है। और उनके नाम का टोकन डालते रहता है। तब भी जब उसके नाम का टोकन किसी दूसरी औरत के टोकन के साथ नहीं मिलता है। तब वह फिर बारी बारी से उन्हें इम्प्रेस करने की कोशिश भी करने लगता है। देखते हीं देखते जब कई दिन ऐसे हीं बीतने लगते है तब भी। इस भोला व्यक्ति के नाम के साथ किसी और औरत के नाम का टोकन फिर भी मैच नहीं करता है। जिससे निराश होकर वह फिर से अपने उस संन्यासी गुरू से मिलता है। और तब उसे भी इस घटना से अवगत करा देता है। फिर वह संन्यासी व्यक्ति उससे अपने बारे में भी जिक्र करते हुए कहता है कि उसके नाम के साथ तो आश्रम में रोज़ाना कई टोकन मैच करते हैं। मगर वह फिर भी कभी भी किसी के साथ भी अपना शारीरिक संबंध नहीं बनाता है। और ना हीं वह काम क्रिया को बच्चा पैदा करने के अलावा और भी कुछ समझता है। संन्यासी उस भोलेभाले व्यक्ति से यह भी बताता है कि वास्तव में ऊसे अब क्या करना चाहिए, और उसे स्वयं भी किस तरह से अपना जीवन जीना चाहिए। इसी क्रम में वह बताता है कि किसी को दुख और सुख भी कैसे हो सकता है। वह बताता है कि ऊसे किसी औरत के साथ शारीरिक संबंध बनाने का अवसर भी क्यों नहीं मिल पा रहा है। वह ऊसे बताता है कि हम जैसा सोचते हैं स्वयं भी वैसा हीं कैसे बन जाते हैं। और वह ऊसे यह भी बताता है कि अब ऊसे क्या करना चाहिए। फिर वह भोला भाला व्यक्ति अपने गुरू की बातों से इस तरह से प्रभावित होता है। कि वह भी अब अपने गुरू के तरह हीं बनने के बारे में सोचने लगता है। इसी क्रम में एक दिन इस भोले भाले व्यक्ति का गुरू वह संन्यासी व्यक्ति एक पार्टी का आयोजन करता है। जिस पार्टी में इस पार्टी के सभी मर्द और औरतों को एक साथ खाने पीने और डांस करने का मौका भी मिलता है। जिस पार्टी में इस पार्टी के संस्थापक सदस्य यानी संन्यासी गुरू के उपर इस पार्टी में उपस्थित सभी औरतों और मर्दों को भी फिदा होते हुए देखकर यह भोला भाला युवक स्वयं के बारे में भी अपने संन्यासी गुरू की तरह हीं सोचने लगता है। जब ऊसे यहीं सोचकर आँख बंद किये हुए हालत में नाचते हुए। एक औरत एकाएक ऊसे अपने पास देखती है। तब वह ऊसे अचानक से अपने गले से भी लगा लेती है। उससे अपने नाम का टोकन डालने के बारे में भी कहती है। मगर वह भोला भाला व्यक्ति अब इस तरह से समझदार हो चुका होता है, कि वह फिर भी ना हीं उस औरत के और ना हीं किसी और औरत के हीं नाम का टोकन भी डालता है। इस तरह से तब वह स्वयं भी अपने पार्टी के संस्थापक सदस्य यानि कि अपने संन्यासी गुरू के हीं रास्तों पर भी अब चलने लग जाता है। धीरे धीरे एक ऐसा वक्त भी आ जाता है। जब इस भोलेभाले व्यक्ति के नाम पर एक साथ कई कई टोकन भी गिरने लग जाते हैं। किसी किसी दिन तो ऐसा भी होता है कि उस दिन सारी की सारी महिलाओं के टोकन हीं, इसी भोले भाले और उसके गुरु संन्यासी व्यक्ति के नाम पर गिरने लग जाते हैं। मगर वह अपने संन्यासी गुरु की तरह हीं किसी के साथ अपना शारीरिक संबंध बनाने के बारे में अब सोचता तक भी नहीं है। इसी क्रम में एक दिन ऐसा भी आता है जब इस भोले भाले व्यक्ति के पार्टी के संस्थापक सदस्य यानी संन्यासी गुरू की मृत्यु हो जाती है। उस दिन अपने गुरू के मृत्यु से उदास होकर जब यह भोलाभाला व्यक्ति कुछ सोच रहा होता है तभी फोर्टी ईयर्स प्लान पार्टी के सभी सदस्य एक साथ इस भोलेभाले व्यक्ति के पास आते हैं। तब उनमें से एक महिला इसे उदासी की हालत में बैठे हुए देखकर और इस भोलेभाले व्यक्ति से अपने पार्टी के लोगों की बात बताते हुए कहती है। गुरू जी हम सभी लोगों ने मिलकर कल एक पार्टी का आयोजन किया है। और अब तो हमारे पार्टी के संस्थापक सदस्य और हमारे सबसे पहले गुरू जी इस दुनिया में तो रहे नहीं। इसलिए अब हम सभी लोगों ने मिलकर यह निर्णय लिया है। कि अब हमारे पहले गुरू जी के बाद आप हीं हमारे पार्टी की कमान भी संभालें। अब आप हीं हमारे गुरु और पार्टी के नेता भी हैं। फिर जब यह भोला भाला व्यक्ति अचानक से अपने बारे में इतनी बड़ी जिम्मेदारी की बात सुनता है। तो अपने पार्टी के इन सभी लोगों को ऐसा करने से मना भी करना चाहता है। परंतु तब भी ऊसे यह जिम्मेवारी संभालनी हीं पड़ जाती है। क्योंकि उन सबों की नज़रों में यहीं भोला भाला व्यक्ति इस पद के लिए सबसे उपयुक्त भी होता है। जो फोर्टी ईयर्स प्लान पार्टी के संस्थापक सदस्य और पहले संन्यासी गुरू की कुर्सी भी संभाल सकता है। इन सभी बातों का निर्णय इसी पार्टी के दौरान हीं हो जाता है। अपने गुरू की कुर्सी संभालने के बाद पार्टी के अकाउंट में इस भोलेभाले व्यक्ति को जितने रूपैयों का पता चलता है। इस बात को जानकर तब ये बिल्कुल आश्यर्यचकित भी हो जाता है। वह फौरन हीं यह बात अपने पार्टी के और सभी सदस्यों को भी बताता है। इसी क्रम में सर्वसम्मति से यह भी निर्णय हो जाता है कि अब आश्रम में हर रोज रात में कम से कम चार घंटे लगातार सिर्फ पार्टी हीं पार्टी चलेगी। जिस क्रम में एक दिन ऐसा भी आता है जब अपने दोस्तों से इस पार्टी की चर्चा सुनकर। इस भोलेभाले व्यक्ति की पत्नी भी अपने सभी दोस्तों के साथ वहां पहुँच जाती है। वहां आने पर जब उसके पत्नी और पत्नी के सभी दोस्तों को भी इस बात की पता लगती है कि इस पार्टी का संन्यासी गुरू वहीं व्यक्ति है। जो उस औरत का पति भी है। और जिससे अभी तक उस औरत की तलाक भी नहीं हुई रहती है। तब इस भोलेभाले व्यक्ति की पत्नी ऊसे घसीट कर अदालत में ले जाने की बात की भी ऊसे धमकी देने लगती है। जिस बात से नाराज होकर वह भोला भाला व्यक्ति फिर अपनी पत्नी की बातों से रोने भी लगता है। जिस बात से चिंतित होकर उसके फोर्टी ईयर्स प्लान पार्टी के और सभी सदस्य भी दुःखी हो जाते हैं। तथा अंत में जब इस मामले का मुकदमा अदालत में चला जाता है। तब इस भोलेभाले व्यक्ति को भी अदालत के सामने अपना पक्ष भी रखने का मौका मिलता है। अदालत इस भोलेभाले व्यक्ति के पक्ष में हीं अपना अंतिम फैसला भी सुनाती है। लेकिन उससे पहले इस भोलेभाले व्यक्ति को अपने पत्नी से तलाक भी लेना होगा कोर्ट यह भी फैसला दे देता है। जिसके बाद भोलेभाले व्यक्ति की पत्नी भी तब इसी फोर्टी ईयर्स प्लान पार्टी की हीं हमेशा के लिए सदस्या भी बन जाती है। तब वह भी औरो की तरह हीं अपने संन्यासी पति यानि गुरू के उपर बिल्कुल फिदा भी रहने लग जाती है। लेकिन उसके संन्यासी पति की नजरों में सभी महिलाएं और शिष्य बिल्कुल ही एक समान नजर आने लगते हैं। वह हर रोज की तरह उस रोज भी अपने आश्रम के सभी शिष्यों के साथ साथ नृत्य करते करते भगवान श्री कृष्ण के उस चित्र की तरफ देखकर रुकने लगता है जिस चित्र में भगवान श्रीकृष्ण गोपीयों के संग नृत्य करते हुए दिखते हैं। और इस तरह से इस कहानी का भी यहीं पर अंत हो जाता है।
यह कहानी एक ऐसे भोलेभाले व्यक्ति की कहानी है, जो अपनी पत्नी से बहुत प्यार करता है। लेकिन उसकी पत्नी इस व्यक्ति की ज़रा भी इज़्ज़त नहीं करती है। क्योंकि उसके पत्नी की नज़रों में इस व्यक्ति को इतनी भी अक्ल नहीं रहती है कि जिससे वह स्वयं अपना हित भी कभी समझ सके। इस व्यक्ति की पत्नी एक कमाऊ पत्नी है। इसलिए वह इसके ऊपर हमेशा रोबदाब हीं चलाती रहती है। इसीलिए धीरे-धीरे यह व्यक्ति अपनी पत्नी की रोबदाब सहते हुए अपनी पत्नी के साथसाथ उसकी और सभी साथियों और सहेलियों का भी रोब-दाब सहन करने का भी अभ्यस्त होते जाता है। इसी क्रम में वह समाज में सबके मज़ाक का पात्र भी बनते चला जाता है। आसपास के लोग उसके साथ इस तरह का व्यवहार भी करने लगते हैं जैसे वह भोला भाला व्यक्ति कोई नामर्द व्यक्ति भी हो। लेकिन जब उसे यह नामर्द व्यक्ति समझने वाली व्यवहार स्वयं उसकी पत्नी भी करने लगती है। तब उस समय से उसकी पत्नी फिर भी उसे अपना पति तो मानती है, परंतु वह उसके साथ कभी भी शारीरिक संबंध स्थापित करना नहीं चाहती है। तथा इसी क्रम में लोगों की बातों में आकर इस भोले-भाले व्यक्ति की पत्नी इसके कई खूबियों को भी बिल्कुल नज़रअंदाज करने लग जाती है। उसकी पत्नी हमेशा इस गम में रहने लगती है कि उसका पति उसके किसी काम का नहीं है। वह समझती है उसका पति एक नंबर का नकारा है। Historical वह अपने इस ग़म को भुलाने के लिए लोगों की बातों में आकर धीरे-धीरे स्वयं हीं शराब पीने की आदी भी होती चली जाती है। कई बार तो ऐसा भी होने लगता है कि उसके घर पर रातरात भर किटी पार्टी साथ-साथ शराब पीने वाली महिलाओं की जमघट लगते रहने के कारण वह स्वयं कई बार नौकरी पर भी नहीं जा पाती है। इस क्रम में एक ऐसा समय भी आ जाता है कि जब उसकी पत्नी लगातार पार्टी करने और शराब पीते रहने के कारण कई महिनों तक अपनी नौकरी पर नहीं जा पाती है। दूसरी तरफ यह व्यक्ति चूकि अपने पत्नी से स्वयं बहुत प्यार भी करता है इसलिए वह स्वयं उससे कुछ अच्छी बात कहने से भी डरने लगा होता है। इसलिए वह चाहकर भी अपने पत्नी से इस संबंध में कुछ अपना अच्छा राय भी उसे नहीं दे पाता है। इसी क्रम में वह भोलाभाला व्यक्ति एक दिन एक ऐसे व्यक्ति के संपर्क में भी आता है जो कि स्वयं को एक संन्यासी कहता है। वह कई व्यक्तियों को अपने आश्रम में आनंद पूर्व रहने की बात भी उससे कहता है। वह संन्यासी व्यक्ति फोर्टी ईयर्स प्लान पार्टी का संस्थापक होता है। तथा वह संन्यासी व्यक्ति जब उस भोलेभाले व्यक्ति से अपने पार्टी का प्लान बताता है तब यह भोलाभाला व्यक्ति उसकी बातों पर स्वयं इस तरह से विश्वास करने लग जाता है जैसे वास्तव में वह संन्यासी व्यक्ति इस भोलेभाले व्यक्ति के लिए कोई एक मसीहा भी बनकर आ गया हो। फिर इस भोलेभाले व्यक्ति का हमारे प्रचलित पारिवारिक सामाजिक व्यवस्था से तत्काल मोह भी भंग हो जाता है। एक तरफ इस भोलेभाले व्यक्ति की पत्नी सिर्फ लोगों की बातों में आकर, अपने पति की इज़्ज़त ना कर पाने की वज़ह से उसके प्रति बिल्कुल लापरवाह होती चली जाती है। तो वहीं दूसरी तरफ यह भोला व्यक्ति स्वयं भी एक संन्यासी की बातों में आकर अपनी पत्नी की बुरी आदतों के प्रति भी अब बिल्कुल बेपरवाह हो जाता है। तथा इसी क्रम में यह भोला भाला व्यक्ति जिस संन्यासी के संपर्क में आया रहता है उसका सबसे बड़ा तथा विश्वसनीय शिष्य भी दिखने लगता है। तभी इस भोलेभाले व्यक्ति को अपने संन्यासी गुरू के कहने पर एक दिन अचानक से अपना घर द्वार और सब कुछ छोड़कर भी तब उसी संन्यासी व्यक्ति के पास रहने के लिए भी जाना होता है। जहां रहने के दौरान इस भोलेभाले व्यक्ति के पूछने पर वह संन्यासी व्यक्ति तब उसे अपनी भी पूरी कहानी बताता है। जिसमें वह संन्यासी व्यक्ति उसे अपने जीवन में किये गए अपने सभी अच्छे और बुरे कर्मों से भी तब उसे अवगत कराता है। जिसकी बातों का इस भोलेभाले व्यक्ति के उपर फिर इस तरह से प्रभाव होता है कि तब वह फौरन हीं पुनः अपने घर भी लौटकर चला जाता है। जहां जाने पर तब उसकी पत्नी फिर से उसे इस बात के लिए भी डांटना शुरू कर देती है। ..कि वह इतने इतने दिनों तक कहां कहां रहता है, और अपनी जिम्मेवारियों को समझता क्यों नहीं है। इसी क्रम में यह व्यक्ति अपनी पत्नी को यह सारी घटना बताता है। तब वह फिर से इस बात के कारण भी अपने पति का और सभी लोगों के सामने भी मज़ाक बनाने लगती है। और वो तब भी इस बात के लिए भी स्वयं को ज़रा भी दोषी नहीं समझ पाती है। उसके बाद भी वह जब भी अपनी पत्नी के साथ कभी कभी शारीरिक संबंध स्थापित भी करना चाहता है। तब भी फिर से उसकी पत्नी उसके साथ शारीरिक संबंध स्थापित करने में उसका कभी साथ नहीं देती है। इस क्रम में वह बिल्कुल हीं किसी प्यासे मछली की तरह इस तरह के एक क्षणिक सुख के अभाव में छटपटाने लगता है। तथा इसी क्रम में तब इस भोलेभाले व्यक्ति को उस संन्यासी की बातों की भी फिर से याद आने लगती है। तब वह फिर से अचानक हीं अपना घर छोड़कर और उस संन्यासी के पास चला जाता है। जो संन्यासी व्यक्ति फोर्टी ईयर्स प्लान पार्टी का संस्थापक सदस्य भी रहता है। उसे अपने पास आते देखकर वह उसके उपर हंसता है। और कहता है.. । मुझे पता था कि तुम एक ना एक दिन मेरे पास लौटकर फिर आओगे। इसीलिए मैनें तुम्हें वापस जाने भी दिया। क्योंकि, तब तुम आज के इस प्रचलित पारिवारिक सामाजिक व्यवस्थाओं के मोह माया के जाल से निकलने का भले हीं दावा कर रहे थे। लेकिन तुम तब भी उस मोह माया के जाल से निकल नहीं पाए थे। इसलिए मैनें तुम्हें यह बात बताया था कि इस फोर्टी ईयर्स प्लान पार्टी का एक नियम यह भी होता है कि एक बार जो व्यक्ति इस पार्टी का सदस्य बन जाता है, उस व्यक्ति की सदस्यता भी कम से कम चालीस वर्षों तक की हो जाती है। तथा इस बीच उस व्यक्ति को इसी पार्टी के सारे व्यवस्था और नियमों के अंतर्गत स्वयं अपना जीवन भी लगातार कम से कम चालीस वर्षों तक जीना हीं होता है। लेकिन घर से लौटकर दुबारा इस आश्रम में आने के बाद जब वह भोलाभाला व्यक्ति फिर भी संन्यासी व्यक्ति द्वारा उसे अपने फोर्टी ईयर्स प्लान पार्टी के इसी व्यवस्था और नियमों के अंतर्गत स्वयं उसको भी औरों की तरह हीं फिर भी इसी तरह से जीवन जीने के लिए ज़रा भी बाध्य भी नहीं करता है। और ऐसा नियम रहते हुए भी वह संन्यासी व्यक्ति अपनी पार्टी में आए और किसी व्यक्ति को भी इसी नियम को मानने हेतु स्वयं कभी किसी और को भी बाध्य नहीं करता है। अपनी पार्टी के व्यवस्था और नियमों को लोगों की जरूरतों के हिसाब से स्वयं कई कई बार बदलते और लोगों की ज़रू़रतों के हिसाब से इस व्यवस्था में कुछ कुछ बातें जोड़ते भी रहता है। इसी क्रम में वह संन्यासी व्यक्ति अबकी बार इस भोलेभाले व्यक्ति को उसके पूछने पर अपनी पार्टी के एक और नियम से भी तब उसे परिचित करा देता है। जब वह संन्यासी व्यक्ति से अपने पत्नी के बारे में यह बात फिर बताता है। कि वह उसके चाहने के बावजूद भी कभी भी उसके साथ शारीरिक संबंध नहीं बनाती थी। तो पहली बार की तरह इस बार भी वह संन्यासी व्यक्ति इस भोलेभाले व्यक्ति को फिर अपने आश्रम में वह एक टोकन रखने का डिब्बा दिखाते हुए वह बात फिर से उसे बताता है, जो बात सुनकर वह भोलाभाला व्यक्ति पहली बार आश्रम छोड़कर और फिर अपने घर भी लौट गया था। लेकिन इस बार जब वह संन्यासी व्यक्ति आश्रम में उस भोलेभाले व्यक्ति को वह टोकन रखने वाला वहीं डब्बा दिखाकर फिर वह बात करता है कि वह जब भी चाहे तो इस टोकन वाले डिब्बे में अपने नाम के साथ इस पार्टी में मौजूद किसी भी दूसरी औरत के नाम का एक टोकन डालकर और तब उसके द्वारा डाले गए टोकन के साथ भी फिर अपना नाम मिलने पर उस औरत के साथ अपना शारीरिक संबंध भी बना सकता है। लेकिन इसके बाद तब वह चाहकर भी फिर कभी चालीस वर्ष से पहले कहीं और नहीं जा सकता है। मगर तब यह भोलाभाला व्यक्ति संन्यासी के इस बात से पहले की तरह दुःखी नहीं होता बल्कि खुश हो जाता है। अब वह आश्रम में मौजूद सभी औरतों को देखता है। और उनके नाम का टोकन डालते रहता है। तब भी जब उसके नाम का टोकन किसी दूसरी औरत के टोकन के साथ नहीं मिलता है। तब वह फिर बारी बारी से उन्हें इम्प्रेस करने की कोशिश भी करने लगता है। देखते हीं देखते जब कई दिन ऐसे हीं बीतने लगते है तब भी। इस भोला व्यक्ति के नाम के साथ किसी और औरत के नाम का टोकन फिर भी मैच नहीं करता है। जिससे निराश होकर वह फिर से अपने उस संन्यासी गुरू से मिलता है। और तब उसे भी इस घटना से अवगत करा देता है। फिर वह संन्यासी व्यक्ति उससे अपने बारे में भी जिक्र करते हुए कहता है कि उसके नाम के साथ तो आश्रम में रोज़ाना कई टोकन मैच करते हैं। मगर वह फिर भी कभी भी किसी के साथ भी अपना शारीरिक संबंध नहीं बनाता है। और ना हीं वह काम क्रिया को बच्चा पैदा करने के अलावा और भी कुछ समझता है। संन्यासी उस भोलेभाले व्यक्ति से यह भी बताता है कि वास्तव में ऊसे अब क्या करना चाहिए, और उसे स्वयं भी किस तरह से अपना जीवन जीना चाहिए। इसी क्रम में वह बताता है कि किसी को दुख और सुख भी कैसे हो सकता है। वह बताता है कि ऊसे किसी औरत के साथ शारीरिक संबंध बनाने का अवसर भी क्यों नहीं मिल पा रहा है। वह ऊसे बताता है कि हम जैसा सोचते हैं स्वयं भी वैसा हीं कैसे बन जाते हैं। और वह ऊसे यह भी बताता है कि अब ऊसे क्या करना चाहिए। फिर वह भोला भाला व्यक्ति अपने गुरू की बातों से इस तरह से प्रभावित होता है। कि वह भी अब अपने गुरू के तरह हीं बनने के बारे में सोचने लगता है। इसी क्रम में एक दिन इस भोले भाले व्यक्ति का गुरू वह संन्यासी व्यक्ति एक पार्टी का आयोजन करता है। जिस पार्टी में इस पार्टी के सभी मर्द और औरतों को एक साथ खाने पीने और डांस करने का मौका भी मिलता है। जिस पार्टी में इस पार्टी के संस्थापक सदस्य यानी संन्यासी गुरू के उपर इस पार्टी में उपस्थित सभी औरतों और मर्दों को भी फिदा होते हुए देखकर यह भोला भाला युवक स्वयं के बारे में भी अपने संन्यासी गुरू की तरह हीं सोचने लगता है। जब ऊसे यहीं सोचकर आँख बंद किये हुए हालत में नाचते हुए। एक औरत एकाएक ऊसे अपने पास देखती है। तब वह ऊसे अचानक से अपने गले से भी लगा लेती है। उससे अपने नाम का टोकन डालने के बारे में भी कहती है। मगर वह भोला भाला व्यक्ति अब इस तरह से समझदार हो चुका होता है, कि वह फिर भी ना हीं उस औरत के और ना हीं किसी और औरत के हीं नाम का टोकन भी डालता है। इस तरह से तब वह स्वयं भी अपने पार्टी के संस्थापक सदस्य यानि कि अपने संन्यासी गुरू के हीं रास्तों पर भी अब चलने लग जाता है। धीरे धीरे एक ऐसा वक्त भी आ जाता है। जब इस भोलेभाले व्यक्ति के नाम पर एक साथ कई कई टोकन भी गिरने लग जाते हैं। किसी किसी दिन तो ऐसा भी होता है कि उस दिन सारी की सारी महिलाओं के टोकन हीं, इसी भोले भाले और उसके गुरु संन्यासी व्यक्ति के नाम पर गिरने लग जाते हैं। मगर वह अपने संन्यासी गुरु की तरह हीं किसी के साथ अपना शारीरिक संबंध बनाने के बारे में अब सोचता तक भी नहीं है। इसी क्रम में एक दिन ऐसा भी आता है जब इस भोले भाले व्यक्ति के पार्टी के संस्थापक सदस्य यानी संन्यासी गुरू की मृत्यु हो जाती है। उस दिन अपने गुरू के मृत्यु से उदास होकर जब यह भोलाभाला व्यक्ति कुछ सोच रहा होता है तभी फोर्टी ईयर्स प्लान पार्टी के सभी सदस्य एक साथ इस भोलेभाले व्यक्ति के पास आते हैं। तब उनमें से एक महिला इसे उदासी की हालत में बैठे हुए देखकर और इस भोलेभाले व्यक्ति से अपने पार्टी के लोगों की बात बताते हुए कहती है। गुरू जी हम सभी लोगों ने मिलकर कल एक पार्टी का आयोजन किया है। और अब तो हमारे पार्टी के संस्थापक सदस्य और हमारे सबसे पहले गुरू जी इस दुनिया में तो रहे नहीं। इसलिए अब हम सभी लोगों ने मिलकर यह निर्णय लिया है। कि अब हमारे पहले गुरू जी के बाद आप हीं हमारे पार्टी की कमान भी संभालें। अब आप हीं हमारे गुरु और पार्टी के नेता भी हैं। फिर जब यह भोला भाला व्यक्ति अचानक से अपने बारे में इतनी बड़ी जिम्मेदारी की बात सुनता है। तो अपने पार्टी के इन सभी लोगों को ऐसा करने से मना भी करना चाहता है। परंतु तब भी ऊसे यह जिम्मेवारी संभालनी हीं पड़ जाती है। क्योंकि उन सबों की नज़रों में यहीं भोला भाला व्यक्ति इस पद के लिए सबसे उपयुक्त भी होता है। जो फोर्टी ईयर्स प्लान पार्टी के संस्थापक सदस्य और पहले संन्यासी गुरू की कुर्सी भी संभाल सकता है। इन सभी बातों का निर्णय इसी पार्टी के दौरान हीं हो जाता है। अपने गुरू की कुर्सी संभालने के बाद पार्टी के अकाउंट में इस भोलेभाले व्यक्ति को जितने रूपैयों का पता चलता है। इस बात को जानकर तब ये बिल्कुल आश्यर्यचकित भी हो जाता है। वह फौरन हीं यह बात अपने पार्टी के और सभी सदस्यों को भी बताता है। इसी क्रम में सर्वसम्मति से यह भी निर्णय हो जाता है कि अब आश्रम में हर रोज रात में कम से कम चार घंटे लगातार सिर्फ पार्टी हीं पार्टी चलेगी। जिस क्रम में एक दिन ऐसा भी आता है जब अपने दोस्तों से इस पार्टी की चर्चा सुनकर। इस भोलेभाले व्यक्ति की पत्नी भी अपने सभी दोस्तों के साथ वहां पहुँच जाती है। वहां आने पर जब उसके पत्नी और पत्नी के सभी दोस्तों को भी इस बात की पता लगती है कि इस पार्टी का संन्यासी गुरू वहीं व्यक्ति है। जो उस औरत का पति भी है। और जिससे अभी तक उस औरत की तलाक भी नहीं हुई रहती है। तब इस भोलेभाले व्यक्ति की पत्नी ऊसे घसीट कर अदालत में ले जाने की बात की भी ऊसे धमकी देने लगती है। जिस बात से नाराज होकर वह भोला भाला व्यक्ति फिर अपनी पत्नी की बातों से रोने भी लगता है। जिस बात से चिंतित होकर उसके फोर्टी ईयर्स प्लान पार्टी के और सभी सदस्य भी दुःखी हो जाते हैं। तथा अंत में जब इस मामले का मुकदमा अदालत में चला जाता है। तब इस भोलेभाले व्यक्ति को भी अदालत के सामने अपना पक्ष भी रखने का मौका मिलता है। अदालत इस भोलेभाले व्यक्ति के पक्ष में हीं अपना अंतिम फैसला भी सुनाती है। लेकिन उससे पहले इस भोलेभाले व्यक्ति को अपने पत्नी से तलाक भी लेना होगा कोर्ट यह भी फैसला दे देता है। जिसके बाद भोलेभाले व्यक्ति की पत्नी भी तब इसी फोर्टी ईयर्स प्लान पार्टी की हीं हमेशा के लिए सदस्या भी बन जाती है। तब वह भी औरो की तरह हीं अपने संन्यासी पति यानि गुरू के उपर बिल्कुल फिदा भी रहने लग जाती है। लेकिन उसके संन्यासी पति की नजरों में सभी महिलाएं और शिष्य बिल्कुल ही एक समान नजर आने लगते हैं। वह हर रोज की तरह उस रोज भी अपने आश्रम के सभी शिष्यों के साथ साथ नृत्य करते करते भगवान श्री कृष्ण के उस चित्र की तरफ देखकर रुकने लगता है जिस चित्र में भगवान श्रीकृष्ण गोपीयों के संग नृत्य करते हुए दिखते हैं। और इस तरह से इस कहानी का भी यहीं पर अंत हो जाता है।
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